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Sirmour News: अदालत 4
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चेक बाउंस मामले में दोषी की अपील
खारिज, एक साल की सजा बरकरार
- सहकारी कृषि एवं एवं ग्रामीण विकास बैंक का मामला, 2.50 लाख जुर्माने के आदेश
- साल 2014 को दोषी ने गैर-कृषि उद्देश्य के लिए बैंक से लिया था 10 लाख का ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने चेक बाउंस मामले में दोषी करार दिए गए आरोपी की अपील को खारिज करते हुए सजा और जुर्माने का भुगतान करने का आदेश दिया है। निचली अदालत ने दोषी को एक साल की कैद और 2.5 लाख रुपये का भुगतान करने का फैसला सुनाया था।
यह मामला सुनील कुमार बनाम राज्य सहकारी कृषि एवं एवं ग्रामीण विकास बैंक की राजगढ़ शाखा का है। साल 2014 को उप-तहसील पझौता निवासी सुनील ने गैर-कृषि उद्देश्य के लिए बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण लिया था। आरोपी ने किस्तों में भुगतान करने का वादा किया, लेकिन समय पर राशि जमा नहीं करवाई। इसके बाद बैंक को आरोपी ने 2,43,101 रुपये का एक चेक जारी किया। जब बैंक ने चेक को भुनाने के लिए प्रस्तुत किया, तो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद बैंक ने आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन उसने निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया। इस पर बैंक ने न्यायालय में शिकायत दर्ज करवाई।
27 फरवरी 2025 को निचली अदालत (न्यायिक मजिस्ट्रेट) ने सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा और जुर्माने की सजा सुनाई थी। अब आरोपी ने इस फैसले के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील दायर की। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने फैसले में कहा कि आरोपी ने चेक जारी करने और ऋण लेने की बात स्वीकार की है। सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत की दी गई सजा को बरकरार रखा।
संवाद
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खारिज, एक साल की सजा बरकरार
- सहकारी कृषि एवं एवं ग्रामीण विकास बैंक का मामला, 2.50 लाख जुर्माने के आदेश
- साल 2014 को दोषी ने गैर-कृषि उद्देश्य के लिए बैंक से लिया था 10 लाख का ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने चेक बाउंस मामले में दोषी करार दिए गए आरोपी की अपील को खारिज करते हुए सजा और जुर्माने का भुगतान करने का आदेश दिया है। निचली अदालत ने दोषी को एक साल की कैद और 2.5 लाख रुपये का भुगतान करने का फैसला सुनाया था।
यह मामला सुनील कुमार बनाम राज्य सहकारी कृषि एवं एवं ग्रामीण विकास बैंक की राजगढ़ शाखा का है। साल 2014 को उप-तहसील पझौता निवासी सुनील ने गैर-कृषि उद्देश्य के लिए बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण लिया था। आरोपी ने किस्तों में भुगतान करने का वादा किया, लेकिन समय पर राशि जमा नहीं करवाई। इसके बाद बैंक को आरोपी ने 2,43,101 रुपये का एक चेक जारी किया। जब बैंक ने चेक को भुनाने के लिए प्रस्तुत किया, तो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद बैंक ने आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन उसने निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया। इस पर बैंक ने न्यायालय में शिकायत दर्ज करवाई।
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27 फरवरी 2025 को निचली अदालत (न्यायिक मजिस्ट्रेट) ने सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा और जुर्माने की सजा सुनाई थी। अब आरोपी ने इस फैसले के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील दायर की। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने फैसले में कहा कि आरोपी ने चेक जारी करने और ऋण लेने की बात स्वीकार की है। सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत की दी गई सजा को बरकरार रखा।
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