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Solan News: कवि गोष्ठी में गूंजे राष्ट्रभक्ति के तराने
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अखिल भरतीय साहित्य परिषद ने किया गोष्ठी का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला सोलन इकाई की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें कुटुंब प्रबोधन विषय पर विचार-विमर्श के साथ वंदे मातरम शताब्दी के उपलक्ष्य में कवि गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष ज्ञान शर्मा ने की, जबकि मंच संचालन मीरा तनवर ने किया। मुख्य अतिथि गोपाल शर्मा और विशिष्ट अतिथि पुरुषोत्तम मौजूद रहे।
प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. अजय शर्मा ने कुटुंब प्रबोधन और वंदे मातरम के 100 वर्ष विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुटुंब भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। जहां से व्यक्ति को संस्कार, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा मिलती है। बदलते सामाजिक परिवेश में परिवार संस्था को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
उन्होंने वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए इसे स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बताया। कहा कि यह गीत आज भी देशभक्ति की भावना को जागृत करने में सक्षम है। मुख्यातिथि गोपाल शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को दिशा देने के साथ युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं। विशिष्ट अतिथि पुरुषोत्तम ने परिषद के प्रयासों को सराहनीय बताते हुए इसे राष्ट्रहित में एक सशक्त पहल बताया।
दूसरे सत्र में आयोजित कवि गोष्ठी में साहित्यकारों ने देशभक्ति, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत कविताओं का पाठ किया। दीनानाथ शर्मा, अजय, हीरा दत्त, शीला, राजीव, मोनिका और मीरा सहित कई कवियों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला सोलन इकाई की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें कुटुंब प्रबोधन विषय पर विचार-विमर्श के साथ वंदे मातरम शताब्दी के उपलक्ष्य में कवि गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष ज्ञान शर्मा ने की, जबकि मंच संचालन मीरा तनवर ने किया। मुख्य अतिथि गोपाल शर्मा और विशिष्ट अतिथि पुरुषोत्तम मौजूद रहे।
प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. अजय शर्मा ने कुटुंब प्रबोधन और वंदे मातरम के 100 वर्ष विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुटुंब भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। जहां से व्यक्ति को संस्कार, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा मिलती है। बदलते सामाजिक परिवेश में परिवार संस्था को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
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उन्होंने वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए इसे स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बताया। कहा कि यह गीत आज भी देशभक्ति की भावना को जागृत करने में सक्षम है। मुख्यातिथि गोपाल शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को दिशा देने के साथ युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं। विशिष्ट अतिथि पुरुषोत्तम ने परिषद के प्रयासों को सराहनीय बताते हुए इसे राष्ट्रहित में एक सशक्त पहल बताया।
दूसरे सत्र में आयोजित कवि गोष्ठी में साहित्यकारों ने देशभक्ति, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत कविताओं का पाठ किया। दीनानाथ शर्मा, अजय, हीरा दत्त, शीला, राजीव, मोनिका और मीरा सहित कई कवियों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।