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West Asia War: कच्चे माल की कीमतों में वद्धि से एमएसएमई सेक्टर में संकट, तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग

संवाद न्यूज एजेंसी, बरोटीवाला ( सोलन)। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 20 Mar 2026 05:00 AM IST
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सार

कच्चे माल के दाम में बढ़ोतरी के कारण और कृत्रिम कमी होने से कई उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

Scourge of the West Asia War: Crisis in the MSME Sector Due to Rising Raw Material Prices; Call for Immediate
एमएसएमई। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि होती जा रही है। ऐसे में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों में संकट आना शुरू हो गया है। कच्चे माल के दाम में बढ़ोतरी के कारण और कृत्रिम कमी होने से कई उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। हालात ये हैं कि पैरासिटामोल एपीआई की कीमत 250 रुपये से बढ़कर 450 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इससे दवाओं की कीमतों में भी वृद्धि हो जाएगी। इस स्थिति को देखते हुए अब औद्योगिक मालिकों ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है। हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार को ज्ञापन भी भेजा है। ज्ञापन में गंभीर संकट उद्योगों पर होने की बात कही है। एसोसिएशन ने कहा कि ऐसा ही चलता रहा तो उद्योग मजबूरी में बंद हो जाएंगे।

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इससे न केवल उद्योगों को हानि होगी बल्कि कार्यरत कर्मी भी बेरोजगार हो जाएंगे। हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने पत्र में बताया कि कच्चे माल की कीमतों में अप्रत्याशित 200-300% तक वृद्धि से उद्योग अस्तित्व के संकट में आ गया है। एपीआई, सॉल्वेंट्स, एक्सिपिएंट्स और पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में पिछले 15 दिनों में भारी उछाल आया है। एल्यूमिनियम, पीवीसी और ग्लास बोतलों की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं।एचडीएमए का कहना है कि पैकेजिंग लागत बढ़ने से प्रोडक्शन कांट्रैक्ट्स गैर-लाभकारी हो गए हैं। दवाइयों की सप्लाई प्रभावित होने, सरकारी टेंडर डिफॉल्ट और रोजगार पर संकट का खतरा बढ़ रहा है। एचपीजी की कमी से औद्योगिक उत्पादन और घरेलू आपूर्ति दोनों प्रभावित हो रही हैं, जिससे मजदूरों का पलायन भी बढ़ सकता है। मांग की गई है कि प्रमुख एपीआई, सॉल्वेंट्स, एक्सिपिएंट्स और पैकेजिंग सामग्री पर मूल्य नियंत्रण किया जाए। साथ ही ब्लैक मार्केटिंग पर सख्ती की जाए।
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