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Kullu News: स्वर्ग प्रवास से लौटे देव बड़ा छमांहू, आस्था का उमड़ा सैलाब
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देव श्रीबड़ा छंमाहू के स्वर्गप्रसवास से लौटते ही दर्शन करते देवलू।-देवलू।
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कुल्लू। सराज घाटी के आराध्य देव बड़ा छमांहू तीन माह के स्वर्ग प्रवास के बाद पुनः अपने धाम लौट आए हैं। देवता के आगमन के साथ ही पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल है। मंदिर के कपाट खुलते ही हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़े।
देवता के स्वर्ग प्रवास से लौटने के उपलक्ष्य में वीरवार को कोटला गांव में भव्य रथयात्रा का आयोजन किया गया। देवता की कोठी से शुरू हुई यह शोभायात्रा माता चवाली के मंदिर तक निकाली गई। इसमें दूरदराज के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और जयकारों के बीच निकली रथयात्रा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
एक अद्भुत दृश्य उस समय देखने को मिला, जब श्रद्धालुओं ने देवरथ को वापस लाने का प्रयास किया। हजारों लोगों के एकजुट प्रयास के बावजूद देवरथ एक स्थान पर स्थिर हो गया। इसे श्रद्धालु देव इच्छा मानते हुए श्रद्धा और आस्था के साथ निहारते रहे। इसके बाद भक्तों ने डोरा लगाकर देवरथ को खींचने का प्रयास जारी रखा, जिससे माहौल और भी रोमांचक एवं भावनात्मक हो गया।
इस अवसर पर कारदार मोहन सिंह और पुजारी धनेश गौतम ने बताया कि देवता के स्वर्ग प्रवास और वापसी की यह परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे आज भी पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ निभाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए रखने का माध्यम है। देव बड़ा छमांहू के आगमन से सराज घाटी में एक बार फिर खुशहाली और समृद्धि की कामना के स्वर गूंज उठे हैं। संवाद
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देवता के स्वर्ग प्रवास से लौटने के उपलक्ष्य में वीरवार को कोटला गांव में भव्य रथयात्रा का आयोजन किया गया। देवता की कोठी से शुरू हुई यह शोभायात्रा माता चवाली के मंदिर तक निकाली गई। इसमें दूरदराज के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और जयकारों के बीच निकली रथयात्रा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
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एक अद्भुत दृश्य उस समय देखने को मिला, जब श्रद्धालुओं ने देवरथ को वापस लाने का प्रयास किया। हजारों लोगों के एकजुट प्रयास के बावजूद देवरथ एक स्थान पर स्थिर हो गया। इसे श्रद्धालु देव इच्छा मानते हुए श्रद्धा और आस्था के साथ निहारते रहे। इसके बाद भक्तों ने डोरा लगाकर देवरथ को खींचने का प्रयास जारी रखा, जिससे माहौल और भी रोमांचक एवं भावनात्मक हो गया।
इस अवसर पर कारदार मोहन सिंह और पुजारी धनेश गौतम ने बताया कि देवता के स्वर्ग प्रवास और वापसी की यह परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे आज भी पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ निभाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए रखने का माध्यम है। देव बड़ा छमांहू के आगमन से सराज घाटी में एक बार फिर खुशहाली और समृद्धि की कामना के स्वर गूंज उठे हैं। संवाद