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Kullu News: मौसम में बदलाव, एक महीला पहले खिल गए बुरांस के फूल
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सैंज (कुल्लू)। मौसम में बदलाव का असर बुरांस के फूलों पर नजर आ रहा है। जिले की सैंज घाटी के रूपी रैला की वादियां बुरांस के फूलों से महक उठी हैं। आमतौर पर अप्रैल में खिलने वाले फूल इस बार मौसम में आए बदलाव के कारण करीब एक महीना पहले ही खिल गया है। घाटी के ऊंचे इलाकों में बुरांस के फूल बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं।
सामान्य तौर पर यह फूल चैत्र और बैसाख के महीने में खिलता है। इस बार सर्दी के मौसम में बारिश कम होने से तापमान में फरवरी में ही बढ़ोतरी देखने को मिली। यही कारण है कि बुरांस के फूल समय से पहले खिल गए हैं। बुरांस के फूल जितने देखने में सुंदर होते हैं, उतने ही इनके औषधीय गुण भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
इनका उपयोग कई बीमारियों में किया जाता है। बुरांस से शरबत, जैम और चटनी तैयार की जाती है। लोग फूलों को सुखाकर सालभर चटनी बनाने में भी इस्तेमाल करते हैं। घाटी के रैला, गोही, भलाहन, अपर रैला, पाशी और खड़गंचा के ऊपरी इलाकों में बुरांस के फूल बड़ी संख्या में खिले हैं। शैंशर पंचायत के निरी, थनहर, तुंग, तलियाहरा में भी बुरांस के फूल खिले हैं। बुजुर्गों का कहना है कि पहले आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण में इन फूलों का व्यापक उपयोग होता था। नकसीर रोकने के लिए यह फूल प्रभावी माना जाता है।
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अमूमन चैत्र बैसाख में खिलते है बुरांस के फूल
क्षेत्र वासी गिरधारी लाल, सुरेंद्र नेगी, महिंद्र सिंह, जुगत राम और मीने राम ठाकुर का कहना है कि सर्दी में बर्फबारी कम हुई है। इस वजह से फरवरी में ही तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली और बुरांस के फूल भी खिल गए हैं। हालांकि यह फूल चैत्र बैसाख में खिलते हैं।
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सामान्य तौर पर यह फूल चैत्र और बैसाख के महीने में खिलता है। इस बार सर्दी के मौसम में बारिश कम होने से तापमान में फरवरी में ही बढ़ोतरी देखने को मिली। यही कारण है कि बुरांस के फूल समय से पहले खिल गए हैं। बुरांस के फूल जितने देखने में सुंदर होते हैं, उतने ही इनके औषधीय गुण भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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इनका उपयोग कई बीमारियों में किया जाता है। बुरांस से शरबत, जैम और चटनी तैयार की जाती है। लोग फूलों को सुखाकर सालभर चटनी बनाने में भी इस्तेमाल करते हैं। घाटी के रैला, गोही, भलाहन, अपर रैला, पाशी और खड़गंचा के ऊपरी इलाकों में बुरांस के फूल बड़ी संख्या में खिले हैं। शैंशर पंचायत के निरी, थनहर, तुंग, तलियाहरा में भी बुरांस के फूल खिले हैं। बुजुर्गों का कहना है कि पहले आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण में इन फूलों का व्यापक उपयोग होता था। नकसीर रोकने के लिए यह फूल प्रभावी माना जाता है।
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अमूमन चैत्र बैसाख में खिलते है बुरांस के फूल
क्षेत्र वासी गिरधारी लाल, सुरेंद्र नेगी, महिंद्र सिंह, जुगत राम और मीने राम ठाकुर का कहना है कि सर्दी में बर्फबारी कम हुई है। इस वजह से फरवरी में ही तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली और बुरांस के फूल भी खिल गए हैं। हालांकि यह फूल चैत्र बैसाख में खिलते हैं।
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