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Srinagar News: शिक्षा विभाग के अधिकारियों समेत पांच को जेल
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पुलवामा में शिक्षा विभाग में 28 साल पहले फर्जी नियुक्ति का मामला
अदालत ने कहा- भ्रष्टाचार एक कैंसर है
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। पुलवामा की भ्रष्टाचार विरोधी अदालत के विशेष न्यायाधीश ने मंगलवार को लगभग 28 साल पुराने एक फर्जी नियुक्ति मामले में पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें पांच साल की कैद की सजा सुनाई।
डॉ. नूर मोहम्मद मीर की अध्यक्षता वाली अदालत ने 1998 में विजिलेंस ऑर्गनाइजेशन कश्मीर (अब एसीबी) द्वारा दर्ज किए गए एक मामले में आरोपी को सजा सुनाते हुए कहा कई भ्रष्टाचार ऐसा अपराध नहीं है जिसका कोई पीड़ित न हो। यह एक ‘कैंसर’ है जो नागरिक और सरकार के बीच भरोसे की बुनियाद को तबाह कर देता है। इस मामले में पुलवामा के गवर्नमेंट हाई स्कूल गोरीपोरा में जाली दस्तावेजों और मनगढ़ंत सर्विस रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके एक महिला को गैर-कानूनी तरीके से टीचर के पद पर नियुक्त किया गया था।
यह मामला शुरू में छह लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था। इनमें असद-उल्लाह लोन (उस समय गवर्नमेंट हाई स्कूल गोरीपोरा के हेडमास्टर), गुलाम मोहम्मद शेख (उस समय जूनियर असिस्टेंट), बशीर अहमद शाह (उस समय अर्दली), सैयद शौकीन अंद्राबी (उस समय अर्दली), मोहम्मद अशरफ खान और हमीदा अख्तर (लाभार्थी)। असद का 30 अप्रैल 2025 को निधन हो गया और 29 नवंबर 2025 को अदालत ने उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही को समाप्त कर दिया।
अदालत ने कहा कि शिक्षा विभाग में इस तरह की धोखाधड़ी का असर और भी ज्यादा विनाशकारी होता है। जब आरोपी नंबर 6 (अख्तर) जैसे ‘चोर-रास्ते’ से आए लोग उन पदों पर कब्ज़ा कर लेते हैं जो काबिल लोगों के लिए होते हैं तो वे सिर्फ सैलरी ही नहीं चुराते बल्कि वे उन बच्चों का भविष्य भी चुरा लेते हैं जिन्हें उन्हें पढ़ाना होता है और उन काबिल युवाओं की उम्मीदें भी चुरा लेते हैं जिन्हें वह मौका नहीं मिल पाया।
अदालत ने गुलाम मोहम्मद शेख, बशीर अहमद शाह और सैयद शौकीन अंद्राबी को अलग धाराओं में अलग-अलग सजा सुनाई है। इनमें सबसे अधिक पांच साल की जेल और 50,000 रुपये का जुर्माना है। जुर्माना न भरने पर एक साल की अतिरिक्त सजा होगी। मोहम्मद अशरफ खान और हमीदा अख्तर को भी इतनी ही सजा सुनाई गई है। सभी मुख्य सजाएं एक साथ चलेंगी।
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अदालत ने कहा- भ्रष्टाचार एक कैंसर है
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। पुलवामा की भ्रष्टाचार विरोधी अदालत के विशेष न्यायाधीश ने मंगलवार को लगभग 28 साल पुराने एक फर्जी नियुक्ति मामले में पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें पांच साल की कैद की सजा सुनाई।
डॉ. नूर मोहम्मद मीर की अध्यक्षता वाली अदालत ने 1998 में विजिलेंस ऑर्गनाइजेशन कश्मीर (अब एसीबी) द्वारा दर्ज किए गए एक मामले में आरोपी को सजा सुनाते हुए कहा कई भ्रष्टाचार ऐसा अपराध नहीं है जिसका कोई पीड़ित न हो। यह एक ‘कैंसर’ है जो नागरिक और सरकार के बीच भरोसे की बुनियाद को तबाह कर देता है। इस मामले में पुलवामा के गवर्नमेंट हाई स्कूल गोरीपोरा में जाली दस्तावेजों और मनगढ़ंत सर्विस रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके एक महिला को गैर-कानूनी तरीके से टीचर के पद पर नियुक्त किया गया था।
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यह मामला शुरू में छह लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था। इनमें असद-उल्लाह लोन (उस समय गवर्नमेंट हाई स्कूल गोरीपोरा के हेडमास्टर), गुलाम मोहम्मद शेख (उस समय जूनियर असिस्टेंट), बशीर अहमद शाह (उस समय अर्दली), सैयद शौकीन अंद्राबी (उस समय अर्दली), मोहम्मद अशरफ खान और हमीदा अख्तर (लाभार्थी)। असद का 30 अप्रैल 2025 को निधन हो गया और 29 नवंबर 2025 को अदालत ने उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही को समाप्त कर दिया।
अदालत ने कहा कि शिक्षा विभाग में इस तरह की धोखाधड़ी का असर और भी ज्यादा विनाशकारी होता है। जब आरोपी नंबर 6 (अख्तर) जैसे ‘चोर-रास्ते’ से आए लोग उन पदों पर कब्ज़ा कर लेते हैं जो काबिल लोगों के लिए होते हैं तो वे सिर्फ सैलरी ही नहीं चुराते बल्कि वे उन बच्चों का भविष्य भी चुरा लेते हैं जिन्हें उन्हें पढ़ाना होता है और उन काबिल युवाओं की उम्मीदें भी चुरा लेते हैं जिन्हें वह मौका नहीं मिल पाया।
अदालत ने गुलाम मोहम्मद शेख, बशीर अहमद शाह और सैयद शौकीन अंद्राबी को अलग धाराओं में अलग-अलग सजा सुनाई है। इनमें सबसे अधिक पांच साल की जेल और 50,000 रुपये का जुर्माना है। जुर्माना न भरने पर एक साल की अतिरिक्त सजा होगी। मोहम्मद अशरफ खान और हमीदा अख्तर को भी इतनी ही सजा सुनाई गई है। सभी मुख्य सजाएं एक साथ चलेंगी।