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Kangra News: बालक को एनडीपीएस मामले में मिली जमानत
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पुलिस ने मादक पदार्थ सहित पकड़ा था नाबालिग
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कांगड़ा स्थित धर्मशाला की अदालत ने एनडीपीएस अधिनियम के एक मामले में 13 वर्षीय बालक को जमानत देते हुए किशोर न्याय बोर्ड कांगड़ा की ओर से पारित जमानत अर्जी खारिज करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। मामले के अनुसार गगल थाना में दर्ज एफआईआर में बालक के विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस ने उसके कब्जे से 130.89 ग्राम मादक पदार्थ बरामद होने का दावा किया था। इसके बाद किशोर न्याय बोर्ड ने 14 मई 2026 को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके विरुद्ध सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई। बालक की माता और दादी के विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम के तहत कई मामले लंबित हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सत्र न्यायाधीश चिराग भानु सिंह ने कहा कि केवल माता के विरुद्ध दर्ज मामलों के आधार पर बालक को जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने यह भी माना कि बरामदगी इंटरमीडिएट मात्रा की है। बालक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। जांच पूरी हो चुकी है और मुकदमे के निपटारे में समय लगना स्वाभाविक है। अदालत ने आदेश दिया कि बालक को उसकी बुआ की निगरानी में जमानत पर रिहा किया जाए। साथ ही उसे किशोर न्याय बोर्ड की संतुष्टि के अनुसार जमानती बॉंड प्रस्तुत करने होंगे। प्रत्येक माह प्रोबेशन अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना होगा। सत्र न्यायालय ने अपने निर्णय में किशोर न्याय बोर्ड कांगड़ा के 14 मई 2026 के आदेश को निरस्त करते हुए अपील स्वीकार कर ली।
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अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कांगड़ा स्थित धर्मशाला की अदालत ने एनडीपीएस अधिनियम के एक मामले में 13 वर्षीय बालक को जमानत देते हुए किशोर न्याय बोर्ड कांगड़ा की ओर से पारित जमानत अर्जी खारिज करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। मामले के अनुसार गगल थाना में दर्ज एफआईआर में बालक के विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस ने उसके कब्जे से 130.89 ग्राम मादक पदार्थ बरामद होने का दावा किया था। इसके बाद किशोर न्याय बोर्ड ने 14 मई 2026 को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके विरुद्ध सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई। बालक की माता और दादी के विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम के तहत कई मामले लंबित हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सत्र न्यायाधीश चिराग भानु सिंह ने कहा कि केवल माता के विरुद्ध दर्ज मामलों के आधार पर बालक को जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता।
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न्यायालय ने यह भी माना कि बरामदगी इंटरमीडिएट मात्रा की है। बालक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। जांच पूरी हो चुकी है और मुकदमे के निपटारे में समय लगना स्वाभाविक है। अदालत ने आदेश दिया कि बालक को उसकी बुआ की निगरानी में जमानत पर रिहा किया जाए। साथ ही उसे किशोर न्याय बोर्ड की संतुष्टि के अनुसार जमानती बॉंड प्रस्तुत करने होंगे। प्रत्येक माह प्रोबेशन अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना होगा। सत्र न्यायालय ने अपने निर्णय में किशोर न्याय बोर्ड कांगड़ा के 14 मई 2026 के आदेश को निरस्त करते हुए अपील स्वीकार कर ली।
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