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Sirmour News: अदालत 2
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चेक बाउंस मामले में समय बढ़ाने की अर्जी खारिज
नाहन। चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी अत्तर सिंह को अदालत से राहत नहीं मिली। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने समय बढ़ाने की मांग वाली अर्जी को खारिज करते हुए साफ कहा कि निर्धारित अवधि के बाद राहत नहीं दी जा सकती।
मामला अत्तर सिंह बनाम सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक, शिलाई शाखा का है। अदालत के 15 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुसार आरोपी को एक महीने के भीतर 20 हजार रुपये का व्यक्तिगत बांड और एक जमानतदार पेश करना था। साथ ही, 35 हजार रुपये के मुआवजे की 20 प्रतिशत राशि (करीब 7 हजार रुपये) जमा करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आरोपी तय समय सीमा में न तो राशि जमा कर पाया और न ही बांड पेश कर सका।
बाद में उसने पारिवारिक समस्याओं और परिजनों की बीमारी का हवाला देते हुए समय बढ़ाने की मांग की। अदालत ने कहा कि एनआई एक्ट की धारा 148(2) के तहत अधिकतम 90 दिनों तक ही समय बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद समय विस्तार देना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। साथ ही अदालत ने यह भी पाया कि आरोपी ने समय सीमा समाप्त होने के बाद करीब तीन महीने तक कोई अर्जी दाखिल नहीं की। इससे उसकी मंशा पर भी सवाल उठता है। ऐसे में समय बढ़ाने की अर्जी को खारिज कर दिया गया।
संवाद
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नाहन। चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी अत्तर सिंह को अदालत से राहत नहीं मिली। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने समय बढ़ाने की मांग वाली अर्जी को खारिज करते हुए साफ कहा कि निर्धारित अवधि के बाद राहत नहीं दी जा सकती।
मामला अत्तर सिंह बनाम सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक, शिलाई शाखा का है। अदालत के 15 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुसार आरोपी को एक महीने के भीतर 20 हजार रुपये का व्यक्तिगत बांड और एक जमानतदार पेश करना था। साथ ही, 35 हजार रुपये के मुआवजे की 20 प्रतिशत राशि (करीब 7 हजार रुपये) जमा करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आरोपी तय समय सीमा में न तो राशि जमा कर पाया और न ही बांड पेश कर सका।
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बाद में उसने पारिवारिक समस्याओं और परिजनों की बीमारी का हवाला देते हुए समय बढ़ाने की मांग की। अदालत ने कहा कि एनआई एक्ट की धारा 148(2) के तहत अधिकतम 90 दिनों तक ही समय बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद समय विस्तार देना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। साथ ही अदालत ने यह भी पाया कि आरोपी ने समय सीमा समाप्त होने के बाद करीब तीन महीने तक कोई अर्जी दाखिल नहीं की। इससे उसकी मंशा पर भी सवाल उठता है। ऐसे में समय बढ़ाने की अर्जी को खारिज कर दिया गया।
संवाद