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Kangra News: जमानत के बाद कोर्ट में पेश न होने पर आरोपी को ठहराया दोषी
Mon, 06 Jul 2026 06:41 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 06 Jul 2026 06:41 AM IST
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धर्मशाला। जमानत पर रिहा होने के बाद अदालत में तय तारीख पर बिना पर्याप्त कारण पेश नहीं होने के मामले में कांगड़ा की अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कांगड़ा अनीता शर्मा की अदालत ने आरोपी को अदालत उठने तक की कैद और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को सात दिन का साधारण कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन के अनुसार, तहसील धर्मशाला के अंतर्गत क्षेत्र का एक व्यक्ति एक मामले में जमानत पर रिहा था। उसे अदालत के आदेशानुसार 14 अगस्त 2018 को पेश होना था, लेकिन वह बिना किसी पर्याप्त कारण के उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद अदालत के निर्देश पर थाना कांगड़ा में भारतीय दंड संहिता की धारा 229-ए के तहत मामला दर्ज किया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने चार गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में पेश किए। बचाव पक्ष ने आरोपी के इलाज संबंधी ओपीडी पर्ची और चिकित्सीय प्रमाणपत्र पेश किया, लेकिन अदालत ने माना कि आरोपी यह साबित नहीं कर सका कि उसकी गैरहाजिरी का कोई पर्याप्त और नियंत्रण से बाहर का कारण था।
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अदालत ने फैसले में कहा कि आरोपी के पास गैरहाजिरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं था, जिससे अभियोजन पक्ष आरोप संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। सजा तय करते समय कोर्ट ने नरम रुख अपनाया, क्योंकि मामला वर्ष 2019 से लंबित था, आरोपी लंबे समय तक मुकदमे का सामना कर चुका था और उसका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।
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अभियोजन के अनुसार, तहसील धर्मशाला के अंतर्गत क्षेत्र का एक व्यक्ति एक मामले में जमानत पर रिहा था। उसे अदालत के आदेशानुसार 14 अगस्त 2018 को पेश होना था, लेकिन वह बिना किसी पर्याप्त कारण के उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद अदालत के निर्देश पर थाना कांगड़ा में भारतीय दंड संहिता की धारा 229-ए के तहत मामला दर्ज किया गया।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने चार गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में पेश किए। बचाव पक्ष ने आरोपी के इलाज संबंधी ओपीडी पर्ची और चिकित्सीय प्रमाणपत्र पेश किया, लेकिन अदालत ने माना कि आरोपी यह साबित नहीं कर सका कि उसकी गैरहाजिरी का कोई पर्याप्त और नियंत्रण से बाहर का कारण था।
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अदालत ने फैसले में कहा कि आरोपी के पास गैरहाजिरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं था, जिससे अभियोजन पक्ष आरोप संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। सजा तय करते समय कोर्ट ने नरम रुख अपनाया, क्योंकि मामला वर्ष 2019 से लंबित था, आरोपी लंबे समय तक मुकदमे का सामना कर चुका था और उसका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।