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ब्लॉक दिवस और बैक टू विलेज अभियानों के जरिए घर-घर पहुंचाईं सेवाएं : उपराज्यपाल
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श्रीनगर के एसकेआईसीसी में पंचायती राज विभाग के कार्यक्रम में उपराज्यपाल व अन्य। संवाद
- फोटो : shiv tripathi
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- मनोज सिन्हा ने सेवा से समृद्धि- पंचायत-आधारित सेवा वितरण क्षेत्रीय कार्यशाला को किया संबोधित
- 2020 में 35 ऑनलाइन सेवाओं को 2023 तक 1,100 तक बढ़ाया, जम्मू-कश्मीर नेशनल ई-सर्विस डिलीवरी रैंकिंग में सबसे आगे रहा
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से आयोजित सेवा से समृद्धि-पंचायत-आधारित सेवा वितरण क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ब्लॉक दिवस और बैक टू विलेज अभियानों के जरिए घर-घर सेवाएं पहुंचाई गई हैं।
उपराज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए ऐतिहासिक बदलावों और 3-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था से आई समावेशी विकास की क्रांति पर प्रकाश डाला। उपराज्यपाल ने कहा कि 2020 में, हमने एक ऐसा जम्मू-कश्मीर बनाने का काम शुरू किया जहां सरकार नागरिकों के घर-घर तक पहुंचे। लोगों को प्राथमिकता देने वाले नजरिए के साथ हमने पब्लिक सर्विस डिलीवरी में क्रांतिकारी बदलाव किए। 2020 में सिर्फ 35 ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ाकर 2023 तक 1,100 से ज्यादा पहुंचाया। जम्मू-कश्मीर नेशनल ई-सर्विस डिलीवरी रैंकिंग में सबसे आगे रहा।
हमने पंचायती राज संस्थाओं को गवर्नेंस में सबसे मजबूत आवाज और सबसे बड़े भागीदार के तौर पर स्थापित किया। ब्लॉक दिवस और बैक टू विलेज जैसे अभियानों के जरिए हमने यह पक्का करने की कोशिश की कि सेवाएं लोगों के दरवाजे तक पहुंचें, इंफ्रास्ट्रक्चर स्थानीय जरूरतों को पूरा करे और नीतियां जमीनी स्तर से ऊपर की ओर बनें। हमने आम आदमी की उम्मीदों को प्रशासन के केंद्र में रखा।
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नागरिक समाज संगठनों, शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों और ग्रामीण तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी इसमें भाग लिया। विमर्श का मुख्य फोकस डिजिटल बदलाव, नागरिकों की भागीदारी, इनोवेशन और जमीनी स्तर पर सार्वजनिक सेवाओं तक बेहतर पहुंच के माध्यम से पंचायत-संचालित सेवा वितरण को मजबूत करने पर था।
इस दौरान ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री जाविद अहमद डार, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज, आयुक्त सचिव सूचना प्रौद्योगिकी सौरभ भगत, संयुक्त सचिव एमओपीआर पल्का साहनी, मुख्य परिचालन अधिकारी सामान्य सेवा केंद्र प्रवीण चांदेकर, महानिदेशक जम्मू-कश्मीर आयात रेहाना बतूल आदि मौजूद रहे।
महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, ओडिशा, कर्नाटक और केरल से ज्यादा डिजिटल ट्रांजेक्शन जम्मू-कश्मीर में
उपराज्यपाल ने हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से आए प्रतिभागियों से जम्मू-कश्मीर के जमीनी स्तर पर सर्विस डिलीवरी मॉडल जैसे बीम्स एम्पावरमेंट, आपकी जमीन-आपकी निगरानी और आपका मोबाइल - हमारा ऑफिस का अध्ययन करने का आग्रह किया। उन्होंने भारत सरकार की उस रिपोर्ट का जिक्र किया जिसमें बताया गया था कि 2016 और 2018 के बीच जम्मू-कश्मीर में तीन सालों में 2 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन हुए थे। इसके उलट सिर्फ 2023 के शुरुआती छह महीनों में ही 50 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन हुए जो महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, ओडिशा, कर्नाटक और केरल जैसे कई बड़े राज्यों से कहीं ज्यादा हैं। आज जम्मू-कश्मीर में 15,000 से ज्यादा कॉमन सर्विस सेंटर आउटलेट काम कर रहे हैं। 4,290 पंचायतों में से 4,211 इस नेटवर्क से जुड़ी हैं जो 98.16 प्रतिशत कवरेज दिखाता है। बाकी 79 पंचायतें बहुत दूर-दराज और सीमावर्ती इलाकों में हैं जहां कनेक्टिविटी एक चुनौती बनी हुई है।
ज्ञान के आदान-प्रदान की संस्कृति को भी मजबूत करें
उपराज्यपाल ने कहा, हमें ज्ञान के आदान-प्रदान की संस्कृति को भी मजबूत करना चाहिए। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के सफल मॉडल, बेहतरीन तौर-तरीके और नवाचार को साझा करना जरूरी है ताकि आखिरी छोर तक सर्विस डिलीवरी और बेहतर हो सके। मेरा मानना है कि इस तरह के आयोजन आपसी सीख और सहयोग को बढ़ावा देंगे। हरियाणा का कोई सफल पंचायत मॉडल कर्नाटक की किसी पंचायत को प्रेरित कर सकता है। इसी तरह, जम्मू-कश्मीर की कोई नई पहल झारखंड में नई संभावनाएं खोल सकती है। सर्विस डिलीवरी पर क्षेत्रीय सम्मेलन भारत की तीन मुख्य खूबियों को दिखाता है - विविधता में एकता, सहयोग से मजबूती और सेवा से समृद्धि।
पांच सलाह दीं, कहा-विलेज इनोवेशन लैब बनाई जाए
उपराज्यपाल ने प्रतिभागियों के साथ कुछ अहम सुझाव साझा किए जिन्हें वे अपने-अपने राज्यों में लागू कर सकें। मेरी पहली सलाह है कि हर पंचायत में एक विलेज इनोवेशन लैब बनाई जाए। वहां स्थानीय युवा, कृषि विज्ञान केंद्र और सामाजिक संगठन मिलकर कम लागत वाले सोलर समाधान, सिंचाई के नए तरीके और अन्य नवाचार के काम कर सकते हैं। मेरी दूसरी सलाह है कि हर पंचायत में आधुनिक क्षमता-निर्माण कार्यक्रम चलाए जाएं। तीसरी सलाह है कि हर पंचायत में भागीदारी वाली बजटिंग को संस्थागत रूप दिया जाए। चौथी सलाह है कि ‘ग्रीन जम्मू-कश्मीर’, ‘एक पेड़ मां के नाम’, ‘एक पेड़ बेटी के नाम’ जैसे टिकाऊ विकास मॉडल को देश भर की पंचायतों में मुख्यधारा में लाया जाए। पांचवीं सलाह है कि सभी योजनाओं में महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका दी जाए।
बेहतरीन ग्राम पंचायतों और कॉमन सर्विस सेंटर्स का सम्मान
वर्कशॉप के हिस्से के तौर पर कुपवाड़ा की पंडितपोरा ग्राम पंचायत और बडगाम (जम्मू-कश्मीर) के समर्पित सीएससी विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर सैयद वारिस हाफिज के साथ-साथ भाग लेने वाले राज्यों की बेहतरीन ग्राम पंचायतों और कॉमन सर्विस सेंटर्स (सीएससी) को सम्मानित किया गया। यह वर्कशॉप कॉमन सर्विसेज़ सेंटर स्पेशल पर्पस व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के सहयोग से आयोजित की गई थी।
- 2020 में 35 ऑनलाइन सेवाओं को 2023 तक 1,100 तक बढ़ाया, जम्मू-कश्मीर नेशनल ई-सर्विस डिलीवरी रैंकिंग में सबसे आगे रहा
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से आयोजित सेवा से समृद्धि-पंचायत-आधारित सेवा वितरण क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ब्लॉक दिवस और बैक टू विलेज अभियानों के जरिए घर-घर सेवाएं पहुंचाई गई हैं।
उपराज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए ऐतिहासिक बदलावों और 3-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था से आई समावेशी विकास की क्रांति पर प्रकाश डाला। उपराज्यपाल ने कहा कि 2020 में, हमने एक ऐसा जम्मू-कश्मीर बनाने का काम शुरू किया जहां सरकार नागरिकों के घर-घर तक पहुंचे। लोगों को प्राथमिकता देने वाले नजरिए के साथ हमने पब्लिक सर्विस डिलीवरी में क्रांतिकारी बदलाव किए। 2020 में सिर्फ 35 ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ाकर 2023 तक 1,100 से ज्यादा पहुंचाया। जम्मू-कश्मीर नेशनल ई-सर्विस डिलीवरी रैंकिंग में सबसे आगे रहा।
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नागरिक समाज संगठनों, शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों और ग्रामीण तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी इसमें भाग लिया। विमर्श का मुख्य फोकस डिजिटल बदलाव, नागरिकों की भागीदारी, इनोवेशन और जमीनी स्तर पर सार्वजनिक सेवाओं तक बेहतर पहुंच के माध्यम से पंचायत-संचालित सेवा वितरण को मजबूत करने पर था।
इस दौरान ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री जाविद अहमद डार, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज, आयुक्त सचिव सूचना प्रौद्योगिकी सौरभ भगत, संयुक्त सचिव एमओपीआर पल्का साहनी, मुख्य परिचालन अधिकारी सामान्य सेवा केंद्र प्रवीण चांदेकर, महानिदेशक जम्मू-कश्मीर आयात रेहाना बतूल आदि मौजूद रहे।
महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, ओडिशा, कर्नाटक और केरल से ज्यादा डिजिटल ट्रांजेक्शन जम्मू-कश्मीर में
उपराज्यपाल ने हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से आए प्रतिभागियों से जम्मू-कश्मीर के जमीनी स्तर पर सर्विस डिलीवरी मॉडल जैसे बीम्स एम्पावरमेंट, आपकी जमीन-आपकी निगरानी और आपका मोबाइल - हमारा ऑफिस का अध्ययन करने का आग्रह किया। उन्होंने भारत सरकार की उस रिपोर्ट का जिक्र किया जिसमें बताया गया था कि 2016 और 2018 के बीच जम्मू-कश्मीर में तीन सालों में 2 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन हुए थे। इसके उलट सिर्फ 2023 के शुरुआती छह महीनों में ही 50 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन हुए जो महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, ओडिशा, कर्नाटक और केरल जैसे कई बड़े राज्यों से कहीं ज्यादा हैं। आज जम्मू-कश्मीर में 15,000 से ज्यादा कॉमन सर्विस सेंटर आउटलेट काम कर रहे हैं। 4,290 पंचायतों में से 4,211 इस नेटवर्क से जुड़ी हैं जो 98.16 प्रतिशत कवरेज दिखाता है। बाकी 79 पंचायतें बहुत दूर-दराज और सीमावर्ती इलाकों में हैं जहां कनेक्टिविटी एक चुनौती बनी हुई है।
ज्ञान के आदान-प्रदान की संस्कृति को भी मजबूत करें
उपराज्यपाल ने कहा, हमें ज्ञान के आदान-प्रदान की संस्कृति को भी मजबूत करना चाहिए। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के सफल मॉडल, बेहतरीन तौर-तरीके और नवाचार को साझा करना जरूरी है ताकि आखिरी छोर तक सर्विस डिलीवरी और बेहतर हो सके। मेरा मानना है कि इस तरह के आयोजन आपसी सीख और सहयोग को बढ़ावा देंगे। हरियाणा का कोई सफल पंचायत मॉडल कर्नाटक की किसी पंचायत को प्रेरित कर सकता है। इसी तरह, जम्मू-कश्मीर की कोई नई पहल झारखंड में नई संभावनाएं खोल सकती है। सर्विस डिलीवरी पर क्षेत्रीय सम्मेलन भारत की तीन मुख्य खूबियों को दिखाता है - विविधता में एकता, सहयोग से मजबूती और सेवा से समृद्धि।
पांच सलाह दीं, कहा-विलेज इनोवेशन लैब बनाई जाए
उपराज्यपाल ने प्रतिभागियों के साथ कुछ अहम सुझाव साझा किए जिन्हें वे अपने-अपने राज्यों में लागू कर सकें। मेरी पहली सलाह है कि हर पंचायत में एक विलेज इनोवेशन लैब बनाई जाए। वहां स्थानीय युवा, कृषि विज्ञान केंद्र और सामाजिक संगठन मिलकर कम लागत वाले सोलर समाधान, सिंचाई के नए तरीके और अन्य नवाचार के काम कर सकते हैं। मेरी दूसरी सलाह है कि हर पंचायत में आधुनिक क्षमता-निर्माण कार्यक्रम चलाए जाएं। तीसरी सलाह है कि हर पंचायत में भागीदारी वाली बजटिंग को संस्थागत रूप दिया जाए। चौथी सलाह है कि ‘ग्रीन जम्मू-कश्मीर’, ‘एक पेड़ मां के नाम’, ‘एक पेड़ बेटी के नाम’ जैसे टिकाऊ विकास मॉडल को देश भर की पंचायतों में मुख्यधारा में लाया जाए। पांचवीं सलाह है कि सभी योजनाओं में महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका दी जाए।
बेहतरीन ग्राम पंचायतों और कॉमन सर्विस सेंटर्स का सम्मान
वर्कशॉप के हिस्से के तौर पर कुपवाड़ा की पंडितपोरा ग्राम पंचायत और बडगाम (जम्मू-कश्मीर) के समर्पित सीएससी विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर सैयद वारिस हाफिज के साथ-साथ भाग लेने वाले राज्यों की बेहतरीन ग्राम पंचायतों और कॉमन सर्विस सेंटर्स (सीएससी) को सम्मानित किया गया। यह वर्कशॉप कॉमन सर्विसेज़ सेंटर स्पेशल पर्पस व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के सहयोग से आयोजित की गई थी।