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Solan News: कथा में श्रीकृष्ण जन्म, बाल लीलाओं व कंस वध का किया वर्णन
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मलपुर में आयोजित भागवत कथा के समापन पर आरती में भाग लेते हुए ग्रामीण -संवाद।
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बद्दी (सोलन)। मलपुर शिव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा वाचक नरोत्तमपुरी ने कंस वध व भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। कथा वाचक ने बताया कि कंस अपनी बहन देवकी से बहुत प्यार करता था। जब उसने देवकी का विवाह वासुदेव से किया तो उसे आकाशवाणी हुई कि तेरी बहन देवकी की आठवीं संतान तेरी मृत्यु का कारण बनेगी।
इस पर वह भयभीत हो गया और उसी समय तलवार निकाली और देवकी को हत्या करने लगा जिस पर वासुदेव ने उसे उसकी जीवन की भीख मांगते हुए कहा कि अब यह मेरी पत्नी है। जो भी इसकी आठवीं संतान होगी उसे मार देना। कंस ने फिरदोनों का कारागार में बंद कर दिया। उसके बाद पहरा लगा दिया। कंस देवकी की एक-एक करके सभी संतानों को मारने लगा। उसने अपने पिता अग्रसेन को भी कैद में डाल दिया और स्वयं राजा बन गया।
जब देवकी की आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण हुए तो सभी पहरेदार सो गए और स्वयं कारागार के दरवाजे खुल गए। अचानक बेड़ियां हटने से वासुदेव भगवान कृष्ण को नंदबाबा के घर छोड़ आए और वहां पर यशोदा माता के बेटी को लेकर वापिस कारागार में पहुंचे जैसे ही बच्ची ने रोने की आवाज की तो पहरेदार जाग गए और कंस तलवार लेकर बच्ची को मारने आया लेकिन जैसे ही उसने हाथ पर उसे उठाया तो वह आकाश की ओर उड़ गई और जाते समय बताया कि उसे मारने वाले गोकुल में पैदा हुआ है। संवाद
जिस पर कंस ने सभी बच्चों को मारने की योजना बनाई। पुतना को भेजा और पुतना जैसे ही भगवान को दूध पलाने लगी तो भगवान से उनके प्राण की निकाल दिए और उसे मां की उपाधि देकर मोक्ष दिया। जब वह थोड़े बड़े हुए तो अक्रूर को भेजकर श्रीकृष्ण व बलराम को मथुरा बुलाया और दोनों भाईयों को पहले मल युद्ध कराया। कई प्रकार की युद्ध कराए लेकिन भगवान हमेशा सबको पराजित करते हुए कंस को पकड़ कर ले गए उसे मौत के घाट उतार दिया। उसके बाद उन्होंने अपने माता पिता को आजाद कराया और अपने नाना उग्रसेन को मथुरा का राजा बनाया। इस मौके पर तहसीलदार हुसन चंद, रामलाल चौधरी, सुरेश चौधरी, डीआर चंदेल, पूर्व प्रधान नसीब सैणी, कृष्ण कौशल, महेश कौशल, श्याम चौधरी समेत गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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इस पर वह भयभीत हो गया और उसी समय तलवार निकाली और देवकी को हत्या करने लगा जिस पर वासुदेव ने उसे उसकी जीवन की भीख मांगते हुए कहा कि अब यह मेरी पत्नी है। जो भी इसकी आठवीं संतान होगी उसे मार देना। कंस ने फिरदोनों का कारागार में बंद कर दिया। उसके बाद पहरा लगा दिया। कंस देवकी की एक-एक करके सभी संतानों को मारने लगा। उसने अपने पिता अग्रसेन को भी कैद में डाल दिया और स्वयं राजा बन गया।
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जब देवकी की आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण हुए तो सभी पहरेदार सो गए और स्वयं कारागार के दरवाजे खुल गए। अचानक बेड़ियां हटने से वासुदेव भगवान कृष्ण को नंदबाबा के घर छोड़ आए और वहां पर यशोदा माता के बेटी को लेकर वापिस कारागार में पहुंचे जैसे ही बच्ची ने रोने की आवाज की तो पहरेदार जाग गए और कंस तलवार लेकर बच्ची को मारने आया लेकिन जैसे ही उसने हाथ पर उसे उठाया तो वह आकाश की ओर उड़ गई और जाते समय बताया कि उसे मारने वाले गोकुल में पैदा हुआ है। संवाद
जिस पर कंस ने सभी बच्चों को मारने की योजना बनाई। पुतना को भेजा और पुतना जैसे ही भगवान को दूध पलाने लगी तो भगवान से उनके प्राण की निकाल दिए और उसे मां की उपाधि देकर मोक्ष दिया। जब वह थोड़े बड़े हुए तो अक्रूर को भेजकर श्रीकृष्ण व बलराम को मथुरा बुलाया और दोनों भाईयों को पहले मल युद्ध कराया। कई प्रकार की युद्ध कराए लेकिन भगवान हमेशा सबको पराजित करते हुए कंस को पकड़ कर ले गए उसे मौत के घाट उतार दिया। उसके बाद उन्होंने अपने माता पिता को आजाद कराया और अपने नाना उग्रसेन को मथुरा का राजा बनाया। इस मौके पर तहसीलदार हुसन चंद, रामलाल चौधरी, सुरेश चौधरी, डीआर चंदेल, पूर्व प्रधान नसीब सैणी, कृष्ण कौशल, महेश कौशल, श्याम चौधरी समेत गणमान्य लोग उपस्थित रहे।