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Kangra News: पुरानी बीमारी बता खारिज किया था मेडिक्लेम, अब चुकाना होगा हर्जाना

Tue, 28 Jul 2026 05:54 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Tue, 28 Jul 2026 05:54 AM IST
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Mediclaim rejected citing pre-existing illness; compensation must now be paid.
धर्मशाला। पुरानी बीमारी का हवाला देकर महिला का मेडिक्लेम का दावा खारिज करना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार करार देते हुए कंपनी को 2,30,124 रुपये का दावा नौ फीसदी वार्षिक ब्याज सहित चुकाने के सख्त आदेश दिए हैं।
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इसके साथ ही आयोग ने उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा के लिए 20 हजार और वाद व्यय के रूप में 15 हजार रुपये का हर्जाना देने के भी निर्देश जारी किए हैं। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
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उपभोक्ता आयोग के समक्ष पालमपुर के अंतर्गत आईमा निवासी अनीता शर्मा ने शिकायत दायर की थी। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2019 से लगातार स्वास्थ्य बीमा के दायरे में थीं। वर्ष 2022 में उन्होंने अपनी पुरानी स्वास्थ्य नीति को बिना किसी रुकावट के स्टार हेल्थ से निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस में पोर्ट करवाया था।
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जुलाई 2024 में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या आने पर उन्हें मोहाली के एक निजी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, जहां उनके ऑपरेशन पर 2,30,124 रुपये का खर्च आया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब उन्होंने मेडिक्लेम के लिए आवेदन किया तो बीमा कंपनी ने 23 अगस्त 2024 को उनका दावा खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि यह बीमारी पहले से मौजूद थी और इस पर 36 माह की प्रतीक्षा अवधि लागू होती है।

आयोग ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों और तथ्यों की गहन जांच करने के बाद कहा कि जब कोई बीमा पॉलिसी बिना किसी अंतराल के पोर्ट कराई जाती है तो पुरानी नीति में पूरी की गई वेटिंग अवधि का लाभ उपभोक्ता को अनिवार्य रूप से मिलता है। शिकायतकर्ता वर्ष 2019 से लगातार बीमित थीं, इसलिए वर्ष 2024 में दावा खारिज करने के लिए 36 माह की नई प्रतीक्षा अवधि लागू करना पूरी तरह गलत है। आयोग ने इसे आईआरडीएआई के पोर्टेबिलिटी नियमों के विपरीत मानते हुए बीमा कंपनी की कार्रवाई को अवैध ठहराया।
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