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Rampur Bushahar News: हत्याकांड के सभी दस आरोपी बरी, वैज्ञानिक सबूतों का रहा अभाव
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अभियोजन पक्ष का मामला उचित संदेह से परे साबित नहीं हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित किन्नौर सत्र न्यायालय ने हत्याकांड के सभी दस आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा। यह फैसला वैज्ञानिक सबूतों के अभाव और प्रमुख गवाहों की अनुपलब्धता के कारण आया। मृतक सोनम दोरजे 7 सितंबर 2019 की रात से लापता थे। करीब नौ महीने बाद सतलुज नदी से मिले शव को उनका बताया गया था। हालांकि, डीएनए रिपोर्ट में यह साबित नहीं हो सका। शिकायतकर्ता प्रकाश चंद ने 8 सितंबर 2019 को अपने बेटे सोनम दोरजे के लापता होने की शिकायत दर्ज करवाई थी। उनकी गाड़ी पुह के भगत नाला में लावारिस मिली थी। शिकायत के अनुसार, सोनम दोरजे की आरोपियों से हाथापाई हुई थी और उन्हें धमकी दी गई थी। बाद में सोनम दोरजे की चप्पल सतलुज नदी किनारे मिली। पूह पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। जांच के दौरान, घटनास्थल से खून के धब्बे वाले पत्थर और रेत जब्त किए गए। आरोपियों के कपड़े और मोबाइल फोन भी कब्जे में लिए गए। 26 जून 2020 को सतलुज नदी से एक शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान प्रकाश चंद ने अंगुली पर बने टैटू से अपने बेटे सोनम दोरजे के रूप में की। अभियोजन पक्ष ने कुल 28 गवाहों से पूछताछ की लेकिन कोई चश्मदीद गवाह पेश नहीं हो सका। मुख्य गवाह हिमाल थापा सहित अन्य नेपाली मजदूर भारत छोड़ चुके थे। अदालत ने वैज्ञानिक सबूतों को महत्वपूर्ण माना। घटनास्थल से मिले खून के धब्बे और कैरी बैग से प्राप्त डीएनए प्रोफाइल शिकायतकर्ता प्रकाश चंद और उनकी के डीएनए से मेल नहीं खाए। बरामद शव का डीएनए भी प्रकाश चंद और उनकी पत्नी के जैविक बेटे का नहीं पाया गया। फोरेंसिक रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आरोपियों के कपड़ों पर खून के कोई धब्बे नहीं थे। कार से मिले खून के धब्बे सीरोलॉजिकल जांच के लिए पर्याप्त नहीं थे। इन रिपोर्टों ने अभियोजन पक्ष के दावों को कमजोर किया। मोबाइल फोन डेटा भी आरोपियों को अपराध स्थल से सीधे नहीं जोड़ सका। सत्र न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला उचित संदेह से परे साबित नहीं होता। इन सभी कारणों से अदालत ने सभी आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 341, 120-B और 201 के तहत दंडनीय अपराधों से बरी करने का फैसला सुनाया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित किन्नौर सत्र न्यायालय ने हत्याकांड के सभी दस आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा। यह फैसला वैज्ञानिक सबूतों के अभाव और प्रमुख गवाहों की अनुपलब्धता के कारण आया। मृतक सोनम दोरजे 7 सितंबर 2019 की रात से लापता थे। करीब नौ महीने बाद सतलुज नदी से मिले शव को उनका बताया गया था। हालांकि, डीएनए रिपोर्ट में यह साबित नहीं हो सका। शिकायतकर्ता प्रकाश चंद ने 8 सितंबर 2019 को अपने बेटे सोनम दोरजे के लापता होने की शिकायत दर्ज करवाई थी। उनकी गाड़ी पुह के भगत नाला में लावारिस मिली थी। शिकायत के अनुसार, सोनम दोरजे की आरोपियों से हाथापाई हुई थी और उन्हें धमकी दी गई थी। बाद में सोनम दोरजे की चप्पल सतलुज नदी किनारे मिली। पूह पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। जांच के दौरान, घटनास्थल से खून के धब्बे वाले पत्थर और रेत जब्त किए गए। आरोपियों के कपड़े और मोबाइल फोन भी कब्जे में लिए गए। 26 जून 2020 को सतलुज नदी से एक शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान प्रकाश चंद ने अंगुली पर बने टैटू से अपने बेटे सोनम दोरजे के रूप में की। अभियोजन पक्ष ने कुल 28 गवाहों से पूछताछ की लेकिन कोई चश्मदीद गवाह पेश नहीं हो सका। मुख्य गवाह हिमाल थापा सहित अन्य नेपाली मजदूर भारत छोड़ चुके थे। अदालत ने वैज्ञानिक सबूतों को महत्वपूर्ण माना। घटनास्थल से मिले खून के धब्बे और कैरी बैग से प्राप्त डीएनए प्रोफाइल शिकायतकर्ता प्रकाश चंद और उनकी के डीएनए से मेल नहीं खाए। बरामद शव का डीएनए भी प्रकाश चंद और उनकी पत्नी के जैविक बेटे का नहीं पाया गया। फोरेंसिक रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आरोपियों के कपड़ों पर खून के कोई धब्बे नहीं थे। कार से मिले खून के धब्बे सीरोलॉजिकल जांच के लिए पर्याप्त नहीं थे। इन रिपोर्टों ने अभियोजन पक्ष के दावों को कमजोर किया। मोबाइल फोन डेटा भी आरोपियों को अपराध स्थल से सीधे नहीं जोड़ सका। सत्र न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला उचित संदेह से परे साबित नहीं होता। इन सभी कारणों से अदालत ने सभी आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 341, 120-B और 201 के तहत दंडनीय अपराधों से बरी करने का फैसला सुनाया।