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Rampur Bushahar News: कच्ची नालियों से रिसाव, चलनैर में फसलें हो रहीं बर्बाद
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कच्ची नालियों और बंद कल्वर्ट से बढ़ी समस्या, विभाग से पक्की नालियों की मांग
मलबा और भूस्खलन ने बढ़ाई परेशानी
संवाद न्यूज एजेसी
कोटखाई (रोहड़ू)। ठियोग-हाटकोटी राजमार्ग-705 के चलनैर में सड़क किनारे बनी कच्ची नालियों से पानी के रिसाव के कारण ग्रामीणों और बागवानों को दो वर्षों से भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। बारिश के दौरान नालियों का पानी नीचे स्थित बागों और खेतों में पहुंचकर सेब सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है।
बागवान मदन गांगटा, सुरेंद्र शर्मा, सुभाष चौहान, अंकित गांगटा, दामोदर दास, ज्ञान चंद, अनु, तेज राम डोगरा और जोगिंद्र डोगरा ने बताया कि बारिश होते ही कच्ची नालियों से पानी रिसकर चलनैर, बागा और कोट गांव के बागानों में फैल जाता है। इसके अलावा, भारी बारिश में कल्वर्ट बंद हो जाते हैं, जिससे सारा पानी सीधे बागानों की ओर मुड़ जाता है।
उन्होंने बताया कि पिछले एक-दो वर्षों में भूस्खलन के कारण सैकड़ों पेड़ मलबे सहित बहकर नालों में जा चुके हैं। वर्तमान में भी हल्की बारिश होते ही सड़क के नीचे से पानी का रिसाव शुरू हो जाता है, जिससे बागवानों को लगातार नुकसान हो रहा है।
ग्रामीणों ने विभाग से मांग की है कि सड़क किनारे जल्द पक्की नालियों का निर्माण किया जाए और किनारे पड़े मलबे को हटाया जाए, ताकि पानी का सही निकास हो सके और बागानों को नुकसान से बचाया जा सके। विभाग के सहायक अभियंता शिव वरदान ने बताया कि फिलहाल बजट का अभाव है। बजट उपलब्ध होते ही नालियों के निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा।
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मलबा और भूस्खलन ने बढ़ाई परेशानी
संवाद न्यूज एजेसी
कोटखाई (रोहड़ू)। ठियोग-हाटकोटी राजमार्ग-705 के चलनैर में सड़क किनारे बनी कच्ची नालियों से पानी के रिसाव के कारण ग्रामीणों और बागवानों को दो वर्षों से भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। बारिश के दौरान नालियों का पानी नीचे स्थित बागों और खेतों में पहुंचकर सेब सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है।
बागवान मदन गांगटा, सुरेंद्र शर्मा, सुभाष चौहान, अंकित गांगटा, दामोदर दास, ज्ञान चंद, अनु, तेज राम डोगरा और जोगिंद्र डोगरा ने बताया कि बारिश होते ही कच्ची नालियों से पानी रिसकर चलनैर, बागा और कोट गांव के बागानों में फैल जाता है। इसके अलावा, भारी बारिश में कल्वर्ट बंद हो जाते हैं, जिससे सारा पानी सीधे बागानों की ओर मुड़ जाता है।
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उन्होंने बताया कि पिछले एक-दो वर्षों में भूस्खलन के कारण सैकड़ों पेड़ मलबे सहित बहकर नालों में जा चुके हैं। वर्तमान में भी हल्की बारिश होते ही सड़क के नीचे से पानी का रिसाव शुरू हो जाता है, जिससे बागवानों को लगातार नुकसान हो रहा है।
ग्रामीणों ने विभाग से मांग की है कि सड़क किनारे जल्द पक्की नालियों का निर्माण किया जाए और किनारे पड़े मलबे को हटाया जाए, ताकि पानी का सही निकास हो सके और बागानों को नुकसान से बचाया जा सके। विभाग के सहायक अभियंता शिव वरदान ने बताया कि फिलहाल बजट का अभाव है। बजट उपलब्ध होते ही नालियों के निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा।