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Hamirpur (Himachal) News: कीड़ा बढ़ा रहा किसानों की पीड़ा
Wed, 22 Jul 2026 06:00 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 22 Jul 2026 06:00 AM IST
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हमीरपुर। जिले में मक्की की फसल पर कीड़े (फॉल आर्मी वर्म) का प्रकोप बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में 28 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मक्की की खेती की गई है, जिसमें से लगभग 2,800 हेक्टेयर क्षेत्र की फसल कीट से प्रभावित पाई गई है।
उत्पादन पर असर की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। फॉल आर्मी वर्म मक्की के पौधों की पत्तियों और भुट्टों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे उत्पादन में कमी आने की संभावना रहती है।
कई किसानों ने फसल में कीट के बढ़ते प्रकोप की शिकायत कृषि विभाग को दी है। इसके बाद विभाग के अधिकारी और कृषि प्रसार कर्मी लगातार प्रभावित गांवों का दौरा कर रहे हैं।
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फसलों का किया जा रहा निरीक्षण
अधिकारी खेतों का निरीक्षण कर किसानों को कीट की पहचान, समय पर नियंत्रण और कीटनाशकों के वैज्ञानिक तरीके से छिड़काव की जानकारी दे रहे हैं। कृषि विभाग ने किसानों से नियमित रूप से फसलों का निरीक्षण करने और शुरुआती अवस्था में ही कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने की अपील की है।
विभाग का कहना है कि यदि समय रहते वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रण किया जाए तो फॉल आर्मी वर्म के प्रकोप को काफी हद तक रोका जा सकता है। किसानों से यह भी आग्रह किया गया है कि फसल में कीट का प्रकोप दिखाई देने पर तुरंत अपने नजदीकी कृषि कार्यालय या कृषि विकास अधिकारी से संपर्क करें।
क्या है फॉल आर्मी वर्म?
फॉल आर्मी वर्म मक्की की फसल के लिए अत्यंत घातक कीट है। इसका प्रमुख भोजन मक्की है और यह भोजन की तलाश में एक रात में लगभग एक हजार किलोमीटर तक उड़ सकता है। इसकी मादा अपने चार से पांच दिन के जीवनकाल में करीब एक हजार अंडे देती है। इस कीट की सुंडी मक्की की पत्तियों, पत्ती गोभ (भंवर) और तने को नुकसान पहुंचाकर पूरी फसल को नष्ट कर सकती है। शुरुआती अवस्था में यह पत्तियों पर सूई जैसे छोटे-छोटे छेद बनाती है, जो बाद में बड़े और अनियमित सुराखों में बदल जाते हैं। सुंडियां गोभ के भीतर छिपकर पत्तियों को खाती हैं और कई बार तने के अंदर घुसकर उसे खोखला कर देती हैं, जिससे पौधा सूखकर मर जाता है।
फॉल आर्मी वर्म कीट से अभी तक 2,800 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। कृषि विभाग के अधिकारी लगातार खेतों का निरीक्षण कर रहे हैं। -डीडी शर्मा, उपनिदेशक, कृषि विभाग, हमीरपुर
कृषि विशेषज्ञों की सलाह
हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सुरजीत कुमार ने कहा कि फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप 10 प्रतिशत से अधिक होने या आर्थिक क्षति स्तर पार होने पर ही रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करें। ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय की अनुशंसा के अनुसार इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी या क्लोरैन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी 0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का छिड़काव किया जा सकता है।
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उत्पादन पर असर की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। फॉल आर्मी वर्म मक्की के पौधों की पत्तियों और भुट्टों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे उत्पादन में कमी आने की संभावना रहती है।
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कई किसानों ने फसल में कीट के बढ़ते प्रकोप की शिकायत कृषि विभाग को दी है। इसके बाद विभाग के अधिकारी और कृषि प्रसार कर्मी लगातार प्रभावित गांवों का दौरा कर रहे हैं।
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फसलों का किया जा रहा निरीक्षण
अधिकारी खेतों का निरीक्षण कर किसानों को कीट की पहचान, समय पर नियंत्रण और कीटनाशकों के वैज्ञानिक तरीके से छिड़काव की जानकारी दे रहे हैं। कृषि विभाग ने किसानों से नियमित रूप से फसलों का निरीक्षण करने और शुरुआती अवस्था में ही कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने की अपील की है।
विभाग का कहना है कि यदि समय रहते वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रण किया जाए तो फॉल आर्मी वर्म के प्रकोप को काफी हद तक रोका जा सकता है। किसानों से यह भी आग्रह किया गया है कि फसल में कीट का प्रकोप दिखाई देने पर तुरंत अपने नजदीकी कृषि कार्यालय या कृषि विकास अधिकारी से संपर्क करें।
क्या है फॉल आर्मी वर्म?
फॉल आर्मी वर्म मक्की की फसल के लिए अत्यंत घातक कीट है। इसका प्रमुख भोजन मक्की है और यह भोजन की तलाश में एक रात में लगभग एक हजार किलोमीटर तक उड़ सकता है। इसकी मादा अपने चार से पांच दिन के जीवनकाल में करीब एक हजार अंडे देती है। इस कीट की सुंडी मक्की की पत्तियों, पत्ती गोभ (भंवर) और तने को नुकसान पहुंचाकर पूरी फसल को नष्ट कर सकती है। शुरुआती अवस्था में यह पत्तियों पर सूई जैसे छोटे-छोटे छेद बनाती है, जो बाद में बड़े और अनियमित सुराखों में बदल जाते हैं। सुंडियां गोभ के भीतर छिपकर पत्तियों को खाती हैं और कई बार तने के अंदर घुसकर उसे खोखला कर देती हैं, जिससे पौधा सूखकर मर जाता है।
फॉल आर्मी वर्म कीट से अभी तक 2,800 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। कृषि विभाग के अधिकारी लगातार खेतों का निरीक्षण कर रहे हैं। -डीडी शर्मा, उपनिदेशक, कृषि विभाग, हमीरपुर
कृषि विशेषज्ञों की सलाह
हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सुरजीत कुमार ने कहा कि फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप 10 प्रतिशत से अधिक होने या आर्थिक क्षति स्तर पार होने पर ही रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करें। ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय की अनुशंसा के अनुसार इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी या क्लोरैन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी 0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का छिड़काव किया जा सकता है।