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Rampur Bushahar News: नित्थर के जंगल बने शराबियों का अड्डा, बोतलों और कचरे के लगे ढेर
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नित्थर के जंगलों में खुले में बिखरा प्लास्टिक कचरा और शराब की बोतलें। संवाद
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लोगों ने पुलिस से तत्काल कार्रवाई की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर (कुल्लू)। आनी विधानसभा क्षेत्र के नित्थर के जंगलों में शराब की खाली बोतलों और प्लास्टिक कचरे का अंबार लगने से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। लोगों का कहना है कि इससे जंगलों की सुंदरता प्रभावित होने के साथ-साथ राहगीरों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों, को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने पुलिस और वन विभाग से इस समस्या पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
लोगों के अनुसार, नित्थर के शिलाबंगला फॉरेस्ट साइट तथा नित्थर-लूहरी मार्ग पर पानीधार के समीप जंगलों में शराब की खाली और टूटी बोतलें तथा प्लास्टिक कचरा बड़ी मात्रा में बिखरा पड़ा है। उनका आरोप है कि पर्यटक और कुछ असामाजिक तत्व जंगल में शराब पीने के बाद कचरा वहीं छोड़ जाते हैं।
टूटी हुई कांच की बोतलों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है, जिससे स्थानीय महिलाओं और बच्चों का इन रास्तों से गुजरना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो जंगलों की स्थिति और अधिक खराब हो सकती है। लोगों ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले जिज्ञासा फाउंडेशन ने यहां व्यापक सफाई अभियान चलाकर जंगल को कचरे से मुक्त कराया था, लेकिन अब फिर से हालात चिंताजनक हो गए हैं। डीएसपी आनी राजीव मेहता ने बताया कि इस संबंध में पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर (कुल्लू)। आनी विधानसभा क्षेत्र के नित्थर के जंगलों में शराब की खाली बोतलों और प्लास्टिक कचरे का अंबार लगने से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। लोगों का कहना है कि इससे जंगलों की सुंदरता प्रभावित होने के साथ-साथ राहगीरों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों, को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने पुलिस और वन विभाग से इस समस्या पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
लोगों के अनुसार, नित्थर के शिलाबंगला फॉरेस्ट साइट तथा नित्थर-लूहरी मार्ग पर पानीधार के समीप जंगलों में शराब की खाली और टूटी बोतलें तथा प्लास्टिक कचरा बड़ी मात्रा में बिखरा पड़ा है। उनका आरोप है कि पर्यटक और कुछ असामाजिक तत्व जंगल में शराब पीने के बाद कचरा वहीं छोड़ जाते हैं।
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टूटी हुई कांच की बोतलों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है, जिससे स्थानीय महिलाओं और बच्चों का इन रास्तों से गुजरना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो जंगलों की स्थिति और अधिक खराब हो सकती है। लोगों ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले जिज्ञासा फाउंडेशन ने यहां व्यापक सफाई अभियान चलाकर जंगल को कचरे से मुक्त कराया था, लेकिन अब फिर से हालात चिंताजनक हो गए हैं। डीएसपी आनी राजीव मेहता ने बताया कि इस संबंध में पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी।
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