{"_id":"6a3055d9739250e0ff093e47","slug":"devotees-overwhelmed-by-ganesh-janmotsav-incident-solan-news-c-176-1-sln1003-171705-2026-06-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Solan News: गणेश जन्मोत्सव प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Solan News: गणेश जन्मोत्सव प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
संवाद न्यूज़ एजेंसी
दाड़लाघाट (सोलन) पंचायत दाड़लाघाट स्थित श्री बाडूबाड़ा देव प्रांगण में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के नवम दिवस पर कथावाचक आचार्य हरि महाराज ने भगवान गणेश के जन्मोत्सव एवं प्रथम पूज्य बनने के दिव्य प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अपने प्रवचन में आचार्य हरि जी महाराज ने बताया कि माता पार्वती ने स्नान के समय अपने उबटन से एक बालक की रचना कर उसे द्वारपाल नियुक्त किया था। जब भगवान शिव वहां पहुंचे तो गणेश ने माता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्हें भीतर जाने से रोक दिया। इसके बाद हुए घटनाक्रम में भगवान शिव ने गणेश का सिर अलग कर दिया गया। माता पार्वती के विलाप और देवताओं के अनुरोध पर भगवान शिव ने हाथी का सिर लगाकर गणेश जी को पुनर्जीवित किया तथा उन्हें सभी देवताओं में प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया।
दाड़लाघाट (सोलन) पंचायत दाड़लाघाट स्थित श्री बाडूबाड़ा देव प्रांगण में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के नवम दिवस पर कथावाचक आचार्य हरि महाराज ने भगवान गणेश के जन्मोत्सव एवं प्रथम पूज्य बनने के दिव्य प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अपने प्रवचन में आचार्य हरि जी महाराज ने बताया कि माता पार्वती ने स्नान के समय अपने उबटन से एक बालक की रचना कर उसे द्वारपाल नियुक्त किया था। जब भगवान शिव वहां पहुंचे तो गणेश ने माता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्हें भीतर जाने से रोक दिया। इसके बाद हुए घटनाक्रम में भगवान शिव ने गणेश का सिर अलग कर दिया गया। माता पार्वती के विलाप और देवताओं के अनुरोध पर भगवान शिव ने हाथी का सिर लगाकर गणेश जी को पुनर्जीवित किया तथा उन्हें सभी देवताओं में प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया।