Srinagar: श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत पर तरुण चुघ का बड़ा बयान, शेख अब्दुल्ला की भूमिका पर उठाए सवाल
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने श्रीनगर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी मृत्यु को संदिग्ध बताया और तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला की भूमिका पर सवाल उठाए।
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भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने एसकेआईसीसी श्रीनगर में मंगलवार को एक कार्यक्रम में जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि डाॅ. मुखर्जी ने देश की राष्ट्रीय भावना को बनाए रखने के लिए प्राण न्योछावर कर दिए। उनके बलिदान को याद करते हुए चुघ ने उस समय जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे शेख अब्दुल्ला की भूमिका पर सवाल उठाए। कहा कि डॉ. मुखर्जी को जम्मू-कश्मीर में बिना अनुमति प्रवेश करने पर गिरफ्तार किया गया था और बाद में संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हुई। उन्होंने इसे साजिश करार दिया।
भाजपा नेता ने कहा, डाॅ. मुखर्जी प्रदेश के लिए अलग संविधान, अलग झंडा और अलग राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ थे जिसे शेख अब्दुल्ला अनुच्छेद 370 के तहत स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे। उनकी मृत्यु की कोई स्वतंत्र जांच या निष्पक्ष पड़ताल नहीं होना इस बात की ओर संकेत करता है कि इस पूरे प्रकरण के कई पहलू आज भी स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। चुघ ने कहा, पीएम मोदी ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने जैसे निर्णायक फैसले लेकर जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ एकीकृत किया और केंद्र शासित प्रदेश को विकास का नया विजन दिया।
उन्होंने अब्दुल्ला परिवार की निंदा करते हुए कहा कि इन्होंने प्रदेश के लोगों को बुनियादी अधिकार और आर्थिक समृद्धि से वंचित रखा। भाजपा एनईसी सदस्य और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. अनिर्बान गांगुली ने राष्ट्र निर्माण में श्यामा प्रसाद के योगदान को याद किया। कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा, महासचिव मोहम्मद अनवर खान, प्रदेश प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर व अन्य नेता मौजूद रहे।
पाकिस्तानी हमलों के पीड़ितों की याद में होलोकॉस्ट डे मनाए सरकार
चुघ ने मांग की है कि प्रदेश सरकार को 1947 में कबालियों के भेष में तत्कालीन रियासत पर हमला करने वाली पाकिस्तानी सेना के पीड़ितों की याद में होलोकॉस्ट डे मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने आदिवासियों के भेष में यहां हमला किया था। कश्मीरी नागरिकों की हत्या की। बेटियों के साथ दुर्व्यवहार किया और लगातार 96 घंटों तक जम्मू-कश्मीर में लूटपाट और कत्लेआम मचाया जो कि एक महाविनाश की तरह था।
तरुण चुघ ने इस बात पर जोर दिया कि उन घटनाओं को दर्शाने के लिए एक डॉक्यूमेंट्री बनाई जानी चाहिए जिसे सभी को दिखाया जाए इस पर किताबें लिखी जानी चाहिए और उस दौर के नरसंहार के रिकॉर्ड जनता के सामने लाए जाने चाहिए। जम्मू-कश्मीर की नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के कामकाज पर निशाना साधते हुए चुघ ने कहा कि निर्वाचित सरकार को शासन पर अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करना चाहिए।