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Chamba News: सीट का लोहा नहीं छोड़ा, मौत को दे दी मात

Sat, 08 Aug 2026 10:59 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Sat, 08 Aug 2026 10:59 PM IST
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Did not give up the iron of the seat, defeated death
घायल सु​ष्मिता।
एक के बाद एक पलटती रही बस, सुष्मिता ने पकड़े रखा सीट का सहारा
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जीने की जिद ने बचाई जिंदगी, अयोध्या से चुराह में पर्यावरण पर रिसर्च करने पहुंची थीं
15 दिनों से चुराह में कर रही थीं शोध, हादसे के बाद टांडा रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। बस सड़क से नीचे उतरते ही पलटने लगी। एक के बाद एक कई पलटे खाती बस को देखकर यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। ऐसे में 32 वर्षीय सुष्मिता ने अपनी सीट के लोहे को कसकर पकड़ लिया। बस लुढ़कती रही लेकिन उन्होंने सीट का सहारा नहीं छोड़ा। उनके मन में सिर्फ एक ही सवाल था कि किसी तरह जिंदगी बच जाए।
सुष्मिता के मुताबिक हादसे के दौरान उन्हें एक पल के लिए लगा कि शायद अब वह जिंदा नहीं बच पाएंगी। बस पलटते हुए नीचे की ओर लुढ़कती रही। उन्होंने डर के बावजूद सीट के लोहे को मजबूती से पकड़े रखा। कुछ देर बाद बस रुकी तो उनकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा और वह बेहोश हो गईं।
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चलुंज बस हादसे में घायल सुष्मिता 32 पुत्री प्रमोद कुमार निवासी अयोध्या को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज चंबा लाया गया। यहां उन्होंने हादसे की पूरी आपबीती सुनाई। दर्द से कराहते हुए भी उनके शब्दों में उस खौफनाक पल की तस्वीर साफ नजर आ रही थी।
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15 दिन से चुराह में कर रही थीं पर्यावरण पर रिसर्च
सुष्मिता पर्यावरण से जुड़े विषय पर शोध करने के लिए अयोध्या से चुराह पहुंची थीं। करीब 15 दिन से वह क्षेत्र में रहकर रिसर्च पूरी करने में जुटी थीं। शनिवार को वह बैरागढ़ से चंबा के लिए बस में सवार हुईं। बस अभी करीब एक किलोमीटर ही आगे पहुंची थी कि अचानक हादसा हो गया। हादसे के बाद घायल अवस्था में मेडिकल कॉलेज पहुंचीं सुष्मिता दर्द से कराह रही थीं। इसी दौरान वह डॉक्टरों से कह रही थीं कि यदि उनकी मौत हो जाए तो उनके घरवालों को इसकी सूचना न दी जाए, क्योंकि उनका कहना था कि घरवाले उनसे प्यार नहीं करते। उनके इस कथन के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या हैं, इसकी पुष्टि उनके परिजनों के बयान के बाद ही हो सकेगी। हादसे के समय और उपचार के दौरान उनके परिजन अस्पताल में मौजूद नहीं थे। पुलिस ने उनके घरवालों को हादसे की सूचना दे दी है।

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गंभीर चोट के चलते टांडा रेफर
सुष्मिता की चोटों को देखते हुए मेडिकल कॉलेज चंबा के चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर उपचार के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। हादसे के बीच सीट का लोहे का सहारा थामे रखने वाली सुष्मिता की जिंदगी फिलहाल डॉक्टरों के भरोसे है।
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