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सेहत: किशोरियों की सेहत का ख्याल, एम्स बिलासपुर में होगा शोध; वित्त पोषित है यह प्रोजेक्ट

सरोज पाठक, बिलासपुर। Published by: Ankesh Dogra Updated Fri, 27 Mar 2026 10:12 AM IST
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सार

एम्स बिलासपुर में पीसीओएस की समस्या पर महत्वपूर्ण शोध प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है। संस्थान ने इस प्रोजेक्ट के लिए प्रोजेक्ट रिसर्च साइंटिस्ट-I (नॉन-मेडिकल) के एक पद पर भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पढ़ें पूरी खबर...

Health Caring for Adolescent Girls Health Research to be Conducted at AIIMS Bilaspur
एम्स बिलासपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

किशोरियों में तेजी से बढ़ रही पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) की समस्या पर एम्स बिलासपुर में महत्वपूर्ण शोध प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से वित्त पोषित यह अध्ययन महिलाओं के स्वास्थ्य, विशेषकर किशोरियों के प्रजनन स्वास्थ्य के क्षेत्र में अहम योगदान देने की उम्मीद जता रहा है।

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संस्थान ने इस प्रोजेक्ट के लिए प्रोजेक्ट रिसर्च साइंटिस्ट-I (नॉन-मेडिकल) के एक पद पर भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।  पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम आज के समय में किशोरियों और युवा महिलाओं में सबसे आम विकारों में से एक बन चुका है। देश में विभिन्न अध्ययनों के अनुसार इसकी व्यापकता 9 से 22 प्रतिशत के बीच आंकी गई है, जो चिंता का विषय है। इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में मासिक धर्म का अनियमित होना, हार्मोन असंतुलन, चेहरे पर मुंहासे, शरीर पर अनचाहे बाल, वजन बढ़ना और मानसिक तनाव शामिल हैं। अनियमित खानपान, फास्ट फूड की बढ़ती आदत, शारीरिक निष्क्रियता और बढ़ता तनाव इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। 

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संस्थान के अनुसार इस शोध का शीर्षक किशोरियों में पीसीओएस पर समग्र जीवनशैली हस्तक्षेप बनाम सामान्य देखभाल है, जिसके तहत दोनों तरीकों की प्रभावशीलता का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा। किशोरियों को दो समूहों में विभाजित किया जाएगा। पहले समूह को होलिस्टिक लाइफस्टाइल इंटरवेंशन दिया जाएगा, जिसमें संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, व्यवहार परिवर्तन और निरंतर मॉनीटरिंग शामिल होगी। दूसरे समूह को केवल सामान्य चिकित्सा सलाह प्रदान की जाएगी। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि क्या संरचित जीवनशैली हस्तक्षेप पीसीओएस के लक्षणों में अधिक प्रभावी सुधार ला सकता है या नहीं। इस प्रोजेक्ट की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर फिजियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर हैं, जिनके नेतृत्व में यह शोध कार्य किया जाएगा।

रिसर्च टीम में शामिल होने का अवसर
प्रोजेक्ट रिसर्च साइंटिस्ट-I (नॉन-मेडिकल) के लिए लाइफ साइंसेज में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री जरूरी है। क्लीनिकल डाटा कलेक्शन में एक वर्ष का अनुभव, कंप्यूटर एप्लीकेशंस का ज्ञान होना चाहिए। चयनित उम्मीदवार को प्रोजेक्ट के तहत डाटा संग्रह, प्रतिभागियों की मॉनीटरिंग, रिकॉर्ड प्रबंधन और अन्य शोध गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 15 अप्रैल है। योग्य उम्मीदवारों की सूची 25 अप्रैल तक जारी होगी। यह शोध परियोजना कुल तीन वर्ष की अवधि के लिए स्वीकृत है, हालांकि प्रारंभिक नियुक्ति एक वर्ष के लिए की जाएगी। संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। नियुक्ति पूरी तरह अस्थायी होगी।
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