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भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण से ही भारत बनेगा विश्व गुरु : चंदेल
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शिवा कॉलेज में आयोजित भारतीय शिक्षण मंडल के स्थापना दिवस पर मुख्यातिथि को सम्मानित करते आयोजक।
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शिवा कॉलेज घुमारवीं में भारतीय शिक्षण मंडल का स्थापना दिवस मनाया
उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा पर संगोष्ठी आयोजित
मातृभाषा आधारित शिक्षा पर वक्ताओं ने दिया जोर
भारतीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भारतीय शिक्षण मंडल हिमाचल प्रांत और शिवा कॉलेज ऑफ एजुकेशन घुमारवीं के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय शिक्षण मंडल का 57वां स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनने के लिए ज्ञान परंपराओं का संरक्षण करना अनिवार्य है। उन्होंने रामायण के चार भाइयों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के प्रतीक बताते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा की महता पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा प्रणाली को रोजगारपरक, नैतिक और व्यवहार आधारित बनाया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी केवल डिग्रीधारी न बनकर समाज के उपयोगी नागरिक बन सकें।
भारतीय शिक्षण मंडल हिमाचल प्रांत के प्रांत सह मंत्री डॉ. ओम प्रकाश प्रजापति ने शिक्षा में बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए मातृभाषा में शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के अधिकांश देश अपनी भाषा को प्राथमिकता देते हैं, जबकि भारत में मातृभाषा की उपेक्षा चिंता का विषय है।
प्रो. चमन लाल बंगा ने कीकहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में भारतीय परंपराओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परंपरा और आधुनिकता के संतुलन से ही आत्मज्ञान संभव है।
विशिष्ट अतिथि एवं शिवा कॉलेज ऑफ इंस्टीट्यूशंस के कार्यकारी निदेशक इंजीनियर आयुष शर्मा ने विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया। मुख्य वक्ता प्रो. कुलभूषण चंदेल ने कहा कि प्राचीन भारत में शिक्षा जीवन जीने की संपूर्ण पद्धति थी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को गुरुओं की भूमिका निभाते हुए विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और भारतीयता से जोड़ने की दिशा में कार्य करना होगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीतिका शर्मा ने किया।
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मातृभाषा आधारित शिक्षा पर वक्ताओं ने दिया जोर
भारतीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भारतीय शिक्षण मंडल हिमाचल प्रांत और शिवा कॉलेज ऑफ एजुकेशन घुमारवीं के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय शिक्षण मंडल का 57वां स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनने के लिए ज्ञान परंपराओं का संरक्षण करना अनिवार्य है। उन्होंने रामायण के चार भाइयों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के प्रतीक बताते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा की महता पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा प्रणाली को रोजगारपरक, नैतिक और व्यवहार आधारित बनाया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी केवल डिग्रीधारी न बनकर समाज के उपयोगी नागरिक बन सकें।
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भारतीय शिक्षण मंडल हिमाचल प्रांत के प्रांत सह मंत्री डॉ. ओम प्रकाश प्रजापति ने शिक्षा में बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए मातृभाषा में शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के अधिकांश देश अपनी भाषा को प्राथमिकता देते हैं, जबकि भारत में मातृभाषा की उपेक्षा चिंता का विषय है।
प्रो. चमन लाल बंगा ने कीकहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में भारतीय परंपराओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परंपरा और आधुनिकता के संतुलन से ही आत्मज्ञान संभव है।
विशिष्ट अतिथि एवं शिवा कॉलेज ऑफ इंस्टीट्यूशंस के कार्यकारी निदेशक इंजीनियर आयुष शर्मा ने विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया। मुख्य वक्ता प्रो. कुलभूषण चंदेल ने कहा कि प्राचीन भारत में शिक्षा जीवन जीने की संपूर्ण पद्धति थी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को गुरुओं की भूमिका निभाते हुए विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और भारतीयता से जोड़ने की दिशा में कार्य करना होगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीतिका शर्मा ने किया।