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Rampur Bushahar News: आपदा प्रभावित सुंडा-सनेई सड़क पर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए जाएं
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सुंडा-सनेई सडक़ में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर एसडीएम रामपुर हर्ष अमरेंद्र सिंह
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दो पंचायतों के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने एसडीएम से मिलकर राहत की लगाई गुहार
एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर संयुक्त विभागीय समिति के गठन की उठाई मांग
चेतावनी दी-जल्द नहीं हुए पुख्ता बंदोबस्त तो होगा आंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। नोगवैली समेत 12/20 क्षेत्र के ग्रामीणों को लाभान्वित करने वाली सुंडा-सनेई सड़क पर सफर जोखिमभरा बना हुआ है। वर्ष 2023 में आई प्राकृतिक आपदा के बाद से ग्रामीण और स्कूली बच्चे खतरे के साये में सफर कर रहे हैं। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र से ठीक नीचे रचोली पंचायत के खोयी गांव को भी भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से आपदा प्रभावित सुंडा-सनेई सड़क पर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों ने चेताया कि यदि जल्द यहां सुरक्षा के लिहाज से कार्य शुरू नहीं हुए तो ग्रामीणों को साथ लेकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। शुक्रवार को डंसा और शिंगला पंचायत का एक प्रतिनिधिमंडल रामपुर के एसडीएम से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने लोगों को सुरक्षित यातायात व्यवस्था और खोयी गांव के ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल को एसडीएम हर्ष अमरेंद्र सिंह ने कहा कि इस आपदा प्रभावित इस क्षेत्र में समस्या के स्थायी समाधान के लिए वैज्ञानिक रूप से कार्य किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की इस ज्वलंत समस्या को उपायुक्त शिमला के समक्ष रखा जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में शामिल डंसा पंचायत के प्रधान पदमा कौंग, पूर्व प्रधान देशराज हुडन, रचोली पंचायत उप प्रधान ज्योति लाल सानी, बीडीसी सदस्य मोरार कांत, बीडीसी इशा चौहान, तिलक राज और विष्णु शर्मा सहित अन्य ने कहा कि सुंडा-सनेई सड़क पर हर वर्ष बरसात के दौरान भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं। इस सड़क से नोगवैली समेत 12/20 क्षेत्र के लोगों को भी लाभ मिल रहा है। बरसात और सर्दियों के मौसम में यहां भूस्खलन होने से सड़क पर मलबे और पत्थरों के गिरने का सिलसिला जारी है। रोजाना ग्रामीण और स्कूली बच्चे खतरों के साये में सफर कर रहे हैं। वर्ष 2024 में भारी बरसात से सड़क का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने कहा कि यह भूस्खलन प्रभावित हिस्सा अब खतरा बन गया है। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के नीचे रचोली पंचायत का खोयी गांव आता है। इस गांव के ग्रामीण हर वक्त खतरों के साये में जी रहे हैं। कई वर्ष बाद भी यहां सुरक्षा के लिहाज से कार्य न होने के कारण ग्रामीण खासे चिंतित हैं। रोजाना स्कूल जाने वाले विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार और प्रशासन से गंभीरता अपनाते हुए संयुक्त विभागीय दल गठित कर समस्या के समाधान की मांग उठाई है।
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एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर संयुक्त विभागीय समिति के गठन की उठाई मांग
चेतावनी दी-जल्द नहीं हुए पुख्ता बंदोबस्त तो होगा आंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। नोगवैली समेत 12/20 क्षेत्र के ग्रामीणों को लाभान्वित करने वाली सुंडा-सनेई सड़क पर सफर जोखिमभरा बना हुआ है। वर्ष 2023 में आई प्राकृतिक आपदा के बाद से ग्रामीण और स्कूली बच्चे खतरे के साये में सफर कर रहे हैं। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र से ठीक नीचे रचोली पंचायत के खोयी गांव को भी भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से आपदा प्रभावित सुंडा-सनेई सड़क पर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों ने चेताया कि यदि जल्द यहां सुरक्षा के लिहाज से कार्य शुरू नहीं हुए तो ग्रामीणों को साथ लेकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। शुक्रवार को डंसा और शिंगला पंचायत का एक प्रतिनिधिमंडल रामपुर के एसडीएम से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने लोगों को सुरक्षित यातायात व्यवस्था और खोयी गांव के ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल को एसडीएम हर्ष अमरेंद्र सिंह ने कहा कि इस आपदा प्रभावित इस क्षेत्र में समस्या के स्थायी समाधान के लिए वैज्ञानिक रूप से कार्य किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की इस ज्वलंत समस्या को उपायुक्त शिमला के समक्ष रखा जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में शामिल डंसा पंचायत के प्रधान पदमा कौंग, पूर्व प्रधान देशराज हुडन, रचोली पंचायत उप प्रधान ज्योति लाल सानी, बीडीसी सदस्य मोरार कांत, बीडीसी इशा चौहान, तिलक राज और विष्णु शर्मा सहित अन्य ने कहा कि सुंडा-सनेई सड़क पर हर वर्ष बरसात के दौरान भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं। इस सड़क से नोगवैली समेत 12/20 क्षेत्र के लोगों को भी लाभ मिल रहा है। बरसात और सर्दियों के मौसम में यहां भूस्खलन होने से सड़क पर मलबे और पत्थरों के गिरने का सिलसिला जारी है। रोजाना ग्रामीण और स्कूली बच्चे खतरों के साये में सफर कर रहे हैं। वर्ष 2024 में भारी बरसात से सड़क का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने कहा कि यह भूस्खलन प्रभावित हिस्सा अब खतरा बन गया है। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के नीचे रचोली पंचायत का खोयी गांव आता है। इस गांव के ग्रामीण हर वक्त खतरों के साये में जी रहे हैं। कई वर्ष बाद भी यहां सुरक्षा के लिहाज से कार्य न होने के कारण ग्रामीण खासे चिंतित हैं। रोजाना स्कूल जाने वाले विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार और प्रशासन से गंभीरता अपनाते हुए संयुक्त विभागीय दल गठित कर समस्या के समाधान की मांग उठाई है।