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Chamba News: नहीं माने कर्मचारी, 200 रूट ठप होने की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 24 Jun 2026 11:31 AM IST
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चंबा में गेट मिटिंग के दौरान परिवहन निगम के कर्मचारी।संवाद
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चंबा। प्रदेश में एस्मा लागू किए जाने के बाद भी हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के चालक-परिचालकों ने अपनी बुधवार रात से बसों न चलाने की प्रस्तावित हड़ताल जारी रखने का एलान किया है।
यदि चालक-परिचालक हड़ताल पर जाते हैं तो बुधवार मध्यरात्रि के बाद जिले के करीब 200 रूटों पर एचआरटीसी की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इनमें करीब 180 स्थानीय रूट और 20 लंबी दूरी के रूट शामिल हैं।
ऐसे में वीरवार सुबह से ही यात्रियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और अन्य लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है। हड़ताल की चेतावनी के बाद जिले में बस सेवाओं के ठप होने की आशंका बढ़ गई है। यदि आंदोलन शुरू होता है तो इसका सबसे अधिक असर आम यात्रियों पर पड़ेगा।
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उधर, चालक संघ के जिला प्रधान हेम राज ने साफ कहा है कि हड़ताल किसी भी कीमत पर वापस नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगें मान लेती है तो आंदोलन समाप्त किया जा सकता है, अन्यथा चक्का जाम और हड़ताल हर हाल में जारी रहेगी।
हेम राज ने कहा कि चालक-परिचालक अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं और इसके लिए जेल जाने या नौकरी से बर्खास्त होने तक के लिए तैयार हैं। उन्होंने आम लोगों से इस हड़ताल का समर्थन करने की अपील की और कहा कि यदि बसों के पहिये थमते हैं तो यात्रियों को होने वाली परेशानी की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
उधर, मंगलवार को सरकार और प्रबंधन के साथ हुई वार्ता विफल रहने के बाद चंबा डिपो में आयोजित गेट मीटिंग में चालक-परिचालकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं लिया गया तो बुधवार रात 12 बजे के बाद डिपो से कोई भी बस बाहर नहीं निकलने दी जाएगी।
कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है, जिसके चलते वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर हुए हैं। चालक-परिचालकों का मुख्य विरोध यूनियन प्रधान के तबादला आदेश को लेकर है।
उनका कहना है कि यह फैसला कर्मचारियों की भावनाओं के विपरीत है और इसे तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि तबादला आदेश रद्द नहीं किया गया तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि डिपो में इंजन ऑयल, टायर, स्पेयर पार्ट्स और अन्य जरूरी कलपुर्जों की भारी कमी है, जिससे बसों के रखरखाव और संचालन पर असर पड़ रहा है।
यदि चालक-परिचालक हड़ताल पर जाते हैं तो बुधवार मध्यरात्रि के बाद जिले के करीब 200 रूटों पर एचआरटीसी की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इनमें करीब 180 स्थानीय रूट और 20 लंबी दूरी के रूट शामिल हैं।
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ऐसे में वीरवार सुबह से ही यात्रियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और अन्य लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है। हड़ताल की चेतावनी के बाद जिले में बस सेवाओं के ठप होने की आशंका बढ़ गई है। यदि आंदोलन शुरू होता है तो इसका सबसे अधिक असर आम यात्रियों पर पड़ेगा।
उधर, चालक संघ के जिला प्रधान हेम राज ने साफ कहा है कि हड़ताल किसी भी कीमत पर वापस नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगें मान लेती है तो आंदोलन समाप्त किया जा सकता है, अन्यथा चक्का जाम और हड़ताल हर हाल में जारी रहेगी।
हेम राज ने कहा कि चालक-परिचालक अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं और इसके लिए जेल जाने या नौकरी से बर्खास्त होने तक के लिए तैयार हैं। उन्होंने आम लोगों से इस हड़ताल का समर्थन करने की अपील की और कहा कि यदि बसों के पहिये थमते हैं तो यात्रियों को होने वाली परेशानी की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
उधर, मंगलवार को सरकार और प्रबंधन के साथ हुई वार्ता विफल रहने के बाद चंबा डिपो में आयोजित गेट मीटिंग में चालक-परिचालकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं लिया गया तो बुधवार रात 12 बजे के बाद डिपो से कोई भी बस बाहर नहीं निकलने दी जाएगी।
कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है, जिसके चलते वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर हुए हैं। चालक-परिचालकों का मुख्य विरोध यूनियन प्रधान के तबादला आदेश को लेकर है।
उनका कहना है कि यह फैसला कर्मचारियों की भावनाओं के विपरीत है और इसे तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि तबादला आदेश रद्द नहीं किया गया तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि डिपो में इंजन ऑयल, टायर, स्पेयर पार्ट्स और अन्य जरूरी कलपुर्जों की भारी कमी है, जिससे बसों के रखरखाव और संचालन पर असर पड़ रहा है।