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Kangra News: हाइडल प्रोजेक्ट प्रबंधन को चुकाने होंगे ठेकेदार के 9.19 लाख रुपये
Mon, 06 Jul 2026 06:51 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 06 Jul 2026 06:51 AM IST
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धर्मशाला। करीब आठ साल पुराने भुगतान विवाद में धर्मशाला की सिविल अदालत ने एक ठेकेदार के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने हाइडल परियोजना प्रबंधन को 9.19 लाख रुपये की बकाया राशि 9 फीसदी वार्षिक साधारण ब्याज और मुकदमे के खर्च सहित अदा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने माना कि परियोजना प्रबंधन यह साबित नहीं कर सका कि उसने ठेकेदार को पूरा भुगतान कर दिया था।
वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश डॉ. हकीकत ढांडा की अदालत में लाहौल-स्पीति निवासी ठेकेदार प्रेम ठाकुर ने धर्मशाला तहसील के अंतर्गत स्थित हाइडल प्रोजेक्ट के खिलाफ वर्ष 2018 में 9,19,671 रुपये की वसूली का दीवानी वाद दायर किया था। याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2016 में उसे 3 मेगावाट परियोजना में पीसीसी, टनल लाइनिंग और श्रमिक आपूर्ति का कार्य दिया गया था। कार्य पूरा करने के बावजूद परियोजना प्रबंधन ने पूरी राशि का भुगतान नहीं किया और 9.19 लाख रुपये बकाया रख लिए।
सुनवाई के दौरान परियोजना प्रबंधन ने दावा किया कि ठेकेदार को पूरा भुगतान किया जा चुका है, लेकिन वे इसके समर्थन में कोई दस्तावेज या रिकॉर्ड पेश नहीं कर सके। वहीं, ठेकेदार ने बिल, भुगतान का ब्यौरा और मांग से जुड़े दस्तावेज अदालत में पेश किए। अदालत ने कहा कि भुगतान का पूरा रिकॉर्ड प्रतिवादियों के विशेष ज्ञान में था, लेकिन वे इसे साबित करने में असफल रहे। अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों को जांचने के बाद ठेकेदार के पक्ष में फैसला सुनाया है।
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वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश डॉ. हकीकत ढांडा की अदालत में लाहौल-स्पीति निवासी ठेकेदार प्रेम ठाकुर ने धर्मशाला तहसील के अंतर्गत स्थित हाइडल प्रोजेक्ट के खिलाफ वर्ष 2018 में 9,19,671 रुपये की वसूली का दीवानी वाद दायर किया था। याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2016 में उसे 3 मेगावाट परियोजना में पीसीसी, टनल लाइनिंग और श्रमिक आपूर्ति का कार्य दिया गया था। कार्य पूरा करने के बावजूद परियोजना प्रबंधन ने पूरी राशि का भुगतान नहीं किया और 9.19 लाख रुपये बकाया रख लिए।
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सुनवाई के दौरान परियोजना प्रबंधन ने दावा किया कि ठेकेदार को पूरा भुगतान किया जा चुका है, लेकिन वे इसके समर्थन में कोई दस्तावेज या रिकॉर्ड पेश नहीं कर सके। वहीं, ठेकेदार ने बिल, भुगतान का ब्यौरा और मांग से जुड़े दस्तावेज अदालत में पेश किए। अदालत ने कहा कि भुगतान का पूरा रिकॉर्ड प्रतिवादियों के विशेष ज्ञान में था, लेकिन वे इसे साबित करने में असफल रहे। अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों को जांचने के बाद ठेकेदार के पक्ष में फैसला सुनाया है।
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