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Chamba News: ब्याज सहित 1.16 लाख रुपये देने का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 24 Jun 2026 11:30 AM IST
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चंबा। वाहन दुर्घटना के बाद बीमित वाहन का दावा खारिज करना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग धर्मशाला/चंबा ने बीमा कंपनी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।
आयोग ने कंपनी को करीब 1.16 लाख रुपये की बीमा दावा राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने बीमा कंपनी को यह भी निर्देश दिए हैं कि वह शिकायतकर्ता को मानसिक उत्पीड़न और अनावश्यक परेशानी के लिए 10,000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 7,500 रुपये अलग से अदा करे।
आयोग में दायर शिकायत के अनुसार प्रीणा निवासी अनिल कुमार पंजीकरण संख्या एचपी-73ए-2397 वाले मालवाहक वाहन के मालिक हैं। उनका वाहन 11 मार्च 2022 से 10 मार्च 2023 तक बीमा पॉलिसी के तहत कवर था। 24 दिसंबर 2022 को वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे उसे काफी नुकसान पहुंचा।
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हादसे के बाद भरमौर थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई और बीमा कंपनी को भी इसकी सूचना दे दी गई। बीमा कंपनी की ओर से नियुक्त सर्वेक्षक ने मौके का निरीक्षण किया। शिकायतकर्ता का कहना था कि दावा प्रक्रिया के तहत मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेज कंपनी को सौंप दिए गए थे और मुआवजा राशि जारी करने के लिए आवेदन भी कर दिया गया था।
इसके बावजूद कंपनी ने लंबे समय तक जांच-पड़ताल के बाद बीमा दावा मंजूर करने से इन्कार कर दिया। बीमा कंपनी के इस फैसले से आहत होकर शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग धर्मशाला/चंबा का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने शिकायतकर्ता की ओर से पेश दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों का अवलोकन किया। इसके बाद आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता का दावा उचित है और बीमा कंपनी को राहत राशि देने के आदेश जारी किए।
आयोग के इस फैसले को उपभोक्ताओं के अधिकारों की दृष्टि से अहम माना जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट संदेश गया है कि बीमा दावों के निपटारे में लापरवाही या अनुचित ढंग से दावे खारिज करने पर कंपनियों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
आयोग ने कंपनी को करीब 1.16 लाख रुपये की बीमा दावा राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने बीमा कंपनी को यह भी निर्देश दिए हैं कि वह शिकायतकर्ता को मानसिक उत्पीड़न और अनावश्यक परेशानी के लिए 10,000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 7,500 रुपये अलग से अदा करे।
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आयोग में दायर शिकायत के अनुसार प्रीणा निवासी अनिल कुमार पंजीकरण संख्या एचपी-73ए-2397 वाले मालवाहक वाहन के मालिक हैं। उनका वाहन 11 मार्च 2022 से 10 मार्च 2023 तक बीमा पॉलिसी के तहत कवर था। 24 दिसंबर 2022 को वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे उसे काफी नुकसान पहुंचा।
हादसे के बाद भरमौर थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई और बीमा कंपनी को भी इसकी सूचना दे दी गई। बीमा कंपनी की ओर से नियुक्त सर्वेक्षक ने मौके का निरीक्षण किया। शिकायतकर्ता का कहना था कि दावा प्रक्रिया के तहत मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेज कंपनी को सौंप दिए गए थे और मुआवजा राशि जारी करने के लिए आवेदन भी कर दिया गया था।
इसके बावजूद कंपनी ने लंबे समय तक जांच-पड़ताल के बाद बीमा दावा मंजूर करने से इन्कार कर दिया। बीमा कंपनी के इस फैसले से आहत होकर शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग धर्मशाला/चंबा का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने शिकायतकर्ता की ओर से पेश दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों का अवलोकन किया। इसके बाद आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता का दावा उचित है और बीमा कंपनी को राहत राशि देने के आदेश जारी किए।
आयोग के इस फैसले को उपभोक्ताओं के अधिकारों की दृष्टि से अहम माना जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट संदेश गया है कि बीमा दावों के निपटारे में लापरवाही या अनुचित ढंग से दावे खारिज करने पर कंपनियों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।