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मिड-डे मील वर्कर लड़ाई के लिए तैयार : सुनील
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बोले-500 रुपये की वृद्धि करके सरकार ने उड़ाया मजाक
चिड़गांव में मिड-डे मील वर्करों की संयुक्त बैठक, 22 जून की हड़ताल का ऐलान
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। मिड-डे मील वर्कर यूनियन (सीटू) चिड़गांव और जांगला ब्लॉक की संयुक्त बैठक शनिवार को आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सुरेखा ने की। इसमें बड़ी संख्या में मिड डे मील वर्करों ने भाग लेकर अपनी समस्याओं, शोषण और लंबित मांगों पर गंभीर चर्चा की।
वक्ताओं ने कहा कि अब वर्कर अधिकारों के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। बैठक को संबोधित करते हुए सीटू के शिमला जिला उपाध्यक्ष सुनील मेहता ने कहा कि मिड डे मील वर्करों के साथ लगातार अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां अन्य कर्मचारियों के वेतन में 750 रुपये तक की बढ़ोतरी की जाती है, वहीं मिड डे मील वर्करों के लिए मात्र 500 रुपये की वृद्धि कर सरकार ने उनकी मेहनत का मजाक उड़ाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
जिला महासचिव राजमिला मस्ताना ने कहा कि कम वेतन, असुरक्षित नौकरी और बढ़ते कार्यभार के बावजूद वर्कर पूरी जिम्मेदारी से बच्चों को भोजन उपलब्ध करवा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि अब संघर्ष ही एकमात्र रास्ता बचा है। वक्ता शकुंतला और उर्मिला ने भी सरकार पर वर्करों की मांगों को लगातार टालने का आरोप लगाया और प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 22 जून को प्रस्तावित प्रदेशव्यापी हड़ताल और शिमला में होने वाली रैली को ऐतिहासिक बनाया जाएगा। उस दिन प्रदेश के किसी भी स्कूल में मिड डे मील नहीं बनेगा और सभी वर्कर हड़ताल में भाग लेंगे। वर्करों ने 7000 रुपये मासिक वेतन, 12 महीने का भुगतान, ईपीएफ-ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा, मजदूर का दर्जा, अतिरिक्त कार्य का भुगतान सहित अन्य मांगों को जल्द लागू करने की मांग उठाई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। मिड-डे मील वर्कर यूनियन (सीटू) चिड़गांव और जांगला ब्लॉक की संयुक्त बैठक शनिवार को आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सुरेखा ने की। इसमें बड़ी संख्या में मिड डे मील वर्करों ने भाग लेकर अपनी समस्याओं, शोषण और लंबित मांगों पर गंभीर चर्चा की।
वक्ताओं ने कहा कि अब वर्कर अधिकारों के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। बैठक को संबोधित करते हुए सीटू के शिमला जिला उपाध्यक्ष सुनील मेहता ने कहा कि मिड डे मील वर्करों के साथ लगातार अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां अन्य कर्मचारियों के वेतन में 750 रुपये तक की बढ़ोतरी की जाती है, वहीं मिड डे मील वर्करों के लिए मात्र 500 रुपये की वृद्धि कर सरकार ने उनकी मेहनत का मजाक उड़ाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
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जिला महासचिव राजमिला मस्ताना ने कहा कि कम वेतन, असुरक्षित नौकरी और बढ़ते कार्यभार के बावजूद वर्कर पूरी जिम्मेदारी से बच्चों को भोजन उपलब्ध करवा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि अब संघर्ष ही एकमात्र रास्ता बचा है। वक्ता शकुंतला और उर्मिला ने भी सरकार पर वर्करों की मांगों को लगातार टालने का आरोप लगाया और प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 22 जून को प्रस्तावित प्रदेशव्यापी हड़ताल और शिमला में होने वाली रैली को ऐतिहासिक बनाया जाएगा। उस दिन प्रदेश के किसी भी स्कूल में मिड डे मील नहीं बनेगा और सभी वर्कर हड़ताल में भाग लेंगे। वर्करों ने 7000 रुपये मासिक वेतन, 12 महीने का भुगतान, ईपीएफ-ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा, मजदूर का दर्जा, अतिरिक्त कार्य का भुगतान सहित अन्य मांगों को जल्द लागू करने की मांग उठाई।