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Bilaspur News: विद्यार्थियों ने थीसिस तैयार करने के सीखे गुर
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एम्स बिलासपुर में आयोजित थीसिस प्रोटोकॉल वर्कशॉप में मौजूद प्रशिक्षु चिकित्सक। स्रोत: एम्स प्रब
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एम्स में पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए वर्कशॉप का आयोजन
30 छात्रों ने लिया हिस्सा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर के सामुदायिक और पारिवारिक चिकित्सा विभाग की ओर से पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए थीसिस प्रोटोकॉल राइटिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह ने मार्गदर्शन किया। उन्होंने छात्रों को उच्च नैतिक मानकों के साथ सत्यनिष्ठ शोध करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सही और नैतिक अनुसंधान ही वैज्ञानिक समुदाय में विश्वास की नींव है।
वर्कशॉप में जनवरी 2026 बैच के 30 पोस्टग्रेजुएट छात्रों ने भाग लिया, जो विभिन्न स्पेशलिटीज और सुपर-स्पेशलिटीज से संबंधित थे। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को वैज्ञानिक रूप से मजबूत और सटीक थीसिस प्रोटोकॉल तैयार करने के लिए कौशल देना था, ताकि उनके शोध कार्य का ठोस आधार तैयार हो सके।
इस दौरान डॉ. अनुपम पराशर, डॉ. मीनल ठाकरे, डॉ. नवप्रीत, डॉ. अनुपमा और डॉ. निकिता शर्मा ने थीसिस प्रोटोकॉल तैयार करने की तकनीक, शोध के महत्व तथा डेटा संग्रह और विश्लेषण की सही पद्धतियों की जानकारी दी। सामुदायिक और पारिवारिक चिकित्सा विभाग द्वारा इस प्रकार की कार्यशालाएं हर नए बैच के लिए नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं, ताकि पोस्टग्रेजुएट छात्रों को शोध और थीसिस निर्माण में मजबूत आधार मिल सके।
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30 छात्रों ने लिया हिस्सा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर के सामुदायिक और पारिवारिक चिकित्सा विभाग की ओर से पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए थीसिस प्रोटोकॉल राइटिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह ने मार्गदर्शन किया। उन्होंने छात्रों को उच्च नैतिक मानकों के साथ सत्यनिष्ठ शोध करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सही और नैतिक अनुसंधान ही वैज्ञानिक समुदाय में विश्वास की नींव है।
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वर्कशॉप में जनवरी 2026 बैच के 30 पोस्टग्रेजुएट छात्रों ने भाग लिया, जो विभिन्न स्पेशलिटीज और सुपर-स्पेशलिटीज से संबंधित थे। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को वैज्ञानिक रूप से मजबूत और सटीक थीसिस प्रोटोकॉल तैयार करने के लिए कौशल देना था, ताकि उनके शोध कार्य का ठोस आधार तैयार हो सके।
इस दौरान डॉ. अनुपम पराशर, डॉ. मीनल ठाकरे, डॉ. नवप्रीत, डॉ. अनुपमा और डॉ. निकिता शर्मा ने थीसिस प्रोटोकॉल तैयार करने की तकनीक, शोध के महत्व तथा डेटा संग्रह और विश्लेषण की सही पद्धतियों की जानकारी दी। सामुदायिक और पारिवारिक चिकित्सा विभाग द्वारा इस प्रकार की कार्यशालाएं हर नए बैच के लिए नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं, ताकि पोस्टग्रेजुएट छात्रों को शोध और थीसिस निर्माण में मजबूत आधार मिल सके।