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Solan News: मजदूरों ने श्रम कार्यालय संडोली में दिया धरना
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कंपनी पर समझौते के उल्लंघन का आरोप
श्रम अधिकारी ने केस को सुनवाई के लिए आयुक्त के पास भेजा
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। दवा कंपनी संडोली के कामगारों ने श्रम कार्यालय संडोली परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। कामगारों का आरोप था कि श्रम आयुक्त द्वारा कराया समझौता कंपनी की ओर से निर्धारित नियम और शर्तों के अनुसार लागू नहीं किया जा रहा है। कामगारों ने कोर्ट जाने की बजाय इस मामले को दोबारा आयुक्त के पास भेजने की मांग की जिसे श्रम अधिकारी ने स्वीकार कर लिया है। दवा कंपनी के कामगारों ने यह धरना वर्ष 2022 में कंपनी को दूसरे संचालक को बेचने के बाद उत्पन्न हुए विवाद को लेकर किया।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 में पुरानी कंपनी के संचालकों ने अपनी कंपनी को एचएफएल को बेच दिया था। यहां कार्यरत कामगारों को नई कंपनी ने कार्यभार संभालते ही बाहर कर दिया। इसके विरोध में करीब दो वर्षों तक चले आंदोलन के बाद लेबर कमिश्नर शिमला के समक्ष त्रिपक्षीय समझौता हुआ था। मजदूरों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन समझौते को पूरी तरह लागू नहीं कर रहा है और लगातार उसकी अनदेखी कर रहा है।
मजदूरों ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने लेबर कार्यालय संडोली में लगभग एक वर्ष पहले शिकायत दर्ज करवाई थी। इस पर लगातार वार्ता भी हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने लेबर कार्यालय और प्रबंधन के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे मजदूरों का शोषण लगातार बढ़ रहा है। धरने के दौरान वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही समझौते को लागू नहीं किया गया, तो मजदूर ट्रेड यूनियन एक्ट के तहत अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।
इस धरने में सीटू के जिला महासचिव मोहित वर्मा, जिला उपप्रधान दलजीत सहित रेकिट वर्कर यूनियन के प्रधान सीताराम, उपप्रधान नीरज कुमार, महासचिव विकास कुमार, सहसचिव देवेंद्र कुमार, कोषाध्यक्ष शिव कुमार और कार्यकारिणी सदस्य दीप और अनिल भी उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। दवा कंपनी संडोली के कामगारों ने श्रम कार्यालय संडोली परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। कामगारों का आरोप था कि श्रम आयुक्त द्वारा कराया समझौता कंपनी की ओर से निर्धारित नियम और शर्तों के अनुसार लागू नहीं किया जा रहा है। कामगारों ने कोर्ट जाने की बजाय इस मामले को दोबारा आयुक्त के पास भेजने की मांग की जिसे श्रम अधिकारी ने स्वीकार कर लिया है। दवा कंपनी के कामगारों ने यह धरना वर्ष 2022 में कंपनी को दूसरे संचालक को बेचने के बाद उत्पन्न हुए विवाद को लेकर किया।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 में पुरानी कंपनी के संचालकों ने अपनी कंपनी को एचएफएल को बेच दिया था। यहां कार्यरत कामगारों को नई कंपनी ने कार्यभार संभालते ही बाहर कर दिया। इसके विरोध में करीब दो वर्षों तक चले आंदोलन के बाद लेबर कमिश्नर शिमला के समक्ष त्रिपक्षीय समझौता हुआ था। मजदूरों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन समझौते को पूरी तरह लागू नहीं कर रहा है और लगातार उसकी अनदेखी कर रहा है।
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मजदूरों ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने लेबर कार्यालय संडोली में लगभग एक वर्ष पहले शिकायत दर्ज करवाई थी। इस पर लगातार वार्ता भी हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने लेबर कार्यालय और प्रबंधन के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे मजदूरों का शोषण लगातार बढ़ रहा है। धरने के दौरान वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही समझौते को लागू नहीं किया गया, तो मजदूर ट्रेड यूनियन एक्ट के तहत अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।
इस धरने में सीटू के जिला महासचिव मोहित वर्मा, जिला उपप्रधान दलजीत सहित रेकिट वर्कर यूनियन के प्रधान सीताराम, उपप्रधान नीरज कुमार, महासचिव विकास कुमार, सहसचिव देवेंद्र कुमार, कोषाध्यक्ष शिव कुमार और कार्यकारिणी सदस्य दीप और अनिल भी उपस्थित रहे।