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Kathua News: बनी में डेढ़ करोड़ की लागत से फ्रूट मंडी तैयार, किसान अब भी निजी बाजारों पर निर्भर

Wed, 01 Jul 2026 02:05 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Wed, 01 Jul 2026 02:05 AM IST
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करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज तक इस मंडी का संचालन शुरू नहीं हो पाया
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हाफिज कुरैशी
बनी। पहाड़ी क्षेत्र बनी में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से निर्मित फ्रूट एंड वेजिटेबल मंडी वर्षों पहले बनकर तैयार हो चुकी है। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है। विडंबना यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज तक इस मंडी का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। नतीजतन यह महत्वाकांक्षी परियोजना शोपीस बनकर रह गई है। क्षेत्र के किसान आज भी अपनी उपज बेचने के लिए दूसरे बाजारों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।

बनी कृषि एवं बागवानी की अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र माना जाता है। बीते कुछ वर्षों में यहां एग्रीकल्चर और हॉर्टिकल्चर के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है। आधुनिक खेती और सरकारी योजनाओं के चलते किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ नकदी फसलों और बागवानी की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। क्षेत्र में पहाड़ी लहसुन, प्याज, आलू, राजमा, टमाटर, मटर सहित विभिन्न मौसमी सब्जियों के अलावा सेब, नाशपाती, अखरोट और अन्य फलों का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।
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इसके बावजूद किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी उपज की मार्केटिंग है। स्थानीय मंडी उपलब्ध न होने के कारण उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए दूर-दराज की मंडियों का रुख करना पड़ता है। परिवहन पर अतिरिक्त खर्च, समय की बर्बादी और उचित दाम न मिलने से किसानों की आय प्रभावित होती है। कई बार बिचौलियों के कारण भी किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पाता।
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स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि बनी की अपनी फ्रूट एवं वेजिटेबल मंडी को जल्द शुरू कर दिया जाए तो क्षेत्र के किसान सीधे अपनी उपज यहां बेच सकेंगे। इससे उन्हें उचित मूल्य मिलेगा। परिवहन लागत कम होगी और बाहरी व्यापारियों को भी बनी क्षेत्र में आकर खरीदारी करने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

रियाज अहमद ने बताया कि इस साल मैंने अपना घरेलू लहसुन ही नहीं, बल्कि आसपास के किसानों से भी लहसुन खरीदकर बेचा। बनी में कोई स्थानीय फ्रूट या सब्जी मंडी चालू नहीं होने के कारण मुझे अपनी उपज बेचने के लिए पहले लगभग 90 किलोमीटर दूर बसोहली जाना पड़ा और बाद में 150 किलोमीटर दूर पठानकोट मंडी तक पहुंचना पड़ा। इससे परिवहन पर काफी खर्च आया और समय भी बर्बाद हुआ। यदि बनी की अपनी फ्रूट एवं वेजिटेबल मंडी शुरू हो जाए तो स्थानीय किसानों को अपनी उपज यहीं बेचने की सुविधा मिलेगी। इससे बेहतर दाम मिलेंगे और दूर-दराज की मंडियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे क्षेत्र के किसानों की आय भी बढ़ेगी और खेती के प्रति उनका उत्साह भी बढ़ेगा।


स्थानीय लोगों और किसान संगठनों ने प्रशासन तथा संबंधित विभाग से मांग की है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस मंडी को जल्द से जल्द चालू किया जाए। इसका वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए। उनका कहना है कि जब सरकार कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने की बात कर रही है, तब बनी जैसी उत्पादन क्षमता वाले क्षेत्र में तैयार पड़ी मंडी का वर्षों तक बंद रहना चिंता का विषय है।


गत्ती निवासी सुशील कुमार ने बताया कि बनी में अपनी फ्रूट एवं वेजिटेबल मंडी की घोषणा वर्ष 2013 में तत्कालीन मंत्री रमन भल्ला ने किसान मेले के दौरान की थी। इसके बाद मंडी का निर्माण कार्य शुरू हुआ और वर्ष 2024 में यह बनकर तैयार हो गई। अब केवल इसके संचालन का इंतजार है। हमें पूरी उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस मंडी को किसानों को समर्पित करेगी। इससे जिससे बनी क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधा मिलेगी और उन्हें इसका सीधा लाभ मिलेगा।
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