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Srinagar News: नियुक्तियों में धांधली को लेकर पीडीपी ने सरकार को घेरा
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श्रीनगर में प्रदर्शन करते पीडीपी कार्यकर्ता। संवाद
- फोटो : samvad
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- श्रीनगर में कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरियों और आउटसोर्सिंग के जरिए हो रही नियुक्तियों में कथित धांधली को लेकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने मंगलवार को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। श्रीनगर में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया।
इस दौरान पीडीपी नेताओं ने मौजूदा सरकार पर भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार और युवाओं के हक मारने के गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शन के दौरान पीडीपी नेताओं ने कहा कि महज 25 महीने के इस कार्यकाल में सरकार ने बैकडोर एंट्री और चोर दरवाजे से लगभग 25,000 लोगों को नौकरियां दी हैं। उन्होंने नौकरियों के इस बंटवारे को नौकरियों की बंदरबांट करार दिया। नियुक्तियों की पात्रता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, आज इस सरकार में नौकरी पाने का क्राइटेरिया सिर्फ यह है कि अगर आप नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता हैं। अगर आप उनके रिश्तेदार हैं। अगर आप मंत्रियों के चमचे हैं या आपके पास पैसे हैं अगर ऐसा है, तभी आपको नौकरी मिलेगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था लेकिन इसके उलट आउटसोर्सिंग के नाम पर केवल अपने करीबियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है, जिससे राज्य का आम और मेहनती नौजवान दर-दर भटकने को मजबूर है।
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पार्टी का विरोध आउटसोर्सिंग की व्यवस्था से नहीं है बल्कि उसके पीछे अपनाई जा रही प्रक्रिया से है। उन्होंने सामान्य सरकारी नियुक्तियों का हवाला देते हुए कहा कि आम तौर पर युवाओं को परीक्षा देनी पड़ती है। मेरिट लिस्ट बनती है और रिजर्वेशन कैटेगरी का ध्यान रखा जाता है लेकिन यहां सारे नियम ताक पर रख दिए गए हैं।
नियुक्तियों के पीछे का सबसे बड़ा पैमाना केवल पैसा और चहेतों को फायदा पहुंचाना रह गया है। इस तरह के घोटालों और नाइंसाफी की वजह से जम्मू-कश्मीर के युवाओं में भारी निराशा फैल रही है। यही हताशा आगे चलकर युवाओं को ड्रग्स और सुसाइड जैसे गलत रास्तों पर धकेल रही है।
रिजर्वेशन और ओपन मेरिट के मसले पर सरकार सिर्फ वक्त काटने का काम कर रही है। कभी फाइल को दिल्ली तो कभी सचिवालय भेजने का बहाना बनाया जाता है।
पीडीपी नेताओं ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले में जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में जो भी नियुक्तियां की जाएं वे पूरी तरह से एक पारदर्शी तरीके से हों ताकि राज्य के योग्य और जरूरतमंद युवाओं को उनका हक मिल सके। पार्टी ने साफ किया है कि जब तक युवाओं को न्याय नहीं मिलता, वे उनके रोजगार के अधिकार के लिए सड़कों पर खड़े रहेंगे।
अमर उजाला ब्यूरो श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरियों और आउटसोर्सिंग के जरिए हो रही नियुक्तियों में कथित धांधली को लेकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने मंगलवार को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। श्रीनगर में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया।
इस दौरान पीडीपी नेताओं ने मौजूदा सरकार पर भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार और युवाओं के हक मारने के गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शन के दौरान पीडीपी नेताओं ने कहा कि महज 25 महीने के इस कार्यकाल में सरकार ने बैकडोर एंट्री और चोर दरवाजे से लगभग 25,000 लोगों को नौकरियां दी हैं। उन्होंने नौकरियों के इस बंटवारे को नौकरियों की बंदरबांट करार दिया। नियुक्तियों की पात्रता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, आज इस सरकार में नौकरी पाने का क्राइटेरिया सिर्फ यह है कि अगर आप नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता हैं। अगर आप उनके रिश्तेदार हैं। अगर आप मंत्रियों के चमचे हैं या आपके पास पैसे हैं अगर ऐसा है, तभी आपको नौकरी मिलेगी।
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उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था लेकिन इसके उलट आउटसोर्सिंग के नाम पर केवल अपने करीबियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है, जिससे राज्य का आम और मेहनती नौजवान दर-दर भटकने को मजबूर है।
पार्टी का विरोध आउटसोर्सिंग की व्यवस्था से नहीं है बल्कि उसके पीछे अपनाई जा रही प्रक्रिया से है। उन्होंने सामान्य सरकारी नियुक्तियों का हवाला देते हुए कहा कि आम तौर पर युवाओं को परीक्षा देनी पड़ती है। मेरिट लिस्ट बनती है और रिजर्वेशन कैटेगरी का ध्यान रखा जाता है लेकिन यहां सारे नियम ताक पर रख दिए गए हैं।
नियुक्तियों के पीछे का सबसे बड़ा पैमाना केवल पैसा और चहेतों को फायदा पहुंचाना रह गया है। इस तरह के घोटालों और नाइंसाफी की वजह से जम्मू-कश्मीर के युवाओं में भारी निराशा फैल रही है। यही हताशा आगे चलकर युवाओं को ड्रग्स और सुसाइड जैसे गलत रास्तों पर धकेल रही है।
रिजर्वेशन और ओपन मेरिट के मसले पर सरकार सिर्फ वक्त काटने का काम कर रही है। कभी फाइल को दिल्ली तो कभी सचिवालय भेजने का बहाना बनाया जाता है।
पीडीपी नेताओं ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले में जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में जो भी नियुक्तियां की जाएं वे पूरी तरह से एक पारदर्शी तरीके से हों ताकि राज्य के योग्य और जरूरतमंद युवाओं को उनका हक मिल सके। पार्टी ने साफ किया है कि जब तक युवाओं को न्याय नहीं मिलता, वे उनके रोजगार के अधिकार के लिए सड़कों पर खड़े रहेंगे।