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Una News: दुलैहड़ बाजार के 80 फीसदी दुकानदार पंचायत को नहीं देते किराया

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Feb 2026 12:38 AM IST
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80% of the shopkeepers in Dulahad Bazaar do not pay rent to the Panchayat.
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दुलैहड़ ग्राम पंचायत के अधीन बनी हैं 120 से अधिक दुकानें

पंचायत ने बनाकर दिए थे प्लॉट, दुकानों का निर्माण करने के बाद नहीं दिया किराया

कई दुकानदारों ने दुकानों को दो हजार से तीन हजार में कर रखा है सबलेट
संवाद न्यूज एजेंसी
दुलैहड़ (ऊना)। हरोली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत दुलैहड़ की ओर से आवंटित दुकानों का किराया आज तक अधिकांश दुकानदारों की ओर से अदा नहीं किया गया है। स्थिति यह है कि दुलैहड़ बाजार में करीब 120 दुकानदार पंचायत की ओर से अलॉट किए गए प्लॉटों पर अपनी दुकानदारी चला रहे हैं, लेकिन इसके बदले पंचायत को एक पैसा तक किराया नहीं मिला है। पंचायत की ओर से करीब 25 वर्ष पहले जगह चिह्नित कर दुकानदारों को प्लॉट आवंटित किए गए थे। उस समय यह स्पष्ट शर्त तय हुई थी कि दुकानदार अपने स्तर पर दुकान का निर्माण करेंगे और बदले में पंचायत की ओर से समय-समय पर तय किया गया मासिक किराया चुकता करेंगे। शुरुआती दौर में यह किराया 10 रुपये प्रति माह निर्धारित किया गया था, जो वर्तमान में बढ़कर 200 रुपये प्रति माह तक पहुंच चुका है।


इसके बावजूद आज दिन तक 80 फीसदी से अधिक दुकानदारों ने किराया अदा नहीं किया है। हैरानी की बात यह है कि कई दुकानदारों ने इन दुकानों को आगे 2000 से 3000 रुपये प्रति माह के हिसाब से सबलेट तक कर दिया है, जबकि ग्राम पंचायत को किराए के रूप में अब तक कोई भुगतान नहीं किया गया। किराया वसूलने के मामले में पंचायत की ओर से भी अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है, जिसके चलते यह समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
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ग्राम पंचायत दुलैहड़ के प्रधान नंद किशोर ने बताया कि पंचायत की ओर से दुकानदारों को कई बार तय किराया चुकता करने के लिए कहा गया है, लेकिन अधिकतर दुकानदारों ने अभी तक भुगतान नहीं किया है। हालांकि कुछ दुकानदार नियमित रूप से किराया देने में रुचि दिखा रहे हैं।
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उप-प्रधान पवन राणा ने कहा कि 80 फीसदी से अधिक दुकानदारों ने आज तक दुकानों का किराया नहीं दिया है। आरोप लगाया कि कई दुकानदारों ने दुकानों को 2000 से 3000 रुपये प्रति माह में आगे सबलेट कर रखा है। जल्द ही इस मुद्दे को लेकर प्रशासन और सरकार से चर्चा कर आगामी रणनीति तैयार की जाएगी, ताकि किराया नियमित रूप से वसूला जा सके और पंचायत के विकास कार्यों में उसका उपयोग किया जा सके।
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