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Uddhav Thackeray: 'कुछ लोग ठाकरे का नाम मिटाने की ताक में, मंसूबे सफल नहीं होंगे'; पूर्व CM धनबल पर भी बोले

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 24 Jan 2026 09:26 AM IST
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सार

Uddhav Thackeray: बीएमसी चुनाव में हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) केवल एक सियासी पार्टी नहीं, बल्कि एक विचार है और भाजपा इसे खत्म नहीं कर सकती। उन्होंने बाल ठाकरे की जन्मशती पर पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि ठाकरे नाम को मिटाने की कोशिशें की जा रही हैं। उद्धव ठाकरे ने क्या कहा, पढ़िए-

Balasaheb centenary year Uddhav says Many trying to erase Thackeray Name Maharashtra civic polls Money power
पिता की जन्मशताब्दी पर आयोजित समारोह में बोले महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव में हार का सामना करने के कुछ दिनों बाद शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यह सोच रही है कि वह उनकी पार्टी को खत्म कर सकती है, तो यह उसकी बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) केवल एक राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि एक विचार है।
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अपने पिता और शिवसेना (अविभाजित) के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे की जन्मशती के मौके पर शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कई लोग ठाकरे नाम को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं हो पाएगा।
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उद्धव से पहले मंच पर बोलते हुए उनके चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि राज्य की राजनीतिक स्थिति 'गुलामों के बाजार' जैसी है। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम समेत हाल के निकाय चुनावों को लेकर उन्होंने कहा कि राज्य में 'नीलामी' चल रही है। उद्धव ने कहा, अगर भाजपा यह सोचती है कि वह शिवसेना (यूबीटी) को खत्म कर देगी, तो वह गलत है। शिवसेना (यूबीटी) कोई पार्टी नहीं, बल्कि एक विचार है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर शिवसेना नहीं होती, तो भाजपा कभी भी बीएमसी या राज्य सरकार के मुख्यालय 'मंत्रालय' के अंदर तक नहीं पहुंच पाती।

बीएमसी चुनाव में गठबंधन का कितना असर रहा?
उनकी यह टिप्पणी 15 जनवरी को हुए बीएमसी चुनाव के बाद आई है। इन चुनावों में भाजपा ने 227 में से 89 सीट पर जीत दर्ज की और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (29 सीट) के साथ गठबंधन में भाजपा ने देश की सबसे अमीर नगर निगम पर ठाकरे परिवार का दशकों पुराना नियंत्रण खत्म कर दिया। बीएमसी चुनाव में शिवसेना (यूबीटी)-मनसे गठबंधन ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। लेकिन वह भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को बहुमत हासिल करने से नहीं रोक सका। शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीतीं, जबकि राज ठाकरे की मनसे को छह सीटें मिलीं।

नतीजों पर उद्धव ठाकरे ने क्या कहा?
  • पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा और उसके गठबंधन वाले मुंबई को 'निगलना' चाहते हैं।
  • उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम चुनाव में पहली बार बड़े पैमाने पर धनबल का इस्तेमाल हुआ।
  • उन्होंने कहा कि बीएमसी के नतीजे पार्टी की उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। इसके बावजूद नगर निगम में विपक्ष एक मजबूत ताकत के रूप में उभरा।
  • उद्धव ने कहा कि विपक्ष को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जैसे मतदाता सूची में खामियां।
  • उन्होंने दावा किया कि अगर शिवसेना (यूबीटी) ने दोहरे मतदाताओं की पहचान नहीं की होती, तो नतीजे और भी अलग होते।


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हिंदी को अनिवार्य करने वाले फैसले पर क्या कहा?
उन्होंने कहा, हमें नए सिरे से शुरुआत करनी होगी। उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना सत्ता के लिए नहीं, बल्कि मराठी मानुष के अधिकारों की लड़ाई के लिए बनी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र पर गैर-मराठी संस्कृति थोपने की कोशिशें की जा रही हैं और पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य करने का फैसला इसी साजिश का हिस्सा था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया,। उन्होंने कहा कि शिवसेना कार्यकर्ताओं की ओर आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला नारा 'जय महाराष्ट्र' खतरे में है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे इसे अभिवादन के रूप में इस्तेमाल करें।

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