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Chamba News: दुर्लभ वन्यजीवों का सुरक्षित आश्रय स्थल बने चंबा के जंगल
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चंबा। विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण में चंबा जिला महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिले के विभिन्न वन्यजीव अभ्यारण्यों और जंगलों में बर्फानी तेंदुआ, कस्तूरी मृग, भूरा भालू, चीर तीतर, हिमालयी गिद्ध और स्टेपी ईगल जैसी दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है।
वन्यजीव विभाग की ओर से कुगति, भांदल, पांगी, सेचू नाला और गमगुल सियाबेही वन्यजीव अभ्यारण्यों में लगाए गए ट्रैप कैमरों में इन दुर्लभ जीवों की तस्वीरें कैद हुई हैं। इससे स्पष्ट हुआ है कि जिले के जंगल इन प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास बने हुए हैं।
वन विभाग और वन्यजीव प्रभाग इन प्रजातियों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। विभागीय निगरानी और सख्ती के कारण अवैध शिकार की घटनाओं में कमी आई है, जिससे इन वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से पनपने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इनके संरक्षण के प्रयास जारी रहे तो आने वाले वर्षों में इन दुर्लभ प्रजातियों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। इससे न केवल जैव विविधता को मजबूती मिलेगी, बल्कि वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। देश-विदेश से पर्यटक इन दुर्लभ जीवों को देखने के लिए चंबा का रुख कर सकते हैं।
इनसेट
गमगुल सियाबेही अभ्यारण्य में पहली बार दिखे दुर्लभ वन्यजीव
भांदल क्षेत्र स्थित गमगुल सियाबेही वन्यजीव अभ्यारण्य में पहली बार दुर्लभ भूरे भालू और कस्तूरी मृग की तस्वीरें ट्रैप कैमरों में कैद हुई हैं। इससे पहले इन वन्यजीवों की मौजूदगी की जानकारी केवल स्थानीय लोगों के अनुभवों तक सीमित थी।
कोट
वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विभाग हर संभव कदम उठा रहा है। कर्मचारी दिन-रात नियमित निगरानी कर रहे हैं, ताकि वन्यप्राणियों की इन दुर्लभ प्रजातियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
— कुलदीप जम्वाल, डीएफओ, वन्यजीव विभाग
वन्यजीव विभाग की ओर से कुगति, भांदल, पांगी, सेचू नाला और गमगुल सियाबेही वन्यजीव अभ्यारण्यों में लगाए गए ट्रैप कैमरों में इन दुर्लभ जीवों की तस्वीरें कैद हुई हैं। इससे स्पष्ट हुआ है कि जिले के जंगल इन प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास बने हुए हैं।
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वन विभाग और वन्यजीव प्रभाग इन प्रजातियों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। विभागीय निगरानी और सख्ती के कारण अवैध शिकार की घटनाओं में कमी आई है, जिससे इन वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से पनपने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इनके संरक्षण के प्रयास जारी रहे तो आने वाले वर्षों में इन दुर्लभ प्रजातियों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। इससे न केवल जैव विविधता को मजबूती मिलेगी, बल्कि वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। देश-विदेश से पर्यटक इन दुर्लभ जीवों को देखने के लिए चंबा का रुख कर सकते हैं।
इनसेट
गमगुल सियाबेही अभ्यारण्य में पहली बार दिखे दुर्लभ वन्यजीव
भांदल क्षेत्र स्थित गमगुल सियाबेही वन्यजीव अभ्यारण्य में पहली बार दुर्लभ भूरे भालू और कस्तूरी मृग की तस्वीरें ट्रैप कैमरों में कैद हुई हैं। इससे पहले इन वन्यजीवों की मौजूदगी की जानकारी केवल स्थानीय लोगों के अनुभवों तक सीमित थी।
कोट
वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विभाग हर संभव कदम उठा रहा है। कर्मचारी दिन-रात नियमित निगरानी कर रहे हैं, ताकि वन्यप्राणियों की इन दुर्लभ प्रजातियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
— कुलदीप जम्वाल, डीएफओ, वन्यजीव विभाग