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Kathua News: सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से लखनपुर से कठुआ तक लगे कचरे के ढेर
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शहर के पुराने बस स्टैंड पर लगा कचरे का ढेर। संवाद
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कठुआ। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब पूरे जिले में दिखने लगा है। प्रदेश के प्रवेश द्वार लखनपुर से कठुआ नगर परिषद के सभी 21 वार्डों तक जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इसके चलते आमजन के साथ-साथ व्यापारी वर्ग और बाहर से आने वाले पर्यटक भी परेशान हैं।
लखनपुर में मुख्य मार्गों और बाजार में कचरा जमा हो गया है। सड़क से गुजरने वाले दुर्गंध के चलते परेशान रहते हैं। नाक पर रूमाल रखकर लोग आ-जा रहे हैं। स्थानीय निवासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि हड़ताल लंबी खिंचने के कारण कस्बे की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक और यात्री अब यहां रुकने से कतराने लगे हैं। गंदगी और दुर्गंध के कारण होटल, ढाबों और अन्य कारोबारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आगामी अमरनाथ यात्रा और पर्यटन सीजन के दौरान भी व्यापार प्रभावित हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। उधर, कठुआ शहर में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में कचरे बजबजा रहे हैं। बढ़ती गंदगी से लोगों को दुर्गंध और संक्रमण फैलने की आशंका सताने लगी है। कुछ स्थानों पर लोग कचरे को जला रहे हैं।
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स्थानीय निवासी कौशल शर्मा ने शहर की इस स्थिति के लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी के अनुपात में सफाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त स्थायी सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए थी, लेकिन व्यवस्था लंबे समय से अस्थायी कर्मचारियों के सहारे चल रही है।
उन्होंने कहा कि नगर परिषद में स्वीकृत स्थायी पदों को भी नहीं भरा जा रहा है, जिससे सफाई व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। कौशल शर्मा ने मांग की कि अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए, ताकि कर्मचारियों को भविष्य की सुरक्षा मिले और सफाई व्यवस्था भी सुचारु रूप से संचालित हो सके। शहरवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही हड़ताल समाप्त नहीं हुई और कचरे का उठाव शुरू नहीं हुआ तो बरसात के मौसम में हालात और गंभीर हो सकते हैं। गंदगी के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है।
लखनपुर में मुख्य मार्गों और बाजार में कचरा जमा हो गया है। सड़क से गुजरने वाले दुर्गंध के चलते परेशान रहते हैं। नाक पर रूमाल रखकर लोग आ-जा रहे हैं। स्थानीय निवासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि हड़ताल लंबी खिंचने के कारण कस्बे की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक और यात्री अब यहां रुकने से कतराने लगे हैं। गंदगी और दुर्गंध के कारण होटल, ढाबों और अन्य कारोबारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आगामी अमरनाथ यात्रा और पर्यटन सीजन के दौरान भी व्यापार प्रभावित हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। उधर, कठुआ शहर में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में कचरे बजबजा रहे हैं। बढ़ती गंदगी से लोगों को दुर्गंध और संक्रमण फैलने की आशंका सताने लगी है। कुछ स्थानों पर लोग कचरे को जला रहे हैं।
स्थानीय निवासी कौशल शर्मा ने शहर की इस स्थिति के लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी के अनुपात में सफाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त स्थायी सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए थी, लेकिन व्यवस्था लंबे समय से अस्थायी कर्मचारियों के सहारे चल रही है।
उन्होंने कहा कि नगर परिषद में स्वीकृत स्थायी पदों को भी नहीं भरा जा रहा है, जिससे सफाई व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। कौशल शर्मा ने मांग की कि अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए, ताकि कर्मचारियों को भविष्य की सुरक्षा मिले और सफाई व्यवस्था भी सुचारु रूप से संचालित हो सके। शहरवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही हड़ताल समाप्त नहीं हुई और कचरे का उठाव शुरू नहीं हुआ तो बरसात के मौसम में हालात और गंभीर हो सकते हैं। गंदगी के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है।