{"_id":"69c275d7fce1dcbb1f0e10a5","slug":"bhagvat-in-sanvagaown-nahan-news-c-177-1-ssml1028-174788-2026-03-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"भक्ति में जो लीन रहा है, वो मोह-माया में नहीं फंसता : शांडिल्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भक्ति में जो लीन रहा है, वो मोह-माया में नहीं फंसता : शांडिल्य
विज्ञापन
स्वांगांव में आयोजित श्रीमदभागवत कथा में उपस्थित महिलाएं। संवाद
विज्ञापन
सचित्र--
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। संवागांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बड़ी संख्या में महिलाएं भाग ले रही हैं। कथा प्रवक्ता कृष्ण कांत शांडिल्य ने कहा कि जो व्यक्ति निरंतर भगवान का स्मरण करता है और भक्ति में लीन रहता है, वह कभी भी मोह-माया में नहीं फंसता। भक्ति ही मनुष्य की असली संपत्ति है, जो जीवन के बाद भी उसके साथ रहती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में परोपकार, सत्य और पवित्रता को अपनाना चाहिए। सांसारिक रिश्ते केवल इस जीवन तक सीमित होते हैं, लेकिन ईश्वर का नाम ही आत्मा के साथ अंत तक रहता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति पर बढ़ते पाश्चात्य प्रभाव को लेकर चिंता जताई और युवाओं से अपनी परंपराओं को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने गुरुकुल शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता भी बताई।
कथावाचक ने बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण में 18 हजार श्लोक और 12 स्कंध हैं, जिसमें भक्ति को मोक्ष का सबसे सरल मार्ग बताया गया है। विशेष रूप से श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।
कथा के दौरान नवधा भक्ति-श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया।
-- -संवाद
Trending Videos
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। संवागांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बड़ी संख्या में महिलाएं भाग ले रही हैं। कथा प्रवक्ता कृष्ण कांत शांडिल्य ने कहा कि जो व्यक्ति निरंतर भगवान का स्मरण करता है और भक्ति में लीन रहता है, वह कभी भी मोह-माया में नहीं फंसता। भक्ति ही मनुष्य की असली संपत्ति है, जो जीवन के बाद भी उसके साथ रहती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में परोपकार, सत्य और पवित्रता को अपनाना चाहिए। सांसारिक रिश्ते केवल इस जीवन तक सीमित होते हैं, लेकिन ईश्वर का नाम ही आत्मा के साथ अंत तक रहता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति पर बढ़ते पाश्चात्य प्रभाव को लेकर चिंता जताई और युवाओं से अपनी परंपराओं को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने गुरुकुल शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता भी बताई।
विज्ञापन
विज्ञापन
कथावाचक ने बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण में 18 हजार श्लोक और 12 स्कंध हैं, जिसमें भक्ति को मोक्ष का सबसे सरल मार्ग बताया गया है। विशेष रूप से श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।
कथा के दौरान नवधा भक्ति-श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया।