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Sirmour News: जल्द मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो न्यायालय जाएगी संघर्ष समिति
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ददाहू में आयोजित रेणुकाजी बांध संघर्ष समिति की बैठक में मौजूद सदस्य। संवाद
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-श्री रेणुका बांध जन संघर्ष समिति की मासिक बैठक में लिया निर्णय
-बांध प्रबंधन की खरीदी जमीनें पुनर्स्थापन और पुनर्वास के लिए उपयुक्त नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
संगड़ाह (सिरमौर)। श्री रेणुका बांध जन संघर्ष समिति की मासिक बैठक ददाहू स्थित किसान भवन में आयोजित हुई, जिसमें विस्थापन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष योगेंद्र कपिला, संयोजक प्रताप सिंह तोमर और महासचिव संजय चौहान ने की।
बैठक में डायवर्जन टनल निर्माण क्षेत्र के पास बसे नौ परिवारों को स्थान खाली करने के नोटिस का मामला प्रमुखता से उठा। सदस्यों ने बताया कि पहले जारी सूची में शामिल नौ परिवारों में से अब केवल दो को ही रखा गया है, जबकि अन्य को बाहर कर दिया गया है। इस फैसले को लेकर विस्थापितों और संघर्ष समिति में बांध प्रबंधन के खिलाफ गहरा रोष है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे न्यायालय का रुख करेंगे।
इस संबंध में अधिवक्ता बृजेश सकलानी और जेएस कंवर को बैठक में आमंत्रित किया गया था, जिनके समक्ष विस्थापितों ने अपनी समस्याएं रखीं और न्यायालय में याचिका दायर करने की मांग की। विस्थापितों ने आरोप लगाया कि बांध प्रबंधन की ओर से खरीदी गई कई जमीनें पुनर्स्थापन और पुनर्वास के लिए उपयुक्त नहीं हैं। साथ ही इस मामले में सतर्कता विभाग की जांच लंबित होने पर भी नाराजगी जताई गई।
बैठक में राजेश कुमार, अनिल कुमार, राजेंद्र, टीका राम, बलमोहन, लक्ष्मी सिंह, दिनेश अग्रवाल, हरिराम, मेलाराम, प्रेमदत्त, पूर्ण चंद, बोबी, बिमला देवी, रुक्मणी, भरत सिंह, कृष्ण कुमार, हरि प्रकाश, अजय कुमार, भीम सिंह और कपिल सहित दर्जनों विस्थापित मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया। संवाद
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-बांध प्रबंधन की खरीदी जमीनें पुनर्स्थापन और पुनर्वास के लिए उपयुक्त नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
संगड़ाह (सिरमौर)। श्री रेणुका बांध जन संघर्ष समिति की मासिक बैठक ददाहू स्थित किसान भवन में आयोजित हुई, जिसमें विस्थापन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष योगेंद्र कपिला, संयोजक प्रताप सिंह तोमर और महासचिव संजय चौहान ने की।
बैठक में डायवर्जन टनल निर्माण क्षेत्र के पास बसे नौ परिवारों को स्थान खाली करने के नोटिस का मामला प्रमुखता से उठा। सदस्यों ने बताया कि पहले जारी सूची में शामिल नौ परिवारों में से अब केवल दो को ही रखा गया है, जबकि अन्य को बाहर कर दिया गया है। इस फैसले को लेकर विस्थापितों और संघर्ष समिति में बांध प्रबंधन के खिलाफ गहरा रोष है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे न्यायालय का रुख करेंगे।
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इस संबंध में अधिवक्ता बृजेश सकलानी और जेएस कंवर को बैठक में आमंत्रित किया गया था, जिनके समक्ष विस्थापितों ने अपनी समस्याएं रखीं और न्यायालय में याचिका दायर करने की मांग की। विस्थापितों ने आरोप लगाया कि बांध प्रबंधन की ओर से खरीदी गई कई जमीनें पुनर्स्थापन और पुनर्वास के लिए उपयुक्त नहीं हैं। साथ ही इस मामले में सतर्कता विभाग की जांच लंबित होने पर भी नाराजगी जताई गई।
बैठक में राजेश कुमार, अनिल कुमार, राजेंद्र, टीका राम, बलमोहन, लक्ष्मी सिंह, दिनेश अग्रवाल, हरिराम, मेलाराम, प्रेमदत्त, पूर्ण चंद, बोबी, बिमला देवी, रुक्मणी, भरत सिंह, कृष्ण कुमार, हरि प्रकाश, अजय कुमार, भीम सिंह और कपिल सहित दर्जनों विस्थापित मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया। संवाद