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छात्र कल्याण सर्वोपरि, एआई-एमएल जैसे कोर्स शुरू हों : इत्तू
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- शिक्षा मंत्री ने सरकारी डिग्री कॉलेजों में दाखिले की समीक्षा की, नई टेक्नोलॉजी के कोर्स शुरू करने पर जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। उच्च शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के सरकारी डिग्री कॉलेजों में चल रही दाखिला प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा बैठक को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि छात्र कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता रहनी चाहिए और कॉलेजों को अधिक सुलभ, समावेशी और छात्रों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए उच्च शिक्षा क्षेत्र में निरंतर सुधार जरूरी हैं।
बैठक में मंत्री ने सरकारी डिग्री कॉलेजों में दाखिले की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग और कॉलेज प्राधिकारियों को तुलनात्मक रूप से कम दाखिले वाले संस्थानों में जागरूकता और आउटरीच पहल मजबूत करने के निर्देश दिए ताकि उच्च शिक्षा तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित हो सके। मंत्री ने जोर दिया कि प्रिंसिपल और फैकल्टी सदस्य छात्रों व अभिभावकों से सक्रिय रूप से जुड़कर सरकारी डिग्री कॉलेजों में उपलब्ध शैक्षणिक कार्यक्रमों, छात्रवृत्ति अवसरों और करियर मार्गों के बारे में जागरूकता बढ़ाएं। दाखिले के आंकड़ों की समीक्षा के दौरान मंत्री को बताया गया कि सरकार द्वारा दाखिला प्रक्रिया को सरल और आसान बनाने के लिए कई उपाय शुरू करने के बाद इस साल कॉलेजों में छात्र दाखिलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
दाखिला प्रक्रिया पर करीबी नजर रख रहीं मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में उच्च शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की प्राथमिक चिंता यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र छात्र को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा मिले। मंत्री ने कहा नए सुधारों ने पिछले कुछ वर्षों में कॉलेज दाखिलों में गिरावट के रुझान को उलटने में मदद की है और हमें उम्मीद है कि दाखिले के अगले दो दौर पूरे होने के बाद दाखिले के आंकड़े 50 हजार से अधिक हो जाएंगे।
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उन्होंने कहा कि लेगेसी कॉलेजों में अब भी अधिक मांग देखी जा रही है, जो उत्साहजनक है, लेकिन उच्च शिक्षा प्रणाली को कोर्स के विकल्प बढ़ाकर और छात्र कल्याण उपायों को मजबूत कर और सशक्त बनाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि किसी भी पात्र छात्र को उच्च शिक्षा से वंचित न किया जाए, इसके लिए इन-हाउस ऑनलाइन पोर्टल के जरिए वॉक-इन एडमिशन की सुविधा दी गई है।
प्रिंसिपलों को छात्रों के हित में छात्र-केंद्रित निर्णय लेने की छूट दी गई है। मंत्री ने छात्रों की बदलती जरूरतों और आकांक्षाओं के अनुरूप कोर्स ऑफरिंग को युक्तिसंगत बनाने, बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने और शैक्षणिक अवसर पैदा करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को दाखिले के रुझान पर करीबी नजर रखने और कम दाखिले वाले कॉलेजों में नामांकन सुधारने के लिए सभी जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रिंसिपलों से कुछ विषयों में दाखिलों में लगातार गिरावट पर इनपुट मांगे और इसे रोकने के उपाय सुझाने को कहा। उन्होंने जोर दिया कि निजी कॉलेजों को एक जैसे कार्यक्रमों के बजाय विविध कोर्स पेश करने चाहिए। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। उच्च शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के सरकारी डिग्री कॉलेजों में चल रही दाखिला प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा बैठक को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि छात्र कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता रहनी चाहिए और कॉलेजों को अधिक सुलभ, समावेशी और छात्रों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए उच्च शिक्षा क्षेत्र में निरंतर सुधार जरूरी हैं।
बैठक में मंत्री ने सरकारी डिग्री कॉलेजों में दाखिले की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग और कॉलेज प्राधिकारियों को तुलनात्मक रूप से कम दाखिले वाले संस्थानों में जागरूकता और आउटरीच पहल मजबूत करने के निर्देश दिए ताकि उच्च शिक्षा तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित हो सके। मंत्री ने जोर दिया कि प्रिंसिपल और फैकल्टी सदस्य छात्रों व अभिभावकों से सक्रिय रूप से जुड़कर सरकारी डिग्री कॉलेजों में उपलब्ध शैक्षणिक कार्यक्रमों, छात्रवृत्ति अवसरों और करियर मार्गों के बारे में जागरूकता बढ़ाएं। दाखिले के आंकड़ों की समीक्षा के दौरान मंत्री को बताया गया कि सरकार द्वारा दाखिला प्रक्रिया को सरल और आसान बनाने के लिए कई उपाय शुरू करने के बाद इस साल कॉलेजों में छात्र दाखिलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
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दाखिला प्रक्रिया पर करीबी नजर रख रहीं मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में उच्च शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की प्राथमिक चिंता यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र छात्र को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा मिले। मंत्री ने कहा नए सुधारों ने पिछले कुछ वर्षों में कॉलेज दाखिलों में गिरावट के रुझान को उलटने में मदद की है और हमें उम्मीद है कि दाखिले के अगले दो दौर पूरे होने के बाद दाखिले के आंकड़े 50 हजार से अधिक हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि लेगेसी कॉलेजों में अब भी अधिक मांग देखी जा रही है, जो उत्साहजनक है, लेकिन उच्च शिक्षा प्रणाली को कोर्स के विकल्प बढ़ाकर और छात्र कल्याण उपायों को मजबूत कर और सशक्त बनाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि किसी भी पात्र छात्र को उच्च शिक्षा से वंचित न किया जाए, इसके लिए इन-हाउस ऑनलाइन पोर्टल के जरिए वॉक-इन एडमिशन की सुविधा दी गई है।
प्रिंसिपलों को छात्रों के हित में छात्र-केंद्रित निर्णय लेने की छूट दी गई है। मंत्री ने छात्रों की बदलती जरूरतों और आकांक्षाओं के अनुरूप कोर्स ऑफरिंग को युक्तिसंगत बनाने, बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने और शैक्षणिक अवसर पैदा करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को दाखिले के रुझान पर करीबी नजर रखने और कम दाखिले वाले कॉलेजों में नामांकन सुधारने के लिए सभी जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रिंसिपलों से कुछ विषयों में दाखिलों में लगातार गिरावट पर इनपुट मांगे और इसे रोकने के उपाय सुझाने को कहा। उन्होंने जोर दिया कि निजी कॉलेजों को एक जैसे कार्यक्रमों के बजाय विविध कोर्स पेश करने चाहिए। संवाद