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Kangra News: मानसून से पहले लोबिया और सोयाबीन के साथ करें मक्की की खेती
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 03 Apr 2026 01:36 AM IST
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कृषि विवि पालमपुर के वैज्ञानिकों ने किसानों को दी सलाह, निचले पर्वतीय क्षेत्रों में टमााटर, बैंगन और शिमला मिर्च की करें रोपाई
आलू में झुलसा रोग लगने पर करें रेडोमिल का छिड़काव
संवाद न्यूज एजेंसी
पालमपुर (कांगड़ा)। अप्रैल के पहले पखवाड़े में मौसम के हिसाब से होने वाले कृषि कार्यों को लेकर कृषि विवि पालमपुर के वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है, ताकि उनकी खेती अच्छी हो सके। विशेषज्ञों ने कहा है कि अप्रैल के पहले पखवाड़े में मौसम के अनुरूप सिंचित क्षेत्रों में चारे के उद्देश्य से मक्का की एक फसल मानसून से पहले लोबिया और सोयाबीन के साथ ली जा सकती है ताकि अप्रैल से जून तक हरा चारा मिल सके।
कृषि विवि पालमपुर के प्रसार निदेशक डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि निचले पर्वतीय क्षेत्रों में जहां पर मार्च महीने के पहले पखवाड़े में या इससे पहले टमाटर, बैंगन, लाल मिर्च, शिमला मिर्च, या कद्दू वर्गीय फसलों की रोपाई या बिजाई हुई हो तो वहां पर इन फसलों में नाइट्रोजन की पहली मात्रा डालने का समय है।
इन सभी प्रकार की सब्जियों में निराई-गुड़ाई करने के बाद क्षेत्रफल के आधार पर यूरिया दें। प्रदेश के मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में इस समय टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च, मिर्च के स्वस्थ पौध की रोपाई तथा कद्दू वर्गीय सब्जियों खीरा, करेला, कद्दू और लौकी की सीधी बुवाई या रोपाई की जा सकती है।
टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च और मिर्च की पौध को खेत में 60:45 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपें। मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में इन दिनों भिंडी व फ्रांसबीन की बिजाई भी की जा सकती है। भिंडी की बिजाई के लिए पालम कोमल, परभनी क्रांति पी-8, अर्का अनामिका आदि सुधरी प्रजातियों का ही चयन करें।
किसान टमाटर, बैंगन, मिर्च तथा शिमला मिर्च के खेतों में खरपतवार नियंत्रण के लिए दो बार निराई-गुड़ाई करें। पहली पौध रोपाई के दो से तीन सप्ताह बाद और दूसरा एक से डेढ़ महीने बाद करें। रासायनिक खरपतवार नियंत्रण के लिए रोपाई के 2-3 दिन पहले लासो (एलाक्लोर) 3.0 लीटर या स्टांप (पैडीमिथेलिन) का छिड़काव करें।
वहीं प्रदेश के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में मटर (आजाद मटर-1, लिंकन, पालम समूल, पालम प्रिया, पंजाब 89, जीएस-10 आदि), मूली (पूसा हिमानी), शलजम (पीटीडब्ल्यूजी), गाजर (नांतीज, चांतनी), पालक (पूसा हरित व पूसा भारती) की बीजाई करें।
इसके अतिरिक्त फूलगोभी, बंदगोभी, ब्रोकली, लैटयूस और विदेशी सब्जियों इत्यादि की तैयार पौध की भी खेतों में रोपाई करें, जबकि आम, केला, पपीता, अंगूर, नींबू, अनार आदि फलों के बागों में नियमित सिंचाई करें। उन्होंने बताया कि भिंडी, बैंगन, फ्रांसबीन व कद्दूवर्गीय सब्जियों में कई बार पौधें की आरंभिक अवस्था में पत्ते खाने वाले कीटों का प्रकोप हो जाती है। यदि इन सब्जियों में कीट प्रकोप से अधिक क्षति होने की आशंका हो तो मैलाथियान 50 ईसी नामक कीटनाशक का 750 मिलीलीटर दवाई 750 लीटर पानी में घोल बना कर एक हेक्टेयर क्षेत्र के हिसाब से छिड़काव करें।
बैंगन, टमाटर या मिर्च की नर्सरी में डैम्पिंग-ऑफ रोग के लक्षण दिखाई दें, तो इंडोफिल एम-45 (25 ग्राम) या बाविस्टिन का छिड़काव किया जा सकता है। टमाटर आलू की फसल में झुलसा रोग के लक्षण (पत्तों पर काले धब्बे) आने पर रिडोमिल एमजैड मैटको का छिड़काव करें। आलू में पतंगे की रोकथाम के लिए खेत में साईपरमिथरिन 25 ईसी का छिड़काव करें।
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आलू में झुलसा रोग लगने पर करें रेडोमिल का छिड़काव
संवाद न्यूज एजेंसी
पालमपुर (कांगड़ा)। अप्रैल के पहले पखवाड़े में मौसम के हिसाब से होने वाले कृषि कार्यों को लेकर कृषि विवि पालमपुर के वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है, ताकि उनकी खेती अच्छी हो सके। विशेषज्ञों ने कहा है कि अप्रैल के पहले पखवाड़े में मौसम के अनुरूप सिंचित क्षेत्रों में चारे के उद्देश्य से मक्का की एक फसल मानसून से पहले लोबिया और सोयाबीन के साथ ली जा सकती है ताकि अप्रैल से जून तक हरा चारा मिल सके।
कृषि विवि पालमपुर के प्रसार निदेशक डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि निचले पर्वतीय क्षेत्रों में जहां पर मार्च महीने के पहले पखवाड़े में या इससे पहले टमाटर, बैंगन, लाल मिर्च, शिमला मिर्च, या कद्दू वर्गीय फसलों की रोपाई या बिजाई हुई हो तो वहां पर इन फसलों में नाइट्रोजन की पहली मात्रा डालने का समय है।
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इन सभी प्रकार की सब्जियों में निराई-गुड़ाई करने के बाद क्षेत्रफल के आधार पर यूरिया दें। प्रदेश के मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में इस समय टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च, मिर्च के स्वस्थ पौध की रोपाई तथा कद्दू वर्गीय सब्जियों खीरा, करेला, कद्दू और लौकी की सीधी बुवाई या रोपाई की जा सकती है।
टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च और मिर्च की पौध को खेत में 60:45 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपें। मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में इन दिनों भिंडी व फ्रांसबीन की बिजाई भी की जा सकती है। भिंडी की बिजाई के लिए पालम कोमल, परभनी क्रांति पी-8, अर्का अनामिका आदि सुधरी प्रजातियों का ही चयन करें।
किसान टमाटर, बैंगन, मिर्च तथा शिमला मिर्च के खेतों में खरपतवार नियंत्रण के लिए दो बार निराई-गुड़ाई करें। पहली पौध रोपाई के दो से तीन सप्ताह बाद और दूसरा एक से डेढ़ महीने बाद करें। रासायनिक खरपतवार नियंत्रण के लिए रोपाई के 2-3 दिन पहले लासो (एलाक्लोर) 3.0 लीटर या स्टांप (पैडीमिथेलिन) का छिड़काव करें।
वहीं प्रदेश के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में मटर (आजाद मटर-1, लिंकन, पालम समूल, पालम प्रिया, पंजाब 89, जीएस-10 आदि), मूली (पूसा हिमानी), शलजम (पीटीडब्ल्यूजी), गाजर (नांतीज, चांतनी), पालक (पूसा हरित व पूसा भारती) की बीजाई करें।
इसके अतिरिक्त फूलगोभी, बंदगोभी, ब्रोकली, लैटयूस और विदेशी सब्जियों इत्यादि की तैयार पौध की भी खेतों में रोपाई करें, जबकि आम, केला, पपीता, अंगूर, नींबू, अनार आदि फलों के बागों में नियमित सिंचाई करें। उन्होंने बताया कि भिंडी, बैंगन, फ्रांसबीन व कद्दूवर्गीय सब्जियों में कई बार पौधें की आरंभिक अवस्था में पत्ते खाने वाले कीटों का प्रकोप हो जाती है। यदि इन सब्जियों में कीट प्रकोप से अधिक क्षति होने की आशंका हो तो मैलाथियान 50 ईसी नामक कीटनाशक का 750 मिलीलीटर दवाई 750 लीटर पानी में घोल बना कर एक हेक्टेयर क्षेत्र के हिसाब से छिड़काव करें।
बैंगन, टमाटर या मिर्च की नर्सरी में डैम्पिंग-ऑफ रोग के लक्षण दिखाई दें, तो इंडोफिल एम-45 (25 ग्राम) या बाविस्टिन का छिड़काव किया जा सकता है। टमाटर आलू की फसल में झुलसा रोग के लक्षण (पत्तों पर काले धब्बे) आने पर रिडोमिल एमजैड मैटको का छिड़काव करें। आलू में पतंगे की रोकथाम के लिए खेत में साईपरमिथरिन 25 ईसी का छिड़काव करें।