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बढ़ती महंगाई और भविष्य की चिंता: वैश्विक तनाव से भारत में महंगाई की आहट, आम आदमी पर बढ़ता बोझ
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सार
पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते दुनिया भर में बढ़ी महंगाई भारत में अमेरिका सहित कई देशों की तुलना में भले ही कम हो, पर इसका असर अर्थव्यवस्था व आम आदमी पर दिखाई देने लगा है।
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पश्चिम एशिया संघर्ष
- फोटो :
ANI
विस्तार
पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, माल ढुलाई के महंगा होने और तेल आपूर्ति बाधाओं के कारण दुनिया के साथ-साथ भारत में भी महंगाई बढ़ रही है। यद्यपि, भारत में महंगाई अमेरिका सहित दुनिया के अधिकांश देशों की तुलना में बहुत कम है, पर इसका असर भारत की आर्थिकी और आम आदमी पर दिखाई देने लगा है। हाल ही में, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई, जो फरवरी में 3.21 प्रतिशत थी।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह 3.63 प्रतिशत, जबकि शहरी क्षेत्रों में 3.11 प्रतिशत रिकॉर्ड की गई है। इसी प्रकार, मार्च 2026 में थोक महंगाई दर बढ़कर 3.88 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई, जो फरवरी में 2.13 प्रतिशत थी। थोक मूल्य की यह महंगाई 38 महीने के उच्चतम स्तर पर है। निस्संदेह खाड़ी देशों से आयातित कच्चे माल के महंगे होने और ईंधन, बिजली व गैस की कीमतों में वृद्धि से आम आदमी के जीवन से जुड़ी वस्तुएं महंगी हुई हैं। महंगाई बढ़ने की एक चिंता यह भी है कि हाल ही में भारतीय मौसम विभाग ने अल नीनो के कारण 2026 में सामान्य से कम मानसून का अनुमान लगाया है, जिससे कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर असर पड़ सकता है।
दलहन और तिलहन जैसी फसलों का कम उत्पादन खाद्य मुद्रास्फीति पर असर डाल सकता है। ऐसे में, महंगाई नियंत्रण के लिए राहत और सुधारों को तेजी से लागू करने की बहुआयामी रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पश्चिम एशिया में युद्ध और ऊर्जा कीमतों व आपूर्ति बाधाओं के कारण भारत में विकास दर धीमी हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है। मूडीज ने चालू वित्त वर्ष में औसत महंगाई दर 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जो 2025-26 के 2.4 प्रतिशत से अधिक है। ऐसे में, महंगाई दर के भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित चार प्रतिशत के लक्ष्य दायरे से ऊपर जाना चुनौतीपूर्ण होगा।
निस्संदेह सरकार द्वारा महंगाई नियंत्रण के लिए की गई विभिन्न आर्थिक और कूटनीतिक पहलों के लाभ मिले हैं। इस समय भारत के पास विशाल खाद्यान्न भंडार और जरूरत की दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक आर्थिक अनुकूलताओं के रूप में दिखाई दे रहा है। भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार तो हैं ही, महंगाई से निपटने के लिए 697 अरब डॉलर से अधिक के विदेशी मुद्रा कोष की शक्ति भी है। उम्मीद करें कि सरकार अमेरिका-इस्राइल और ईरान टकराव के बीच महंगाई नियंत्रण के लिए और अधिक रणनीतिक कदमों के साथ आगे बढ़ेगी।
कच्चे तेल के लिए रूस और वेनेजुएला से आपूर्ति और बढ़ाई जाएगी। खाद्य तेल के आयात शुल्क में कमी सहित उर्वरकों की उपयुक्त आपूर्ति के लिए दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ा जाएगा। रिजर्व बैंक द्वारा आवश्यक होने पर मौद्रिक नीति सख्त करते हुए वर्तमान 5.25 प्रतिशत की नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) को बढ़ाया जाएगा। सरकार द्वारा कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को कड़ाई से लागू किया जाएगा।

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