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Rampur Bushahar News: मारपीट के मामले में राज्य की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार, निचली अदालत के आदेश रद्द
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अभियोजन पक्ष को गवाहों से जिरह करने का मौका मिलेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
रामपुर स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने मारपीट के मामले में राज्य की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली है और निचली अदालत के दो आदेशों को रद्द कर दिया है। यह फैसला राज्य की ओर से दायर एक पुनरीक्षण याचिका पर आया है। याचिका में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, आनी की ओर से अभियोजन पक्ष के गवाहों से जिरह का अवसर बंद करने को चुनौती दी गई थी। अब अभियोजन पक्ष को गवाहों से जिरह करने का मौका मिलेगा। यह मामला दिब्बन कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 325 के तहत दर्ज अपराधों से संबंधित है। निचली अदालत ने 7 जुलाई 2025 को डॉ. संजय दत्त और 5 अगस्त 2025 को जांच अधिकारी योग राज के साक्ष्य बंद कर दिए थे। राज्य ने तर्क दिया कि ये गवाह मामले को साबित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनकी अनुपस्थिति में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर पाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि गवाह संख्या नौ डॉ. बलि राम को कभी तलब नहीं किया गया था। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि निचली अदालत को गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने चाहिए थे। अदालत ने पाया कि निचली अदालत ने गवाहों की अनुपस्थिति को जानबूझकर मानकर साक्ष्य बंद कर दिए, जो कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है। अभियोजन पक्ष को महत्वपूर्ण गवाहों से जिरह का अवसर न देना न्याय के हित में नहीं था। अदालत ने निचली अदालत के आदेशों को कानून की नजर में अस्थिर बताया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, आनी ने 7 जुलाई 2025 को डॉ. संजय दत्त के साक्ष्य बंद किए थे। इसके बाद 5 अगस्त 2025 को जांच अधिकारी योग राज के साक्ष्य भी बंद कर दिए गए। योग राज ने भारी बारिश और सड़क जाम के कारण अनुपस्थित रहने का अनुरोध किया था। निचली अदालत ने इसे अंतिम अवसर मानते हुए अनुरोध खारिज कर दिया था। राज्य ने इन आदेशों को अवैध बताते हुए पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। राज्य का कहना था कि गवाहों को फिर से तलब किया जाना चाहिए था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने निचली अदालत के आदेशों की समीक्षा की। अदालत ने पाया कि गवाहों की अनुपस्थिति में दंडात्मक कदम उठाए जाने चाहिए थे। इसके बजाय, निचली अदालत ने अभियोजन साक्ष्य को बंद कर दिया। यह प्रक्रिया कानून के स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थी। डॉ. संजय दत्त और जांच अधिकारी योग राज महत्वपूर्ण गवाह थे। उन्हें जिरह का अवसर न देने से अभियोजन पक्ष को भारी नुकसान हो सकता था। अदालत ने निचली अदालत के दोनों आदेशों को रद्द कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, आनी को निर्देश दिया गया है। अभियोजन पक्ष को डॉ. संजय दत्त, योग राज और डॉ. बलि राम से जिरह का अवसर दिया जाएगा। सभी संबंधित पक्षों को 5 अगस्त को निचली अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
रामपुर स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने मारपीट के मामले में राज्य की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली है और निचली अदालत के दो आदेशों को रद्द कर दिया है। यह फैसला राज्य की ओर से दायर एक पुनरीक्षण याचिका पर आया है। याचिका में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, आनी की ओर से अभियोजन पक्ष के गवाहों से जिरह का अवसर बंद करने को चुनौती दी गई थी। अब अभियोजन पक्ष को गवाहों से जिरह करने का मौका मिलेगा। यह मामला दिब्बन कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 325 के तहत दर्ज अपराधों से संबंधित है। निचली अदालत ने 7 जुलाई 2025 को डॉ. संजय दत्त और 5 अगस्त 2025 को जांच अधिकारी योग राज के साक्ष्य बंद कर दिए थे। राज्य ने तर्क दिया कि ये गवाह मामले को साबित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनकी अनुपस्थिति में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर पाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि गवाह संख्या नौ डॉ. बलि राम को कभी तलब नहीं किया गया था। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि निचली अदालत को गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने चाहिए थे। अदालत ने पाया कि निचली अदालत ने गवाहों की अनुपस्थिति को जानबूझकर मानकर साक्ष्य बंद कर दिए, जो कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है। अभियोजन पक्ष को महत्वपूर्ण गवाहों से जिरह का अवसर न देना न्याय के हित में नहीं था। अदालत ने निचली अदालत के आदेशों को कानून की नजर में अस्थिर बताया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, आनी ने 7 जुलाई 2025 को डॉ. संजय दत्त के साक्ष्य बंद किए थे। इसके बाद 5 अगस्त 2025 को जांच अधिकारी योग राज के साक्ष्य भी बंद कर दिए गए। योग राज ने भारी बारिश और सड़क जाम के कारण अनुपस्थित रहने का अनुरोध किया था। निचली अदालत ने इसे अंतिम अवसर मानते हुए अनुरोध खारिज कर दिया था। राज्य ने इन आदेशों को अवैध बताते हुए पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। राज्य का कहना था कि गवाहों को फिर से तलब किया जाना चाहिए था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने निचली अदालत के आदेशों की समीक्षा की। अदालत ने पाया कि गवाहों की अनुपस्थिति में दंडात्मक कदम उठाए जाने चाहिए थे। इसके बजाय, निचली अदालत ने अभियोजन साक्ष्य को बंद कर दिया। यह प्रक्रिया कानून के स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थी। डॉ. संजय दत्त और जांच अधिकारी योग राज महत्वपूर्ण गवाह थे। उन्हें जिरह का अवसर न देने से अभियोजन पक्ष को भारी नुकसान हो सकता था। अदालत ने निचली अदालत के दोनों आदेशों को रद्द कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, आनी को निर्देश दिया गया है। अभियोजन पक्ष को डॉ. संजय दत्त, योग राज और डॉ. बलि राम से जिरह का अवसर दिया जाएगा। सभी संबंधित पक्षों को 5 अगस्त को निचली अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।