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Kullu News: मछली फार्म को नुकसान पहुंचने पर 47.14 लाख मुआवजा देने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 29 Jan 2026 10:37 PM IST
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एनजीटी ने सुनाया फैसला, पीडब्ल्यूडी और ठेकेदार को दो महीने के भीतर देना होगा पैसा
मनाली के हरिपुर नाला में पुल निर्माण से हिमालयन ट्राउट मछली फार्म को हुआ था नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिपुर (कुल्लू)। मनाली के तहत हरिपुर नाला में पुल के निर्माण कार्य से हिमालयन ट्राउट मछली फार्म को हुए नुकसान के मामले में शिकायतकर्ता को सात साल बाद न्याय मिला है।
एनजीटी की बेंच की ओर से लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार को शिकायतकर्ता को 47.14 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए गए हैं। यह पैसा दो माह के भीतर शिकायतकर्ता को देना होगा।
वर्ष 2019 में शिकायतकर्ता कुशाल गुप्ता निवासी हरिपुर, तहसील और जिला कुल्लू के हिमालयन ट्राउट मछली फार्म के जल स्रोत हरिपुर नाला में मिट्टी की खोदाई के चलते फार्म में मछलियों की मौत हो गई थी। जल आपूर्ति स्रोत में मिट्टी घुलने से बिक्री के लिए तैयार 50,000 मछलियां, एक साल की 40,000, मछलियों के अंडे भी दो लाख से अधिक क्षतिग्रस्त हुए थे। इसके बाद शिकायतकर्ता ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। एनजीटी में मामले पर सुनवाई का दौर चलता रहा। हालांकि शिकायतकर्ता की ओर से मत्स्य विभाग, नुकसान रिपोर्ट और मौका की रिपोर्ट आदि को संलग्न किया गया था।
सारी दलीलें और मामले की छानबीन पूरी होने के बाद एनजीटी की बेंच ने माना कि हरिपुर नाले में पुल के निर्माण के दौरान शिकायतकर्ता को 47.14 लाख रुपये का पर्यावरणीय नुकसान हुआ है। लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार को संयुक्त रूप से और अलग-अलग रूप से इस आदेश की तिथि से दो महीने की अवधि के भीतर आवेदक को 47.14 लाख रुपये का पर्यावरणीय नुकसान मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी है। विभाग इस राशि को ठेकेदार से वसूल कर सकता है। शिकायतकर्ता कुशाल गुप्ता ने कहा कि सात सालों के बाद न्याय मिला है।
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मनाली के हरिपुर नाला में पुल निर्माण से हिमालयन ट्राउट मछली फार्म को हुआ था नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिपुर (कुल्लू)। मनाली के तहत हरिपुर नाला में पुल के निर्माण कार्य से हिमालयन ट्राउट मछली फार्म को हुए नुकसान के मामले में शिकायतकर्ता को सात साल बाद न्याय मिला है।
एनजीटी की बेंच की ओर से लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार को शिकायतकर्ता को 47.14 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए गए हैं। यह पैसा दो माह के भीतर शिकायतकर्ता को देना होगा।
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वर्ष 2019 में शिकायतकर्ता कुशाल गुप्ता निवासी हरिपुर, तहसील और जिला कुल्लू के हिमालयन ट्राउट मछली फार्म के जल स्रोत हरिपुर नाला में मिट्टी की खोदाई के चलते फार्म में मछलियों की मौत हो गई थी। जल आपूर्ति स्रोत में मिट्टी घुलने से बिक्री के लिए तैयार 50,000 मछलियां, एक साल की 40,000, मछलियों के अंडे भी दो लाख से अधिक क्षतिग्रस्त हुए थे। इसके बाद शिकायतकर्ता ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। एनजीटी में मामले पर सुनवाई का दौर चलता रहा। हालांकि शिकायतकर्ता की ओर से मत्स्य विभाग, नुकसान रिपोर्ट और मौका की रिपोर्ट आदि को संलग्न किया गया था।
सारी दलीलें और मामले की छानबीन पूरी होने के बाद एनजीटी की बेंच ने माना कि हरिपुर नाले में पुल के निर्माण के दौरान शिकायतकर्ता को 47.14 लाख रुपये का पर्यावरणीय नुकसान हुआ है। लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार को संयुक्त रूप से और अलग-अलग रूप से इस आदेश की तिथि से दो महीने की अवधि के भीतर आवेदक को 47.14 लाख रुपये का पर्यावरणीय नुकसान मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी है। विभाग इस राशि को ठेकेदार से वसूल कर सकता है। शिकायतकर्ता कुशाल गुप्ता ने कहा कि सात सालों के बाद न्याय मिला है।