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Sirmour News: अदालत 4
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घर के नवीनीकरण के लिए उधार को न
चुकाने पर एक साल की सजा बरकरार
- अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने दोषी की खारिज की अपील, ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया
- 5 नवंबर 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को सुनाई थी सजा और 6 लाख का जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। एनआई एक्ट के मामले में घर के नवीनीकरण के लिए उधार ली रकम को न चुकाने पर दोषी ठहराए अरुण कुमार को न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने निचली अदालत की सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए दोषी की अपील खारिज कर दी।
यह मामला जून, 2018 का है। तहसील पांवटा साहिब निवासी अरुण कुमार ने घर के नवीनीकरण के लिए संजीव कुमार से 5.35 लाख रुपये उधार लिए थे। उसने छह महीने के भीतर ऋण वापस करने का आश्वासन दिया था। इस दौरान आरोपी ने देनदारी को पूरा करने के लिए दो पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गए। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया।
इसके बाद न्यायालय में शिकायत दायर की गई। 5 नवंबर 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को एनआई एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए एक साल की कैद और 6 लाख रुपये मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। अब अपील में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि ट्रायल कोर्ट ने अनुमानों और अटकलों के आधार पर आदेश पारित किया था। हालांकि न्यायालय ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन किया है। ट्रायल कोर्ट के फैसले में किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
संवाद
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चुकाने पर एक साल की सजा बरकरार
- अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने दोषी की खारिज की अपील, ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया
- 5 नवंबर 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को सुनाई थी सजा और 6 लाख का जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। एनआई एक्ट के मामले में घर के नवीनीकरण के लिए उधार ली रकम को न चुकाने पर दोषी ठहराए अरुण कुमार को न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने निचली अदालत की सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए दोषी की अपील खारिज कर दी।
यह मामला जून, 2018 का है। तहसील पांवटा साहिब निवासी अरुण कुमार ने घर के नवीनीकरण के लिए संजीव कुमार से 5.35 लाख रुपये उधार लिए थे। उसने छह महीने के भीतर ऋण वापस करने का आश्वासन दिया था। इस दौरान आरोपी ने देनदारी को पूरा करने के लिए दो पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गए। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया।
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इसके बाद न्यायालय में शिकायत दायर की गई। 5 नवंबर 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को एनआई एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए एक साल की कैद और 6 लाख रुपये मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। अब अपील में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि ट्रायल कोर्ट ने अनुमानों और अटकलों के आधार पर आदेश पारित किया था। हालांकि न्यायालय ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन किया है। ट्रायल कोर्ट के फैसले में किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
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