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Bilaspur News: बिलासपुर में लावारिस पशुओं से बढ़ी लोगों की परेशानी
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बिलासपुर शहर की सड़कों पर लावारिस पशु। संवाद
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मुख्य सड़कों और रिहायशी इलाकों में दिनभर घूमते दिख रहे पशु
रात के समय बढ़ रहा हादसों का खतरा, वाहन चालक चिंतित
दुकानों के बाहर रखे सामान को पहुंचा रहे नुकसान
नगर परिषद के अभियान के बावजूद नहीं दिखा स्थायी समाधान
शहरवासियों ने सख्त नियम और विशेष अभियान चलाने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर में लावारिस पशुओं की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। नगर निकाय चुनाव के दौरान यह मुद्दा एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर मोहल्लों और गलियों तक घूम रहे बेसहारा पशु आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।
लोगों का कहना है कि हर चुनाव में नेताओं और जनप्रतिनिधियों की ओर से इस समस्या के समाधान के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद स्थिति जस की तस बनी रहती है। शहर के बाजारों, बस स्टैंड क्षेत्र, अस्पताल रोड, कॉलेज मार्ग और कई रिहायशी इलाकों में दिनभर लावारिस पशु खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं।
कई बार पशु सड़क के बीचोबीच बैठ जाते हैं। इससे यातायात प्रभावित होता है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है। दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात के समय यह समस्या और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि अंधेरे में सड़क पर बैठे पशु आसानी से दिखाई नहीं देते।
बाजारों में घूम रहे पशु दुकानों के बाहर रखे सामान को नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार लोग इनसे डरकर रास्ता बदलने को मजबूर हो जाते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों और महिलाओं को भी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। लोगों का कहना है कि नगर परिषद की ओर से समय-समय पर अभियान चलाने की बातें जरूर की जाती हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। हालांकि कई बार लावारिस पशुओं को सड़कों से उठाकर गोशालाओं में भेजा जाता है, फिर भी स्थिति में अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिल रहा।
नगर निकाय चुनाव के बीच अब यह मुद्दा राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। बिलासपुर निवासी दीपिका, नीतिन, अशोक, राकेश, आदित्य और सोहन ने मांग उठाई है कि नगर परिषद स्तर पर विशेष अभियान चलाकर लावारिस पशुओं की पहचान की जाए और उनके लिए उचित व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही पशुपालकों के लिए भी सख्त नियम लागू किए जाएं, ताकि पशुओं को सड़कों पर छोड़ने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो सके।
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दुकानों के बाहर रखे सामान को पहुंचा रहे नुकसान
नगर परिषद के अभियान के बावजूद नहीं दिखा स्थायी समाधान
शहरवासियों ने सख्त नियम और विशेष अभियान चलाने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर में लावारिस पशुओं की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। नगर निकाय चुनाव के दौरान यह मुद्दा एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर मोहल्लों और गलियों तक घूम रहे बेसहारा पशु आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।
लोगों का कहना है कि हर चुनाव में नेताओं और जनप्रतिनिधियों की ओर से इस समस्या के समाधान के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद स्थिति जस की तस बनी रहती है। शहर के बाजारों, बस स्टैंड क्षेत्र, अस्पताल रोड, कॉलेज मार्ग और कई रिहायशी इलाकों में दिनभर लावारिस पशु खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं।
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कई बार पशु सड़क के बीचोबीच बैठ जाते हैं। इससे यातायात प्रभावित होता है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है। दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात के समय यह समस्या और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि अंधेरे में सड़क पर बैठे पशु आसानी से दिखाई नहीं देते।
बाजारों में घूम रहे पशु दुकानों के बाहर रखे सामान को नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार लोग इनसे डरकर रास्ता बदलने को मजबूर हो जाते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों और महिलाओं को भी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। लोगों का कहना है कि नगर परिषद की ओर से समय-समय पर अभियान चलाने की बातें जरूर की जाती हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। हालांकि कई बार लावारिस पशुओं को सड़कों से उठाकर गोशालाओं में भेजा जाता है, फिर भी स्थिति में अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिल रहा।
नगर निकाय चुनाव के बीच अब यह मुद्दा राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। बिलासपुर निवासी दीपिका, नीतिन, अशोक, राकेश, आदित्य और सोहन ने मांग उठाई है कि नगर परिषद स्तर पर विशेष अभियान चलाकर लावारिस पशुओं की पहचान की जाए और उनके लिए उचित व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही पशुपालकों के लिए भी सख्त नियम लागू किए जाएं, ताकि पशुओं को सड़कों पर छोड़ने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो सके।