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Rampur Bushahar News: एचपीटैट गणित प्रश्नपत्र विवाद गहराया, प्राथमिक शिक्षकों ने 10 ग्रेस अंकों की मांग की
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संघ का आरोप, अधिकांश गणित के प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर के थे
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हिमाचल प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (एचपीटैट) के गणित प्रश्नपत्र को लेकर विवाद गहरा गया है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ, जिला शिमला ने इस मामले में प्रदेश सरकार और स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव से कम से कम 10 कृपा (ग्रेस) अंक देने की मांग की है। संघ का आरोप है कि परीक्षा में पूछे गए अधिकांश गणित के प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे। इन प्रश्नों का स्तर प्राथमिक शिक्षकों (जूनियर बेसिक टीचर) के अनुरूप नहीं था। संघ के अनुसार, प्रश्न ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (टीजीटी) स्तर के थे। इनमें ऐसे विषय शामिल थे, जो आमतौर पर कक्षा 11वीं और 12वीं में पढ़ाए जाते हैं। गणित प्रश्नपत्र में इंटीग्रेशन, डिफरेंशिएशन, क्वाड्रेटिक समीकरण, माध्य, माध्यिका और त्रिकोणमिति जैसे विषयों से प्रश्न पूछे गए। संघ ने कहा कि अधिकांश जेबीटी शिक्षकों ने अपने विद्यार्थी जीवन में इन विषयों का अध्ययन नहीं किया है। यह विषय वस्तु प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों के पाठ्यक्रम का हिस्सा भी नहीं है। प्राथमिक स्तर के शिक्षकों से ऐसे उच्च स्तरीय गणितीय प्रश्नों की अपेक्षा करना अनुचित है। प्रश्नपत्र की कठिनाई से सैकड़ों जेबीटी शिक्षकों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। संघ ने बताया कि गणित के प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे। प्रश्नों का स्तर प्राथमिक शिक्षकों के लिए बहुत उच्च था। इनमें ऐसे विषय शामिल थे जो आमतौर पर कक्षा 11वीं और 12वीं में पढ़ाए जाते हैं। इंटीग्रेशन और डिफरेंशिएशन जैसे विषय जेबीटी शिक्षकों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। शिक्षकों ने परीक्षा की तैयारी के लिए कड़ी मेहनत की थी। प्रश्नपत्र में विसंगतियों के कारण कई अभ्यर्थी उत्तीर्ण होने से वंचित रह सकते हैं। इस स्थिति से शिक्षकों में मानसिक तनाव और निराशा का माहौल है। संघ ने सरकार और शिक्षा बोर्ड से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने तत्काल 10 कृपा अंक प्रदान करने की मांग की ताकि शिक्षकों के हितों की रक्षा हो सके।
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हिमाचल प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (एचपीटैट) के गणित प्रश्नपत्र को लेकर विवाद गहरा गया है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ, जिला शिमला ने इस मामले में प्रदेश सरकार और स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव से कम से कम 10 कृपा (ग्रेस) अंक देने की मांग की है। संघ का आरोप है कि परीक्षा में पूछे गए अधिकांश गणित के प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे। इन प्रश्नों का स्तर प्राथमिक शिक्षकों (जूनियर बेसिक टीचर) के अनुरूप नहीं था। संघ के अनुसार, प्रश्न ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (टीजीटी) स्तर के थे। इनमें ऐसे विषय शामिल थे, जो आमतौर पर कक्षा 11वीं और 12वीं में पढ़ाए जाते हैं। गणित प्रश्नपत्र में इंटीग्रेशन, डिफरेंशिएशन, क्वाड्रेटिक समीकरण, माध्य, माध्यिका और त्रिकोणमिति जैसे विषयों से प्रश्न पूछे गए। संघ ने कहा कि अधिकांश जेबीटी शिक्षकों ने अपने विद्यार्थी जीवन में इन विषयों का अध्ययन नहीं किया है। यह विषय वस्तु प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों के पाठ्यक्रम का हिस्सा भी नहीं है। प्राथमिक स्तर के शिक्षकों से ऐसे उच्च स्तरीय गणितीय प्रश्नों की अपेक्षा करना अनुचित है। प्रश्नपत्र की कठिनाई से सैकड़ों जेबीटी शिक्षकों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। संघ ने बताया कि गणित के प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे। प्रश्नों का स्तर प्राथमिक शिक्षकों के लिए बहुत उच्च था। इनमें ऐसे विषय शामिल थे जो आमतौर पर कक्षा 11वीं और 12वीं में पढ़ाए जाते हैं। इंटीग्रेशन और डिफरेंशिएशन जैसे विषय जेबीटी शिक्षकों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। शिक्षकों ने परीक्षा की तैयारी के लिए कड़ी मेहनत की थी। प्रश्नपत्र में विसंगतियों के कारण कई अभ्यर्थी उत्तीर्ण होने से वंचित रह सकते हैं। इस स्थिति से शिक्षकों में मानसिक तनाव और निराशा का माहौल है। संघ ने सरकार और शिक्षा बोर्ड से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने तत्काल 10 कृपा अंक प्रदान करने की मांग की ताकि शिक्षकों के हितों की रक्षा हो सके।