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Rampur Bushahar News: मधुमक्खियाें की गुन गुन घोलेगी सेब के बगीचों में मिठास
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सेब के बगीचों में घुलेगी मधुमक्खियाें की मिठास
परागण के लिए बागवानों ने शुरू कर दी मधुमक्खियों के बॉक्स की बुकिंग
पर्याप्त संख्या में मधुमक्खियां मिलने से परागण होगा बेहतर
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब के बगीचों में जल्द ही मधुमक्खियां की मिठास घुलनी शुरू हो जाएगी। जिले के सेब बगीचों में इस बार परागण के लिए मधुमक्खियों की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। सेब के पेड़ों में फूल आने का समय शुरू होने वाला है, इसलिए बागवान अभी से मधुमक्खी पालकों से बॉक्स की बुकिंग कर रहे हैं। बागवानों का मानना है कि समय पर और पर्याप्त संख्या में मधुमक्खियां मिलने से परागण बेहतर होता है। इससे फलों का आकार बेहतर होता है। साथ ही गुणवत्ता और उत्पादन भी बढ़ता है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, सेब के फूलों में प्राकृतिक रूप से परागण के लिए मधुमक्खियां सबसे अहम भूमिका निभाती हैं। यदि बगीचों में मधुमक्खियों की पर्याप्त संख्या नहीं होती है, तो फूलों का सही परागण नहीं हो पाता और फल कम बनते हैं। इस कारण बागवान प्राकृतिक परागण के लिए मधुमक्खी बॉक्स का सहारा लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सेब के बगीचों में एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 8 से 10 मधुमक्खी बॉक्स पर्याप्त माने जाते हैं। इन बॉक्स को तब बगीचे में रखा जाता है, जब पेड़ों में लगभग 10 से 20 प्रतिशत फूल खिलना शुरू हो जाते हैं। इससे मधुमक्खियां तुरंत फूलों से पराग एकत्र करके परागण की प्रक्रिया तेजी से करती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मधुमक्खी बॉक्स को बगीचे में 15 से 20 दिन तक रखा जाना चाहिए, ताकि पूरे फूल आने की अवधि में परागण सही तरीके से और फल बनने लगते हैं, तब बॉक्स को हटा लिया जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. उषा शर्मा का कहना है कि मधुमक्खियों की परागण में सक्रियता से सेब के उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है। साथ ही फल का आकार और गुणवत्ता में सुधार आता है। यही कारण है कि अब अधिकांश बागवान परागण के लिए मधुमक्खियों का सहारा लेते हैं। उनका कहना है कि बगीचों में सेब के बॉक्स नीचे की ओर रखें। हर बॉक्स को लगाने से पहले उनकी जांच करें कि उसमें मक्खियों की संख्या पर्याप्त हो। पूरी तरह स्वस्थ्य हो, ताकि उनके बगीचों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।
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परागण के लिए बागवानों ने शुरू कर दी मधुमक्खियों के बॉक्स की बुकिंग
पर्याप्त संख्या में मधुमक्खियां मिलने से परागण होगा बेहतर
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब के बगीचों में जल्द ही मधुमक्खियां की मिठास घुलनी शुरू हो जाएगी। जिले के सेब बगीचों में इस बार परागण के लिए मधुमक्खियों की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। सेब के पेड़ों में फूल आने का समय शुरू होने वाला है, इसलिए बागवान अभी से मधुमक्खी पालकों से बॉक्स की बुकिंग कर रहे हैं। बागवानों का मानना है कि समय पर और पर्याप्त संख्या में मधुमक्खियां मिलने से परागण बेहतर होता है। इससे फलों का आकार बेहतर होता है। साथ ही गुणवत्ता और उत्पादन भी बढ़ता है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, सेब के फूलों में प्राकृतिक रूप से परागण के लिए मधुमक्खियां सबसे अहम भूमिका निभाती हैं। यदि बगीचों में मधुमक्खियों की पर्याप्त संख्या नहीं होती है, तो फूलों का सही परागण नहीं हो पाता और फल कम बनते हैं। इस कारण बागवान प्राकृतिक परागण के लिए मधुमक्खी बॉक्स का सहारा लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सेब के बगीचों में एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 8 से 10 मधुमक्खी बॉक्स पर्याप्त माने जाते हैं। इन बॉक्स को तब बगीचे में रखा जाता है, जब पेड़ों में लगभग 10 से 20 प्रतिशत फूल खिलना शुरू हो जाते हैं। इससे मधुमक्खियां तुरंत फूलों से पराग एकत्र करके परागण की प्रक्रिया तेजी से करती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मधुमक्खी बॉक्स को बगीचे में 15 से 20 दिन तक रखा जाना चाहिए, ताकि पूरे फूल आने की अवधि में परागण सही तरीके से और फल बनने लगते हैं, तब बॉक्स को हटा लिया जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. उषा शर्मा का कहना है कि मधुमक्खियों की परागण में सक्रियता से सेब के उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है। साथ ही फल का आकार और गुणवत्ता में सुधार आता है। यही कारण है कि अब अधिकांश बागवान परागण के लिए मधुमक्खियों का सहारा लेते हैं। उनका कहना है कि बगीचों में सेब के बॉक्स नीचे की ओर रखें। हर बॉक्स को लगाने से पहले उनकी जांच करें कि उसमें मक्खियों की संख्या पर्याप्त हो। पूरी तरह स्वस्थ्य हो, ताकि उनके बगीचों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।