आंबेडकर का नाम नहीं लेने पर विवाद: महाजन ने मांगी माफी, फिर भी लिखित माफी की मांग पर अड़ी वन विभाग कर्मचारी
गणतंत्र दिवस भाषण में डॉ. आंबेडकर का नाम न लेने पर मंत्री गिरीश महाजन विवादों में हैं। वन विभाग की कर्मचारी माधवी जाधव ने मौखिक माफी ठुकराते हुए लिखित माफी की मांग की है। महाजन ने इसे अनजाने की भूल बताया।
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गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर दिए गए भाषण ने महाराष्ट्र की राजनीति में विवाद खड़ा कर दिया है। जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन पर आरोप है कि उन्होंने अपने भाषण में डॉ. भीमराव आंबेडकर का नाम नहीं लिया। इस पर वन विभाग की कर्मचारी माधवी जाधव ने कड़ा विरोध जताते हुए मंत्री से लिखित माफी की मांग की है, जिसके बाद मामला अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले चुका है।
बता दें कि यह घटना सोमवार को नासिक में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान हुई। जब गिरीश महाजन भाषण दे रहे थे, उसी दौरान माधवी जाधव ने आपत्ति जताई। इसके बाद महाजन ने सफाई देते हुए कहा कि डॉ. आंबेडकर का नाम न लेना अनजाने में हुई भूल थी और उन्होंने माफी भी मांगी।
माफी से संतुष्ट नहीं हुई माधवी जाधव
हालांकि, माधवी जाधव इससे संतुष्ट नहीं हुईं। उन्होंने कहा कि सिर्फ मौखिक माफी काफी नहीं है और मंत्री को लिखित रूप में माफी मांगनी चाहिए। जाधव ने मंगलवार को कहा कि यह गिरीश महाजन की किस्मत और मेरी बदकिस्मती है कि इस मामले में एट्रोसिटी एक्ट लागू नहीं होता।
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महाजन की दलील को किया खारिज
उन्होंने मंत्री की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि यह भूल अनजाने में हुई। जाधव का कहना है कि महाजन ने अपने भाषण में छत्रपति शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज का नाम लिया, लेकिन संविधान निर्माता डॉ. आंबेडकर का नाम जानबूझकर छोड़ दिया।
माधवी जाधव ने मांग की कि गिरीश महाजन को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के सभी अनुयायियों से लिखित माफी मांगनी चाहिए। इस मामले के बाद उन्होंने नासिक के सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में आवेदन देकर महाजन के खिलाफ अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की मांग भी की है। इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है और मंत्री की आलोचना की है।
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गिरीश महाजन ने फिर जताया खेद
वहीं, गिरीश महाजन ने मंगलवार को फिर से खेद जताया। उन्होंने कहा कि इस पर कोई दो राय नहीं है। कोई भी अपनी मांग रख सकता है। मैंने कल भी सफाई दी थी। भाषण के बाद मुझे इस हंगामे की जानकारी मिली। मेरा किसी की भावना को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। मैं भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का बहुत सम्मान करता हूं और इस घटना के लिए माफी मांगता हूं।
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