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Rampur Bushahar News: सही तरीके से हो छंटाई तो पौधे देते हैं बेहतर गुणवत्ता वाले फल
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किन्नौर के मलिंग गांव में आयोजित शिविर के दौरान बागवानों को सेब के पौधरोपण बारे प्रशिक्षित करते
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मलिंग में बागवानों को सिखाई बागवानी की नई वैज्ञानिक तकनीक, प्राकृतिक खेती की बारीकियां
. किन्नौर के दुर्गम क्षेत्रों में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)।
जिले के दुर्गम क्षेत्रों में समशीतोष्ण फल उत्पादन में वैज्ञानिक बागवानी प्रबंधन और प्राकृतिक खेती विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। नाको पंचायत के मलिंग गांव में पहले प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। किसानों-बागवानों को बागवानी की नई वैज्ञानिक तकनीक सिखाई गई है। साथ ही लाइव डेमोस्ट्रेशन के जरिये जागरूक किया गया। क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्र शारबो के सह निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम का संचालन कृषि वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार और जूनियर तकनीशियन गोविंद सिंह ने किया। प्रशिक्षण की शुरुआत सेब की वैज्ञानिक खेती की मूलभूत जानकारी से की गई। किसानों को पारंपरिक अव्यवस्थित रोपण पद्धति के स्थान पर वैज्ञानिक ढंग से बाग लगाने के लिए प्रेरित किया गया। इसके बाद उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में छत्र (कैनोपी) प्रबंधन पर जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि सही तरीके से प्रशिक्षित एवं छंटाई किए गए पौधे बेहतर गुणवत्ता के फल देते हैं। उन्होंने बताया कि अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फल का आकार भले ही छोटा हो, लेकिन उनकी गुणवत्ता जैसे रंग, कठोरता, मिठास, मोटी त्वचा (कटिकल) और बेहतर भंडारण क्षमता उन्हें बाजार में अधिक मूल्य दिलाती है। प्रशिक्षण के दौरान सामने आया कि स्थानीय बागवान अभी तक वैज्ञानिक कैनोपी प्रबंधन तकनीकों में दक्ष नहीं हैं और बाहरी मजदूरों पर निर्भर रहते हैं, जो निम्न ऊंचाई वाले क्षेत्रों की पद्धतियों को यहां लागू करते हैं, जबकि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कम वर्षा, कम आर्द्रता, अधिक प्रकाश तीव्रता एवं ठंडे मौसम के कारण पेड़ों में कैंकर जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। ऐसे में पौधों का प्रबंधन इस प्रकार किया जाना आवश्यक है कि तनों को सीधी धूप से बचाया जा सके। बागवानों को प्राकृतिक खेती के तहत पौध लेप जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी गई, जिससे पौधों को सूर्य की किरणों से सुरक्षा मिल सके। इस मौके पर पूर्व उपप्रधान प्रेम नेगी, प्रगतिशील बागवान सुनील नेगी ने टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम बागवानों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं और भविष्य में इससे क्षेत्र में बागवानी के विकास को गति मिलेगी।
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. किन्नौर के दुर्गम क्षेत्रों में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)।
जिले के दुर्गम क्षेत्रों में समशीतोष्ण फल उत्पादन में वैज्ञानिक बागवानी प्रबंधन और प्राकृतिक खेती विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। नाको पंचायत के मलिंग गांव में पहले प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। किसानों-बागवानों को बागवानी की नई वैज्ञानिक तकनीक सिखाई गई है। साथ ही लाइव डेमोस्ट्रेशन के जरिये जागरूक किया गया। क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्र शारबो के सह निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम का संचालन कृषि वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार और जूनियर तकनीशियन गोविंद सिंह ने किया। प्रशिक्षण की शुरुआत सेब की वैज्ञानिक खेती की मूलभूत जानकारी से की गई। किसानों को पारंपरिक अव्यवस्थित रोपण पद्धति के स्थान पर वैज्ञानिक ढंग से बाग लगाने के लिए प्रेरित किया गया। इसके बाद उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में छत्र (कैनोपी) प्रबंधन पर जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि सही तरीके से प्रशिक्षित एवं छंटाई किए गए पौधे बेहतर गुणवत्ता के फल देते हैं। उन्होंने बताया कि अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फल का आकार भले ही छोटा हो, लेकिन उनकी गुणवत्ता जैसे रंग, कठोरता, मिठास, मोटी त्वचा (कटिकल) और बेहतर भंडारण क्षमता उन्हें बाजार में अधिक मूल्य दिलाती है। प्रशिक्षण के दौरान सामने आया कि स्थानीय बागवान अभी तक वैज्ञानिक कैनोपी प्रबंधन तकनीकों में दक्ष नहीं हैं और बाहरी मजदूरों पर निर्भर रहते हैं, जो निम्न ऊंचाई वाले क्षेत्रों की पद्धतियों को यहां लागू करते हैं, जबकि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कम वर्षा, कम आर्द्रता, अधिक प्रकाश तीव्रता एवं ठंडे मौसम के कारण पेड़ों में कैंकर जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। ऐसे में पौधों का प्रबंधन इस प्रकार किया जाना आवश्यक है कि तनों को सीधी धूप से बचाया जा सके। बागवानों को प्राकृतिक खेती के तहत पौध लेप जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी गई, जिससे पौधों को सूर्य की किरणों से सुरक्षा मिल सके। इस मौके पर पूर्व उपप्रधान प्रेम नेगी, प्रगतिशील बागवान सुनील नेगी ने टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम बागवानों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं और भविष्य में इससे क्षेत्र में बागवानी के विकास को गति मिलेगी।