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Solan News: कथा के दौरान सुनाया ज्ञान, वैराग्य का कलियुग पर प्रभाव का प्रसंग
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कुनिहार के कुर्गन देव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान मौजूद भक्तगण।संवाद
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कुर्गन देव मंदिर कोठी में श्रीमद् भागवत पुराण का शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। श्री कुर्गन देव सेवा समिति कोठी की ओर से कुर्गन देव मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत महापुराण का शुभारंभ किया गया। कथा के प्रथम दिवस पर कथा व्यास आचार्य हेमंत भारती ने अपने मुखारविंद ने ज्ञान और वैराग्य के प्रसंग को विस्तार से सुनाया। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव जीवन को दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान है, जो व्यक्ति को सत्य, धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कथा के दौरान आचार्य ने बताया कि भक्ति माता के दो पुत्र ज्ञान और वैराग्य सतयुग, त्रेतायुग और द्वापर युग में अत्यंत प्रभावशाली और तेजस्वी थे। उस समय समाज में धर्म, सत्य और सदाचार का बोलबाला था। जिसके कारण ज्ञान और वैराग्य का विशेष सम्मान होता था। लेकिन जैसे-जैसे कलियुग का प्रभाव बढ़ा मनुष्य भौतिकता लोभ मोह और अहंकार में उलझता चला गया। परिणामस्वरूप ज्ञान और वैराग्य कमजोर होकर वृद्ध और आसक्त हो गए।
उन्होंने आगे बताया कि जब देवर्षि नारद मुनि ने भक्ति माता को दुखी अवस्था में देखा और उनके दोनों पुत्रों को अचेत समान पाया तो वे अत्यंत व्यथित हुए। उन्हें जागृत करने के लिए नारद मुनि ने वेदों का पाठ यज्ञ और उपदेश जैसे अनेक प्रयास किए। लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। अंततः यह निष्कर्ष निकला कि श्रद्धा और भक्ति के साथ श्रीमद् भागवत महापुराण का श्रवण ही ज्ञान और वैराग्य को पुनः जागृत करने का एकमात्र उपाय है। समिति के प्रधान ललित ठाकुर ने बताया कि कथा 16 अप्रैल तक चलेगी। प्रतिदिन दोपहर 1:00 से 4:00 बजे तक कथा प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा सायं 4:00 बजे से प्रसाद वितरण व भंडारा और रात्रि 8:00 से 9:00 बजे तक संध्या आरती एवं संकीर्तन का आयोजन होगा।
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कुनिहार(सोलन)। श्री कुर्गन देव सेवा समिति कोठी की ओर से कुर्गन देव मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत महापुराण का शुभारंभ किया गया। कथा के प्रथम दिवस पर कथा व्यास आचार्य हेमंत भारती ने अपने मुखारविंद ने ज्ञान और वैराग्य के प्रसंग को विस्तार से सुनाया। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव जीवन को दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान है, जो व्यक्ति को सत्य, धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कथा के दौरान आचार्य ने बताया कि भक्ति माता के दो पुत्र ज्ञान और वैराग्य सतयुग, त्रेतायुग और द्वापर युग में अत्यंत प्रभावशाली और तेजस्वी थे। उस समय समाज में धर्म, सत्य और सदाचार का बोलबाला था। जिसके कारण ज्ञान और वैराग्य का विशेष सम्मान होता था। लेकिन जैसे-जैसे कलियुग का प्रभाव बढ़ा मनुष्य भौतिकता लोभ मोह और अहंकार में उलझता चला गया। परिणामस्वरूप ज्ञान और वैराग्य कमजोर होकर वृद्ध और आसक्त हो गए।
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उन्होंने आगे बताया कि जब देवर्षि नारद मुनि ने भक्ति माता को दुखी अवस्था में देखा और उनके दोनों पुत्रों को अचेत समान पाया तो वे अत्यंत व्यथित हुए। उन्हें जागृत करने के लिए नारद मुनि ने वेदों का पाठ यज्ञ और उपदेश जैसे अनेक प्रयास किए। लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। अंततः यह निष्कर्ष निकला कि श्रद्धा और भक्ति के साथ श्रीमद् भागवत महापुराण का श्रवण ही ज्ञान और वैराग्य को पुनः जागृत करने का एकमात्र उपाय है। समिति के प्रधान ललित ठाकुर ने बताया कि कथा 16 अप्रैल तक चलेगी। प्रतिदिन दोपहर 1:00 से 4:00 बजे तक कथा प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा सायं 4:00 बजे से प्रसाद वितरण व भंडारा और रात्रि 8:00 से 9:00 बजे तक संध्या आरती एवं संकीर्तन का आयोजन होगा।