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Mandi News: शराब पीकर वाहन चलाने के मामले में छह माह की कैद
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मंडी। शराब पीकर लापरवाही से वाहन चलाने और दुर्घटना में लोगों को चोट पहुंचाने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर-3 मंडी ने राज्य बनाम कमलेश कुमार मामले में दोष सिद्ध चालक कमलेश कुमार को भारतीय दंड संहिता और मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत छह-छह माह के साधारण कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। हालांकि, अदालत ने आवेदन पर अपील दायर करने का अवसर देते हुए सजा को 30 दिन के लिए निलंबित कर 20 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
सजा निर्धारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने दोषी के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरतने की दलील दी। वहीं, बचाव पक्ष ने दोषी के पहली बार अपराध में संलिप्त होने, किसी को गंभीर क्षति नहीं पहुंचने, परिवार की जिम्मेदारियां होने और नौ वर्ष से अधिक समय तक मुकदमे का सामना करने का हवाला देते हुए परिवीक्षा का लाभ देने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए परिवीक्षा का लाभ देने से इन्कार कर दिया।
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 279 के तहत छह माह के साधारण कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। धारा 337 के तहत भी छह माह के साधारण कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
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धारा 338 के तहत छह माह के साधारण कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत छह माह के साधारण कारावास और 2,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
वहीं, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 187 के तहत 500 रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने के आदेश दिए।
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सजा निर्धारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने दोषी के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरतने की दलील दी। वहीं, बचाव पक्ष ने दोषी के पहली बार अपराध में संलिप्त होने, किसी को गंभीर क्षति नहीं पहुंचने, परिवार की जिम्मेदारियां होने और नौ वर्ष से अधिक समय तक मुकदमे का सामना करने का हवाला देते हुए परिवीक्षा का लाभ देने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए परिवीक्षा का लाभ देने से इन्कार कर दिया।
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अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 279 के तहत छह माह के साधारण कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। धारा 337 के तहत भी छह माह के साधारण कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
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धारा 338 के तहत छह माह के साधारण कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत छह माह के साधारण कारावास और 2,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
वहीं, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 187 के तहत 500 रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने के आदेश दिए।