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Srinagar News: त्राल के जरिहार्द में पीलिया के 30 मामले आए सामने
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पुलवामा। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल के जरीहार्द इलाके में पिछले कुछ सप्ताह में पीलिया के लगभग 30 मामले सामने आए हैं जिनमें ज्यादातर बच्चे शामिल हैं।
स्थानीय निवासियों के अनुसार मामलों में अचानक हुई बढ़ोतरी से इलाके में लोगों में चिंता बढ़ गई है। कई परिवार अपने बच्चों को पास के स्वास्थ्य केंद्रों में ले जा रहे हैं क्योंकि बच्चों में आंखें पीली पड़ना, थकान और भूख न लगना जैसे लक्षण दिखाई देने लगे हैं।
एक स्थानीय निवासी शफकत नबी ने कहा कि हमने पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी। ज्यादातर प्रभावित लोग छोटे बच्चे हैं जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आगे कहा कि हमें डर है कि पीने का दूषित पानी ही इसका मुख्य कारण हो सकता है। अधिकारियों को इसके प्रसार को रोकने के लिए तुरंत पानी की जांच और बड़े पैमाने पर सैंपलिंग करवानी चाहिए।
एक अन्य निवासी बशारत रशीद ने कहा कि इलाके के कई परिवार पानी के साझा स्रोतों पर निर्भर हैं। अगर पानी दूषित है तो इससे पूरी आबादी प्रभावित हो सकती है। सरकार को और मामले सामने आने का इंतजार नहीं करना चाहिए। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पानी में उचित मात्रा में क्लोरीन मिलाने और साफ-सफाई से जुड़ी आदतों के बारे में जागरूकता अभियान चलाने की अपील की।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है और उन्होंने जनता से अपील की कि वे घबराएं नहीं बल्कि रोकथाम के उपायों का सख्ती से पालन करें।
एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि पीलिया के लगभग 30 संदिग्ध मामले सामने आए हैं जिनमें ज्यादातर मरीज नाबालिग हैं। हमारी टीमें सक्रिय रूप से स्थिति का जायजा ले रही हैं। हम पीने के पानी में मिलावट सहित बीमारी के संभावित स्रोतों की भी जांच कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि लोगों को केवल उबला हुआ या ठीक से फिल्टर किया हुआ पानी ही पीना चाहिए। अपनी निजी साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए और बाहर का खाना खाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि लक्षण दिखाई देते ही तुरंत इसकी जानकारी देना बहुत जरूरी है। हमने स्थानीय लोगों को सलाह दी है कि अगर उन्हें कोई भी लक्षण दिखाई दे तो वे तुरंत पास के स्वास्थ्य केंद्रों में जाएं।
इस बीच अधिकारियों ने बताया कि बीमारी को और फैलने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं जिनमें सैंपल इकट्ठा करना और मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेना शामिल है।
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स्थानीय निवासियों के अनुसार मामलों में अचानक हुई बढ़ोतरी से इलाके में लोगों में चिंता बढ़ गई है। कई परिवार अपने बच्चों को पास के स्वास्थ्य केंद्रों में ले जा रहे हैं क्योंकि बच्चों में आंखें पीली पड़ना, थकान और भूख न लगना जैसे लक्षण दिखाई देने लगे हैं।
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एक स्थानीय निवासी शफकत नबी ने कहा कि हमने पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी। ज्यादातर प्रभावित लोग छोटे बच्चे हैं जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आगे कहा कि हमें डर है कि पीने का दूषित पानी ही इसका मुख्य कारण हो सकता है। अधिकारियों को इसके प्रसार को रोकने के लिए तुरंत पानी की जांच और बड़े पैमाने पर सैंपलिंग करवानी चाहिए।
एक अन्य निवासी बशारत रशीद ने कहा कि इलाके के कई परिवार पानी के साझा स्रोतों पर निर्भर हैं। अगर पानी दूषित है तो इससे पूरी आबादी प्रभावित हो सकती है। सरकार को और मामले सामने आने का इंतजार नहीं करना चाहिए। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पानी में उचित मात्रा में क्लोरीन मिलाने और साफ-सफाई से जुड़ी आदतों के बारे में जागरूकता अभियान चलाने की अपील की।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है और उन्होंने जनता से अपील की कि वे घबराएं नहीं बल्कि रोकथाम के उपायों का सख्ती से पालन करें।
एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि पीलिया के लगभग 30 संदिग्ध मामले सामने आए हैं जिनमें ज्यादातर मरीज नाबालिग हैं। हमारी टीमें सक्रिय रूप से स्थिति का जायजा ले रही हैं। हम पीने के पानी में मिलावट सहित बीमारी के संभावित स्रोतों की भी जांच कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि लोगों को केवल उबला हुआ या ठीक से फिल्टर किया हुआ पानी ही पीना चाहिए। अपनी निजी साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए और बाहर का खाना खाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि लक्षण दिखाई देते ही तुरंत इसकी जानकारी देना बहुत जरूरी है। हमने स्थानीय लोगों को सलाह दी है कि अगर उन्हें कोई भी लक्षण दिखाई दे तो वे तुरंत पास के स्वास्थ्य केंद्रों में जाएं।
इस बीच अधिकारियों ने बताया कि बीमारी को और फैलने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं जिनमें सैंपल इकट्ठा करना और मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेना शामिल है।